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किसानों ने दिया बिजली घर पर धरना
Updated Sat, 01 Jul 2017 01:39 AM IST
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किसानों ने दिया बिजली घर पर धरना
बहल।
स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने और अन्य मांगों के लिए किसानों ने शुक्रवार को बिजली घर पर धरना दिया। किसानों ने सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार देते रोष भी जताया। किसानों ने कहा कि चुनाव से पूर्व भाजपा सरकार ने किसानों से जो वादे किए थे, वो आज तक पूरे नहीं किए गए है। किसानों ने सरकार से दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर हरियाणा में कर्ज से राहत देने की मांग रखी।
शुक्रवार को किसान बिजली घर पर एकत्रित हुए। किसानों ने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने कोई फैसला ऐसा नहीं लिया जिससे किसान एवं खेतीहर मजूदर का भला हो सके। जितनी भी नीतियां सरकार ने बनाई है वो इस तर्ज पर बनी है जिसमें पूंजीपति को फायदा हुआ है और किसान, मजदूर तथा कमेरे वर्ग को नुकसान। किसानों ने कहा कि सत्तासीन सरकार के लोग जब विपक्ष में थे तब स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करवाने के लिए आंदोलन में अग्रणी रहते थे, लेकिन सत्ता मिलने के बाद अपने की वादे को भूल गए है। किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने प्रदेश सरकार से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार फसल, सब्जी एवं दूध के भाव लागत से डेढ़ गुणा लागू कर खरीद सुनिश्चित करने, सभी तरह के कर्जे माफ किए जाने, कृषि लागत कम करने, पशुओं के व्यापार पर लगी पाबंदी को हटाने, आवारा पशुओं का प्रबंध करने, फसल बीमा योजना को वापस लेने तथा 60 वर्ष की आयु वाले किसान-मजदूर के लिए पेंशन का प्रावधान करने की मांग की। इस अवसर पर खंड प्रधान भगवान सिंह लाखलाण, प्रदेश संयुक्त सचिव डॉ. बलबीर सिंह ठाकन, बलवान बागड़ी, मीर सिंह सांगवान, दलबीर सिंह, मांगेराम, महीपाल, रामकरण, कृष्ण बिधनोई, हवासिंह जांगड़ा, सतबीर ओबरा, रतनसिंह पूर्व सरपंच सिरसी आदि मौजूद रहे।
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बहल।
स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने और अन्य मांगों के लिए किसानों ने शुक्रवार को बिजली घर पर धरना दिया। किसानों ने सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार देते रोष भी जताया। किसानों ने कहा कि चुनाव से पूर्व भाजपा सरकार ने किसानों से जो वादे किए थे, वो आज तक पूरे नहीं किए गए है। किसानों ने सरकार से दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर हरियाणा में कर्ज से राहत देने की मांग रखी।
शुक्रवार को किसान बिजली घर पर एकत्रित हुए। किसानों ने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने कोई फैसला ऐसा नहीं लिया जिससे किसान एवं खेतीहर मजूदर का भला हो सके। जितनी भी नीतियां सरकार ने बनाई है वो इस तर्ज पर बनी है जिसमें पूंजीपति को फायदा हुआ है और किसान, मजदूर तथा कमेरे वर्ग को नुकसान। किसानों ने कहा कि सत्तासीन सरकार के लोग जब विपक्ष में थे तब स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करवाने के लिए आंदोलन में अग्रणी रहते थे, लेकिन सत्ता मिलने के बाद अपने की वादे को भूल गए है। किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने प्रदेश सरकार से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार फसल, सब्जी एवं दूध के भाव लागत से डेढ़ गुणा लागू कर खरीद सुनिश्चित करने, सभी तरह के कर्जे माफ किए जाने, कृषि लागत कम करने, पशुओं के व्यापार पर लगी पाबंदी को हटाने, आवारा पशुओं का प्रबंध करने, फसल बीमा योजना को वापस लेने तथा 60 वर्ष की आयु वाले किसान-मजदूर के लिए पेंशन का प्रावधान करने की मांग की। इस अवसर पर खंड प्रधान भगवान सिंह लाखलाण, प्रदेश संयुक्त सचिव डॉ. बलबीर सिंह ठाकन, बलवान बागड़ी, मीर सिंह सांगवान, दलबीर सिंह, मांगेराम, महीपाल, रामकरण, कृष्ण बिधनोई, हवासिंह जांगड़ा, सतबीर ओबरा, रतनसिंह पूर्व सरपंच सिरसी आदि मौजूद रहे।
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