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75 वर्ष के चांद सिंह ने रचा इतिहास , जीते 3 गोल्ड जीते
Updated Wed, 20 Dec 2017 02:53 AM IST
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75 वर्ष के चांद सिंह ने रचा इतिहास, जीते 3 गोल्ड जीते मेडल
- डॉक्टरों के मना करने के बाद भी मैदान में उतरा बुजुर्ग खिलाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में आयोजित 27वीं हरियाणा मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 75 वर्षीय वेटरन खिलाड़ी चांद सिंह अहलावत ने शॅाटपुर, जैवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीता।
तीन गोल्ड विजेता मास्टर चांद सिंह अहलावत को एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विक्ट्री स्टैंड पर मेडल पहना कर प्रमाण पत्र व फूलों से सम्मानित किया। उन्हें 10 से 13 फरवरी के बीच दिल्ली में होने वाली प्रतियोगिता के लिए हरियाणा टीम में चयनित किया गया है। साथ ही वर्ष का सर्व श्रेष्ठ बुजुर्ग खिलाड़ी के घोषित किया गया है। मूल रूप से डीघल गांव का रहने वाले हैं। बचपन से ही खेलों का शौक है। अब तक जिला, राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 500 के लगभग मेडल जीता है।
गौरतलब है कि सात माह पहले ही चांद सिंह अहलावत की दोनों आंखों का ऑपरेशन हुआ। अगस्त माह में बाइक दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी का फ्रेक्चर हुआ। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने उन्हें एक साल तक खेलों से दूर रहने की सलाह दी थी। लेकिन उनके खेलों के जुनून ने पांच माह बाद फिर मैदान में उतार दिया। तीन गोल्ड जीत कर बुजुर्ग खिलाड़ी ने इतिहास रचा है। चांद सिंह अहलावत का कहना है कि प्रतिभा की कोई उम्र नहीं होती, जरूरत होती है जनून, मेहनत व हौसले की।
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- डॉक्टरों के मना करने के बाद भी मैदान में उतरा बुजुर्ग खिलाड़ी
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में आयोजित 27वीं हरियाणा मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 75 वर्षीय वेटरन खिलाड़ी चांद सिंह अहलावत ने शॅाटपुर, जैवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीता।
तीन गोल्ड विजेता मास्टर चांद सिंह अहलावत को एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विक्ट्री स्टैंड पर मेडल पहना कर प्रमाण पत्र व फूलों से सम्मानित किया। उन्हें 10 से 13 फरवरी के बीच दिल्ली में होने वाली प्रतियोगिता के लिए हरियाणा टीम में चयनित किया गया है। साथ ही वर्ष का सर्व श्रेष्ठ बुजुर्ग खिलाड़ी के घोषित किया गया है। मूल रूप से डीघल गांव का रहने वाले हैं। बचपन से ही खेलों का शौक है। अब तक जिला, राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 500 के लगभग मेडल जीता है।
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गौरतलब है कि सात माह पहले ही चांद सिंह अहलावत की दोनों आंखों का ऑपरेशन हुआ। अगस्त माह में बाइक दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी का फ्रेक्चर हुआ। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने उन्हें एक साल तक खेलों से दूर रहने की सलाह दी थी। लेकिन उनके खेलों के जुनून ने पांच माह बाद फिर मैदान में उतार दिया। तीन गोल्ड जीत कर बुजुर्ग खिलाड़ी ने इतिहास रचा है। चांद सिंह अहलावत का कहना है कि प्रतिभा की कोई उम्र नहीं होती, जरूरत होती है जनून, मेहनत व हौसले की।
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