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लोन के साढ़े 3 लाख रुपये हड़पे, खरैंटी के किसान व पटवारी सहित छह पर केस
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भगवतीपुर के सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक से साढ़े 3 लाख रुपये लोन लेकर किसान ने फर्जी ढंग से न केवल ट्रैक्टर बल्कि सिक्योरिटी (आड़ रहन) के लिए रखी जमीन भी बेच दी। लाखनमाजरा थाना पुलिस ने बैंक प्रबंधक रश्मि राठी के बयान पर खरैंटी गांव के किसान, तत्कालीन पटवारी सहित छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
बैंक प्रबंधक की ओर से पुलिस से की गई शिकायत में बताया गया है कि खरैंटी गांव निवासी बिजेंद्र सिंह ने मई 2007 में ट्रैक्टर खरीदने के लिए 3 लाख 50 हजार रुपये का कर्ज लिया था। बैंक ने उसके खाते में राशि ट्रांसफर कर दी थी। आरोपी ने लोन लेते समय अपनी चांदी गांव स्थित 38 कैनाल 1 मरला जमीन के कागजात बतौर सिक्योरिटी (आड़ रहन) के तौर पर जमा करवाए थे। ट्रैक्टर के पंजीकरण प्रमाणपत्र पर भी बैंक लोन लिखा हुआ था। बाद में आरोपी बिजेंद्र ने लोन की राशि जमा नहीं करवाई।
बैंक मैनेजर का कहना है कि लोन वसूलने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। महम अदालत में आरोपी ने लोन चुकाने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में पैसे जमा नहीं कराये। इसके बाद अदालत ने 20 अक्तूबर 2015 को बैंक के हक में फैसला सुनाया। इसके बाद बैंक ने जब आरोपी की जमीन का रिकॉर्ड निकलवाया तो पता चला कि आरोपी संबंधित जमीन संतोष, सुुनीता, सरिता व कुलदीप के नाम कर चुका है।
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पटवारी ने नहीं चढ़ाया जमीन के रिकॉर्ड में बैंक लोन
शिकायतकर्ता बैंक मैनेजर का आरोप है कि पूरे मामले में तत्कालीन पटवारी की मिलीभगत सामने आई है। जमीन के रिकॉर्ड में बैंक के दस्तावेज के आधार पर लोन का ब्योरा नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, अब पता चला है कि आरोपी ने बैंक की फर्जी एनओसी तैयार करके ट्रैक्टर को दूसरे को बेच दिया है। पुलिस ने खरैंटी गांव निवासी बिजेंद्र व तत्कालीन पटवारी फूलकुमार सहित छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी प्रपत्र तैयार करने का मामला दर्ज किया है।
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बैंक प्रबंधक की ओर से पुलिस से की गई शिकायत में बताया गया है कि खरैंटी गांव निवासी बिजेंद्र सिंह ने मई 2007 में ट्रैक्टर खरीदने के लिए 3 लाख 50 हजार रुपये का कर्ज लिया था। बैंक ने उसके खाते में राशि ट्रांसफर कर दी थी। आरोपी ने लोन लेते समय अपनी चांदी गांव स्थित 38 कैनाल 1 मरला जमीन के कागजात बतौर सिक्योरिटी (आड़ रहन) के तौर पर जमा करवाए थे। ट्रैक्टर के पंजीकरण प्रमाणपत्र पर भी बैंक लोन लिखा हुआ था। बाद में आरोपी बिजेंद्र ने लोन की राशि जमा नहीं करवाई।
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बैंक मैनेजर का कहना है कि लोन वसूलने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। महम अदालत में आरोपी ने लोन चुकाने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में पैसे जमा नहीं कराये। इसके बाद अदालत ने 20 अक्तूबर 2015 को बैंक के हक में फैसला सुनाया। इसके बाद बैंक ने जब आरोपी की जमीन का रिकॉर्ड निकलवाया तो पता चला कि आरोपी संबंधित जमीन संतोष, सुुनीता, सरिता व कुलदीप के नाम कर चुका है।
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पटवारी ने नहीं चढ़ाया जमीन के रिकॉर्ड में बैंक लोन
शिकायतकर्ता बैंक मैनेजर का आरोप है कि पूरे मामले में तत्कालीन पटवारी की मिलीभगत सामने आई है। जमीन के रिकॉर्ड में बैंक के दस्तावेज के आधार पर लोन का ब्योरा नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, अब पता चला है कि आरोपी ने बैंक की फर्जी एनओसी तैयार करके ट्रैक्टर को दूसरे को बेच दिया है। पुलिस ने खरैंटी गांव निवासी बिजेंद्र व तत्कालीन पटवारी फूलकुमार सहित छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी प्रपत्र तैयार करने का मामला दर्ज किया है।