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एमडीयू एलुमनी
Updated Mon, 16 Apr 2018 02:52 AM IST
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फ्लैग : एमडीयू में हुई यूनिवर्सिटी एलुमनी मीट में पहुंचे अतिरिक्त मुख्य सचिव ने यूथ फेस्टिवल में सुनाई रागनी दोहराई
हैडिंग : मन्नै देखा ढंग निराला, बाग मैं कट रया था चाला, छोरी खड़ी लखा री थी, ओ परदेसी सुनता जा आवाज लगा री थी..
- विवि की पांचवीं एलुमनी में शिक्षक, जज, वकील, व्यवसायी समेत अनेक लोग पहुंचे
- टैगोर ऑडिटोरियम के बाद विवि के विभिन्न विभागों में आयोजित किए गए कार्यक्त्रस्म
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
मन्नै देखा ढंग निराला, बाग मैं कट रया था चाला, छोरी खड़ी लखा री थी, ओ परदेसी सुनता जा आवाज लगा री थी.. रागनी के जरिए यह स्वर लहरी अतिरिक्त मुख्य सचिव रामनिवास ने टैगोर ओडिटोरियम के मंच पर छेड़ी। अपने कॉलेज के दिनों में चंडीगढ़ यूथ फेस्टीवल में सुनाई रागनी रविवार को वर्षों बाद दोहराई। इसे सुन कर श्रोताओं में वंस मोर का शोर गूंज उठा। इसके बाद एसीएस ने पर्दा है, पर्दा.. कव्वाली भी सुनाई। वे रविवार को एमडीयू की यूनिवर्सिटी एलुमनी मीट में पहुंचे थे। मंच पर उन्हें श्रोताओं की डिमांड पर कव्वाली सुनाने के लिए दोबारा बुलाया गया। इस बीच उन्होंने विवि में बिताए पुराने समय की यादें साझा करते हुए कहा कि मैं अपने घर लौट कर आया हूं। यहां सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में विवि के पुस्तकालय में बिताए दिनों की याद ताजा हो गई। उन्होंने युवा पीढ़ी को जीवन में सदैव सकारात्मक रहने का मंत्र देते हुए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया। विवि के पहले बैच वर्ष 1976-78 के बैच समेत करीब 1700 पूर्व विद्यार्थी एलुमनी मीट में पहुंचे।
पर्यटक स्थल पर बनाया जाएगा एलुमनी होम
एमडीयू कुलपति प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया ने कहा कि पूर्व विद्यार्थी (एलुमनाई) विवि की आन-बान-शान हैं। एलुमनी को ब्रांड एंबेसडर करार देते हुए उन्होंने कहा कि मातृ संस्थान के विकास में एलुमनी अपना योगदान दें। विशेष तौर पर वर्तमान विद्यार्थियों की ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट के लिए विश्वविद्यालय की मदद करें। इससे विद्यार्थियों को लाभ होगा। उन्हें सही करियर चुनने व आगे बढ़ने की राह बनाने में दिक्कत नहीं होगी। भविष्य में पूर्व विद्यार्थियों के लिए एलुमनी होम किसी पर्यटक स्थल पर बनाने की योजना है। निदेशक एलुमनी रिलेशंज प्रो. राजीव कुमार ने विश्वविद्यालय के एलुमनी रिलेशन्ज विभाग की ओर से आयोजित गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने एलुमनी से विश्वविद्यालय की ओर से स्थापित एलुमनी फंड में योगदान देने की भी अपील की। मंच संचालन प्रो. संजू नंदा व डॉ. दिव्या मल्हान ने किया। आभार प्रदर्शन प्रो. सोनिया मलिक ने किया।
विवि ने दी सामाजिक सरोकारों की शिक्षा
एलुमनी मीट में सीडीएलयू सिरसा के कुलपति प्रो. विजय कायत विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय मां है। इसने शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व नैतिक संस्कार दिए हैं। सामाजिक सरोकारों की शिक्षा भी यहीं से मिली। हमें इसका सम्मान करना चाहिए। डीन एकेडमिक एफेयर्स प्रो. अजय कुमार राजन ने कहा कि एलुमनी विश्वविद्यालय के झंडाबरदार हैं। इनकी वजह से एमडीयू की प्रसिद्धि है। निदेशक युवा कल्याण डॉ. जगबीर राठी के कार्यक्रम संयोजन करते हुए अपने नए हैप्पीनेस गीत, राजी, राजी रहया करो हंसते-हंसाते रहा करो की प्रस्तुति दी। एडवोकेट जोगेंद्र मोर ने हरियाणवी कविता प्रस्तुत की। विनय सैनी ने गीत-फूलों की रानी, बहारों की मलिका, छात्रा शीतल चहल ने मुझे तुम याद आए, कांटों से खींच के ये आंचल, ए दिल मुझे बता दे सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। एलुमनी सौरभ वर्मा ने हिंदी, हरियाणवी, पंजाबी गीतों की मेडले की प्रस्तुति दी।
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एलुमनी को दिखाई डाक्यूमेंट्री
एलुमनाई हरविंदर मलिक की कलाकृतियों की डिजिटल डाक्यूमेंट्री के साथ विवि की प्रगति यात्रा की डाक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। यहां एलुमनी डायरेक्ट्री का विमोचन भी किया गया। हैफेड के मुख्य महाप्रबंधक आरपी साहनी, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश शर्मा, उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा के एनएसएस राज्य समन्वयन अधिकारी डॉ. कपेंद्र सिंह, प्रतिष्ठित मीडिया एवं संस्कृति कर्मी हरविंदर मलिक, पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के अध्यक्ष बिजेंद्र अहलावत, सेवानिवृत प्रोफेसर केपीएस महलवार, प्रो. अमर वर्मा, विजेंद्र गोयल, नरेंद्र सोनी, प्रो. कुलदीप छिकारा, सुरेंद्र दहिया, समेत विभिन्न विभागों क्षेत्रों के एलुमनी उपस्थित रहे।
याडै आकै अपना सा लागै..
निजी कंपनी के निदेशक आरएस डबाड ने एलुमनी व नई पीढ़ी को अपने संघर्ष की कहानी के जरिए आगे बढ़ने का मंत्र देते हुए कहा कि कामयाब होना है तो यह सोचना छोड़ दो कि लोग क्या कहेंगे। वह करो जो करना है। जो करना है वो मन लगाकर करो। विवि में एमबीए करने के बाद भी नौकरी नहीं मिली थी। इस कारण शादी भी अटक गई थी। अपनी पहली नौकरी 300 रुपये की मिली थी। गांव के कंडेक्टर ने बस में देख लिया तो अपनी डर गया था। सोचा कि यह गांव में जाकर बताएगा। बेइजती होगी। काम के दौरान ही एक व्यक्ति ने दूसरों के सोचने का डर निकालने का मंत्र दिया था। इसी मंत्र ने 1.86 करोड़ के पैकेज वाला अधिकारी बनाया है। विवि अपना है। यहां अपने जीवन का सबसे कीमती समय गुजारा है। इसलिए याडै आकै अपना सा लागै। प्रदेश का कोई युवा कैरियर संबंधी जानकारी चाहता है तो संपर्क कर सकता है। उसकी हर संभव मदद करूंगा।
अपने विभागों में भी गए एलुमनी
एलुमनी मीट के बाद पूर्व विद्यार्थी अपने विभाग पहुंचे। यहां पूरा विभाग घूम कर शिक्षकों व विद्यार्थियों से इंटैरेक्ट किया। इस दौरान अपना पुराना समय विद्यार्थी के रूप में याद किया। नए विद्यार्थियों को पूर्व विद्यार्थियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए जीवन में आगे बढ़ने के लिए संघर्षरत रहने की नसीहत दी।
टाइगर ग्रुप ने मिलाए बिछुड़े यार
टाइगर। कैसा है। लंबू तू कैसा है। भाई शायद भी आया है। फिर तो महफिल सजेगी। यह अंदाज रविवार को एमडीयू विधि विभाग के एलुमनी का नजर आया। बैच के पुराने दोस्तों को दो दशक बाद देख बके चेहरे खिल उठे। यतेंद्र उर्फ टाइगर ने कहा कि हमारे शायर राजेश शर्मा सोनीपत के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हो गए हैं। लंबू सुरेंद्र वर्मा ने कहा टाइगर तू भी वकालत कर रहा है। यार ये अच्छा हुआ टाइगर व्हॉट्सअप ग्रुप बना लिया। सब मिल तो गए। कैंपस पिछले 20 साल में काफी बदल गया है। अब जंगल नहीं, हरा भरा कैंपस नजर आ रहा है। याद है मूट कोर्ट का टूर चंडीगढ़ जाना था। सतीश शर्मा रह गया था। उसी ने सबको सुबह उठाया और नहाने के चक्कर में खुद ही रह गया। अपना हिमालय हॉस्टल, सतनाम की कैंटीन सब वैसे ही हैं। हमारा बैच सबसे बड़ा था। इसी में से सबसे ज्यादा जयूडिशियल ऑफिसर व दो आईएएस सिलेक्ट हुए। इसके अलावा दस से ज्यादा एडीजे भी इसी बैच से निकले। हॉस्टल में रहकर सब वर्क आउट करते थे। डॉ. केपीएस महलवान स्ट्रिक तो थे, मगर इंपोर्टेंट प्रश्न जरूर बताते थे।
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फ्लैग : एमडीयू में हुई यूनिवर्सिटी एलुमनी मीट में पहुंचे अतिरिक्त मुख्य सचिव ने यूथ फेस्टिवल में सुनाई रागनी दोहराई
हैडिंग : मन्नै देखा ढंग निराला, बाग मैं कट रया था चाला, छोरी खड़ी लखा री थी, ओ परदेसी सुनता जा आवाज लगा री थी..
- विवि की पांचवीं एलुमनी में शिक्षक, जज, वकील, व्यवसायी समेत अनेक लोग पहुंचे
- टैगोर ऑडिटोरियम के बाद विवि के विभिन्न विभागों में आयोजित किए गए कार्यक्त्रस्म
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक
मन्नै देखा ढंग निराला, बाग मैं कट रया था चाला, छोरी खड़ी लखा री थी, ओ परदेसी सुनता जा आवाज लगा री थी.. रागनी के जरिए यह स्वर लहरी अतिरिक्त मुख्य सचिव रामनिवास ने टैगोर ओडिटोरियम के मंच पर छेड़ी। अपने कॉलेज के दिनों में चंडीगढ़ यूथ फेस्टीवल में सुनाई रागनी रविवार को वर्षों बाद दोहराई। इसे सुन कर श्रोताओं में वंस मोर का शोर गूंज उठा। इसके बाद एसीएस ने पर्दा है, पर्दा.. कव्वाली भी सुनाई। वे रविवार को एमडीयू की यूनिवर्सिटी एलुमनी मीट में पहुंचे थे। मंच पर उन्हें श्रोताओं की डिमांड पर कव्वाली सुनाने के लिए दोबारा बुलाया गया। इस बीच उन्होंने विवि में बिताए पुराने समय की यादें साझा करते हुए कहा कि मैं अपने घर लौट कर आया हूं। यहां सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में विवि के पुस्तकालय में बिताए दिनों की याद ताजा हो गई। उन्होंने युवा पीढ़ी को जीवन में सदैव सकारात्मक रहने का मंत्र देते हुए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया। विवि के पहले बैच वर्ष 1976-78 के बैच समेत करीब 1700 पूर्व विद्यार्थी एलुमनी मीट में पहुंचे।
पर्यटक स्थल पर बनाया जाएगा एलुमनी होम
एमडीयू कुलपति प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया ने कहा कि पूर्व विद्यार्थी (एलुमनाई) विवि की आन-बान-शान हैं। एलुमनी को ब्रांड एंबेसडर करार देते हुए उन्होंने कहा कि मातृ संस्थान के विकास में एलुमनी अपना योगदान दें। विशेष तौर पर वर्तमान विद्यार्थियों की ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट के लिए विश्वविद्यालय की मदद करें। इससे विद्यार्थियों को लाभ होगा। उन्हें सही करियर चुनने व आगे बढ़ने की राह बनाने में दिक्कत नहीं होगी। भविष्य में पूर्व विद्यार्थियों के लिए एलुमनी होम किसी पर्यटक स्थल पर बनाने की योजना है। निदेशक एलुमनी रिलेशंज प्रो. राजीव कुमार ने विश्वविद्यालय के एलुमनी रिलेशन्ज विभाग की ओर से आयोजित गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने एलुमनी से विश्वविद्यालय की ओर से स्थापित एलुमनी फंड में योगदान देने की भी अपील की। मंच संचालन प्रो. संजू नंदा व डॉ. दिव्या मल्हान ने किया। आभार प्रदर्शन प्रो. सोनिया मलिक ने किया।
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विवि ने दी सामाजिक सरोकारों की शिक्षा
एलुमनी मीट में सीडीएलयू सिरसा के कुलपति प्रो. विजय कायत विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय मां है। इसने शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व नैतिक संस्कार दिए हैं। सामाजिक सरोकारों की शिक्षा भी यहीं से मिली। हमें इसका सम्मान करना चाहिए। डीन एकेडमिक एफेयर्स प्रो. अजय कुमार राजन ने कहा कि एलुमनी विश्वविद्यालय के झंडाबरदार हैं। इनकी वजह से एमडीयू की प्रसिद्धि है। निदेशक युवा कल्याण डॉ. जगबीर राठी के कार्यक्रम संयोजन करते हुए अपने नए हैप्पीनेस गीत, राजी, राजी रहया करो हंसते-हंसाते रहा करो की प्रस्तुति दी। एडवोकेट जोगेंद्र मोर ने हरियाणवी कविता प्रस्तुत की। विनय सैनी ने गीत-फूलों की रानी, बहारों की मलिका, छात्रा शीतल चहल ने मुझे तुम याद आए, कांटों से खींच के ये आंचल, ए दिल मुझे बता दे सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। एलुमनी सौरभ वर्मा ने हिंदी, हरियाणवी, पंजाबी गीतों की मेडले की प्रस्तुति दी।
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एलुमनाई हरविंदर मलिक की कलाकृतियों की डिजिटल डाक्यूमेंट्री के साथ विवि की प्रगति यात्रा की डाक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। यहां एलुमनी डायरेक्ट्री का विमोचन भी किया गया। हैफेड के मुख्य महाप्रबंधक आरपी साहनी, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश शर्मा, उच्चतर शिक्षा विभाग, हरियाणा के एनएसएस राज्य समन्वयन अधिकारी डॉ. कपेंद्र सिंह, प्रतिष्ठित मीडिया एवं संस्कृति कर्मी हरविंदर मलिक, पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के अध्यक्ष बिजेंद्र अहलावत, सेवानिवृत प्रोफेसर केपीएस महलवार, प्रो. अमर वर्मा, विजेंद्र गोयल, नरेंद्र सोनी, प्रो. कुलदीप छिकारा, सुरेंद्र दहिया, समेत विभिन्न विभागों क्षेत्रों के एलुमनी उपस्थित रहे।
याडै आकै अपना सा लागै..
निजी कंपनी के निदेशक आरएस डबाड ने एलुमनी व नई पीढ़ी को अपने संघर्ष की कहानी के जरिए आगे बढ़ने का मंत्र देते हुए कहा कि कामयाब होना है तो यह सोचना छोड़ दो कि लोग क्या कहेंगे। वह करो जो करना है। जो करना है वो मन लगाकर करो। विवि में एमबीए करने के बाद भी नौकरी नहीं मिली थी। इस कारण शादी भी अटक गई थी। अपनी पहली नौकरी 300 रुपये की मिली थी। गांव के कंडेक्टर ने बस में देख लिया तो अपनी डर गया था। सोचा कि यह गांव में जाकर बताएगा। बेइजती होगी। काम के दौरान ही एक व्यक्ति ने दूसरों के सोचने का डर निकालने का मंत्र दिया था। इसी मंत्र ने 1.86 करोड़ के पैकेज वाला अधिकारी बनाया है। विवि अपना है। यहां अपने जीवन का सबसे कीमती समय गुजारा है। इसलिए याडै आकै अपना सा लागै। प्रदेश का कोई युवा कैरियर संबंधी जानकारी चाहता है तो संपर्क कर सकता है। उसकी हर संभव मदद करूंगा।
अपने विभागों में भी गए एलुमनी
एलुमनी मीट के बाद पूर्व विद्यार्थी अपने विभाग पहुंचे। यहां पूरा विभाग घूम कर शिक्षकों व विद्यार्थियों से इंटैरेक्ट किया। इस दौरान अपना पुराना समय विद्यार्थी के रूप में याद किया। नए विद्यार्थियों को पूर्व विद्यार्थियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए जीवन में आगे बढ़ने के लिए संघर्षरत रहने की नसीहत दी।
टाइगर ग्रुप ने मिलाए बिछुड़े यार
टाइगर। कैसा है। लंबू तू कैसा है। भाई शायद भी आया है। फिर तो महफिल सजेगी। यह अंदाज रविवार को एमडीयू विधि विभाग के एलुमनी का नजर आया। बैच के पुराने दोस्तों को दो दशक बाद देख बके चेहरे खिल उठे। यतेंद्र उर्फ टाइगर ने कहा कि हमारे शायर राजेश शर्मा सोनीपत के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हो गए हैं। लंबू सुरेंद्र वर्मा ने कहा टाइगर तू भी वकालत कर रहा है। यार ये अच्छा हुआ टाइगर व्हॉट्सअप ग्रुप बना लिया। सब मिल तो गए। कैंपस पिछले 20 साल में काफी बदल गया है। अब जंगल नहीं, हरा भरा कैंपस नजर आ रहा है। याद है मूट कोर्ट का टूर चंडीगढ़ जाना था। सतीश शर्मा रह गया था। उसी ने सबको सुबह उठाया और नहाने के चक्कर में खुद ही रह गया। अपना हिमालय हॉस्टल, सतनाम की कैंटीन सब वैसे ही हैं। हमारा बैच सबसे बड़ा था। इसी में से सबसे ज्यादा जयूडिशियल ऑफिसर व दो आईएएस सिलेक्ट हुए। इसके अलावा दस से ज्यादा एडीजे भी इसी बैच से निकले। हॉस्टल में रहकर सब वर्क आउट करते थे। डॉ. केपीएस महलवान स्ट्रिक तो थे, मगर इंपोर्टेंट प्रश्न जरूर बताते थे।