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सांठ-गांठ का नतीजा तो नहीं बी फार्मेसी के परिणाम में देरी

Sun, 30 Jul 2017 02:02 AM IST
Updated Sun, 30 Jul 2017 02:02 AM IST
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सांठ-गांठ का नतीजा तो नहीं बी फार्मेसी के परिणाम में देरी
सांठ-गांठ का नतीजा तो नहीं बी फार्मेसी के परिणाम में देरी
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- लगातार परिणाम में देरी होने पर हेल्थ विवि प्रशासन पर उठे सवाल
- दो साल से सामने आ रहे कॉपियां चोरी होने के केस, रिजल्ट भी तभी से लेट

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। इसे महज संयोग कहें या सोची-समझी साजिश कि पिछले दो साल से बी फार्मेसी के परिणाम जारी करने के देरी हो रही है। वहीं, पिछले दो साल से ही कापियां बदलने के मामले सामने आ रहे हैं। पिछले साल पीजीआई में बी फार्मेसी की उत्तर पुस्तिका चोरी होने पर हड़कंप मचा था। इस बार तो बड़े पैमाने पर उत्तर पुस्तिकाओं को बदलने का खेल होने वाला था। हालांकि पुलिस ने दावा किया है कि कॉपी बदलने से पहले ही आरोपियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।

दरअसल, हेल्थ यूनिवर्सिटी की तरफ से प्रत्येक वर्ष जून माह में बी फार्मेसी की परीक्षा होती है। 17 जून तक परीक्षा हो जाती है और जुलाई के अंतिम सप्ताह तक परीक्षा परिणाम भी आ जाता था। मगर पिछले दो साल पर नजर डाले तो बी फार्मेसी का परिणाम जुलाई माह खत्म होने के बाद भी नहीं आया। कभी एक तो कभी दो माह इंतजार करना पड़ा। वर्ष 2017 की परीक्षाओं का परिणाम अभी तक नहीं आया है। पिछली बार भी बी फार्मेसी की कापियां चोरी होने पर परिणाम आने में देरी हुई थी।
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कहीं फर्जीवाड़े से तो नहीं जुड़े परिणाम देरी के तार
लगातार परिणाम में देरी होने के कारण पीजीआई प्रशासन पर सवाल उठना लाजिमी है। अब आशंका जताई जा रही है पूरे फर्जीवाड़े से ही परिणाम देरी होने के तार जुड़े हुए हैं। उत्तर पुस्तिका के साथ हो रहे खेल के कारण ईमानदारी से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। एक आरोपी जसवंत पहले ही खुलासा कर चुका है कि वह पीजीआई के अधिकारियों और कर्मचारियों से सांठगांठ करके उत्तर पुस्तिका चोरी करता था।
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इसके बाद उन्हें असली कापियों में जमा कर देता था। हेल्थ विवि में प्रदेशभर फार्मेसी की कॉपियां जांच के लिए आती हैं। प्रदेश में चाहे सरकारी संस्थान हो या फिर निजी, सभी का हेल्थ विवि से अनुबंध है। अब पीजीआई प्रशासन की तरफ से गोपनीय शाखा में रखी उत्तर पुस्तिकाओं की पड़ताल की जाएगी, ताकि पता चल सके कि उत्तरपुस्तिका पीजीआई से चोरी हुई है या नहीं।

विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा रहा खामियाजा
परीक्षा परिणाम में देरी का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। इस कारण अधिकतर विद्यार्थियों को एम फार्मा में दाखिला नहीं मिलता। जब तक रिजल्ट आता है तब तक कुछ संस्थानों की सीटें भर जाती हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन विद्यार्थियों को झेलनी पड़ती है जो अन्य प्रदेश के संस्थानों में दाखिला लेना चाहते हैं।

नकल के भरोसे ने फंसाया ठगों के चंगुल में
पूरे मामले का भंडाफोड़ होने के बाद स्पष्ट है कि कुछ विद्यार्थी पढ़ाई की जगह नकल के भरोसे हैं। इसी कारण ऐसे विद्यार्थी आरोपी जसवंत और नीरज जैसे ठगों के चंगुल में फंस जाते हैं। अब उन विद्यार्थियों की मुश्किल भी बढ़ सकती है जिन्होंने आरोपियों को पास होने के लिए रुपये दिये थे। रिमांड अवधि में आरोपियों से रुपये देने वाले विद्यार्थियों के बारे में भी पूछताछ की जाएगी।

पिछले साल भी चोरी हुईं थी फार्मेसी की उत्तर पुस्तिका
पीजीआई की बी फार्मेसी की उत्तर पुस्तिका पिछले साल भी चोरी हो गईं थीं। करीब 70 उत्तर पुस्तिका को चोरी किया गया गया था। इसके बाद अभ्यर्थियों ने हंगामा किया था। उत्तर पुस्तिका चोरी होने के कारण परीक्षा का परिणाम भी देरी से आया था। इससे अभ्यर्थियों को दाखिला लेने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। तभी भी पीजीआई प्रशासन ने कमेटी का गठन कर पूरे मामले का पता लगाने का दावा किया था। मगर आज तक मामले में कुछ भी पता नहीं चल सका है।

कई अभ्यर्थियों को झांसे में ले रखा है
दोनों आरोपियों के पास खाली और हल की गई उत्तरपुस्तिका मिली हैैं। आरोपी इन उत्तरपुस्तिका को पीजीआई की बी फार्मेसी की उत्तरपुस्तिका में शामिल करना चाहते थे। आरोपियों ने कई अभ्यर्थियों से बी फार्मेसी के कंपार्टमेंट पेपर में पास कराने के नाम पर रुपये ले रखे हैं। करीब ढाई लाख रुपये एडवांस भी ले चुके हैं।

- इंस्पेक्टर मनोज वर्मा, प्रभारी एंटी व्हीकल थेफ्ट एंड डिटेक्शन टीम।

पुलिस केस होने के कारण हुई परिणाम में देरी
पिछले साल बी फार्मेसी की उत्तर पुस्तिका चोरी होने के कारण पुलिस ने केस दर्ज किया था। पुलिस की जांच के कारण परिणाम जारी करने में देरी हो गई थी। इस बार कोई अड़चन नहीं है, जल्द परिणाम जारी कर दिया जाएगा।
डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक।











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