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Rohtak News: रोजाना पीजीआई आने वाले 25 प्रतिशत मरीजों को पड़ रही कृत्रिम आंसुओं की जरूरत
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14 डॉ. सुमित सचदेवा
- फोटो : नई सराय चौकी क्षेत्र में शहबाजपुर चौराहे पर सोमवार की देर रात बिजली ना आने को लेकर प्रदर्शन करते लोग. संवाद
रोहतक। भीषण गर्मी व लू के कारण 43 डिग्री सेल्सियस तापमान में आंखों की नमी तेजी से कम हो रही है। पीजीआई की नेत्र ओपीडी में करीब 25 प्रतिशत मरीज आंखों में सूखेपन की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनका इलाज कृत्रिम आंसुओं से किया जा रहा है।
पीजीआई के क्षेत्रीय नेत्र विभाग में कार्यरत डॉ. सुमित सचदेवा ने बताया कि ओपीडी में रोजाना लगभग 600 मरीज पहुंचते हैं। गर्मी में करीब 15 प्रतिशत तक मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। मरीज आंखों में लालिमा, खुजली, चुभन और पानी आने जैसी शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
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लैब में ऐसे तैयार हो रहे कृत्रिम आंसू:
डॉ. सुमित सचदेवा ने बताया कि जब आंखों की नमी बनाए रखने वाली ग्रंथियां आंसू बनाना कम या बंद कर देती हैं तो सूखापन बढ़ जाता है। इससे चुभन और रुकावट जैसी समस्या होती है। ऐसे में लैब में तैयार कृत्रिम आंसुओं का उपयोग किया जाता है, जिनमें कार्बोक्सी मिथाइल, सोडियम व अन्य तत्व शामिल होते हैं, जो आंखों में नमी बनाए रखने में मदद करते हैं।
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लापरवाही से रोशनी हो सकती कम
लापरवाही करने पर कॉर्निया में सूखापन बढ़ सकता है, जिससे आंखों की रोशनी पर असर पड़ने का खतरा रहता है। आंसू आंखों को संक्रमण से बचाने और बाहरी कणों को बाहर निकालने में भी मदद करते हैं, साथ ही एंटीमाइक्रोबियल व एंटीबैक्टीरियल सुरक्षा भी देते हैं।
ये सावधानियां बरतें
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. एसपीएस भाटिया ने बताया कि 20-20-20 नियम अपनाएं हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें और आंखें झपकाएं। तेज धूप में बाहर निकलते समय यूवी प्रोटेक्टेड चश्मा पहनें और दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह लें।
वर्जन
भीषण गर्मी में बाहर निकलने पर आंख में नमी बनाए रखने वाले आंसू जल्द वाष्पित हो जाते हैं। धूल मिट्टी में ज्यादा रहने व 40 वर्ष से अधिक उम्र वर्ग केे लोगों में आंसू बनाने वाली ग्रंथियां कमजोर हो जाती हैं। इनकी आंख में सूखेपन का खतरा अधिक रहता है। ज्यादा समय स्क्रीन पर बिना पलक झपकाए काम करने से भी सूखापन बढ़ता है.
- डॉ. सुमित सचदेवा, नेत्र विशेषज्ञ
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पीजीआई के क्षेत्रीय नेत्र विभाग में कार्यरत डॉ. सुमित सचदेवा ने बताया कि ओपीडी में रोजाना लगभग 600 मरीज पहुंचते हैं। गर्मी में करीब 15 प्रतिशत तक मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। मरीज आंखों में लालिमा, खुजली, चुभन और पानी आने जैसी शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
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लैब में ऐसे तैयार हो रहे कृत्रिम आंसू:
डॉ. सुमित सचदेवा ने बताया कि जब आंखों की नमी बनाए रखने वाली ग्रंथियां आंसू बनाना कम या बंद कर देती हैं तो सूखापन बढ़ जाता है। इससे चुभन और रुकावट जैसी समस्या होती है। ऐसे में लैब में तैयार कृत्रिम आंसुओं का उपयोग किया जाता है, जिनमें कार्बोक्सी मिथाइल, सोडियम व अन्य तत्व शामिल होते हैं, जो आंखों में नमी बनाए रखने में मदद करते हैं।
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लापरवाही से रोशनी हो सकती कम
लापरवाही करने पर कॉर्निया में सूखापन बढ़ सकता है, जिससे आंखों की रोशनी पर असर पड़ने का खतरा रहता है। आंसू आंखों को संक्रमण से बचाने और बाहरी कणों को बाहर निकालने में भी मदद करते हैं, साथ ही एंटीमाइक्रोबियल व एंटीबैक्टीरियल सुरक्षा भी देते हैं।
ये सावधानियां बरतें
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. एसपीएस भाटिया ने बताया कि 20-20-20 नियम अपनाएं हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें और आंखें झपकाएं। तेज धूप में बाहर निकलते समय यूवी प्रोटेक्टेड चश्मा पहनें और दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह लें।
वर्जन
भीषण गर्मी में बाहर निकलने पर आंख में नमी बनाए रखने वाले आंसू जल्द वाष्पित हो जाते हैं। धूल मिट्टी में ज्यादा रहने व 40 वर्ष से अधिक उम्र वर्ग केे लोगों में आंसू बनाने वाली ग्रंथियां कमजोर हो जाती हैं। इनकी आंख में सूखेपन का खतरा अधिक रहता है। ज्यादा समय स्क्रीन पर बिना पलक झपकाए काम करने से भी सूखापन बढ़ता है.
- डॉ. सुमित सचदेवा, नेत्र विशेषज्ञ