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जिले का मिला नायाब तोहफा, अब सुविधाओं में विस्तार की दरकार
Updated Thu, 26 Oct 2017 01:19 AM IST
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चरखी दादरी को मिला जिले का नायाब तोहफा, अब क्षेत्र को सुविधाओं में विस्तार की दरकार
चरखी दादरी।
प्रदेश की मनोहर सरकार को आज तीन साल पूरे हो गए। इन तीन सालों में सरकार ने दादरी की दशकों पुरानी जिला बनाने की मांग परवान चढ़ाकर नायाब तोहफा दिया। इसके बाद से ही जिला के मुताबिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी लगातार जिलावासियों को खल रही है। जिला बनाने के बाद कई बड़े प्रोजेक्टों के लिए सरकार की तरफ से अभी बजट चरखी दादरी के लिए नहीं दिया गया है। सीएम मनोहर लाल की ओर से करीब 13 माह पूर्व की गई घोषणाओं में से कुछ प्रोजेक्टों को तो सरकार की तरफ से मंजूरी मिल चुकी है लेकिन बजट जारी न होने के चलते धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया है। वहीं, करोड़ों की कुछेक घोषणाएं ड्राप आउट हो चुकी हैं।
दादरी में सभी विभागों को एक छत के नीचे बैठाने के लिए नया लघु सचिवालय निर्माण के लिए साइट तलाशने के निर्देश तो सरकार ने दिए लेकिन करीब सात माह से यह फाइल चंडीगढ़ अटकी पड़ी है। वहीं, सौ बेड के अस्पताल के लिए निर्मित बिल्डिंग की जिला अस्पताल में शिफ्टिंग अभी तक नहीं हो पाई। जिले की अगर जरूरतों की बात करें तो स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल व मूलभूत सुविधाओं में विस्तार की बेहद कमी खल रही है। जिले का दर्जा देने के लिए नोटिफिकेशन जारी हुए करीब दस माह का समय बीत चुका है लेकिन अब तक करीब 55 विभागों में से पांच नए विभाग ही स्थापित हो पाए हैं। जिला बनने के बाद पुलिस प्रशासन के दायरे में विस्तार हुआ है और जिले में पुलिस कर्मचारियों की संख्या करीब 530 है। डीसी कार्यालय में करीब 80 कर्मचारियों की पोस्ट सेंशन हैं लेकिन चरखी डीसी कार्यालय महज पांच से सात कर्मचारियों के सहारे ही चल रहा है। इसका सीधे तौर पर असर जिला के विकास पर पड़ रहा है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो दादरी जिला में विकास का खाका खींचने के लिए बजट की कमी सबसे अधिक खल रही है। दादरी जिला मुख्यालय के साथ-साथ बाढड़ा उपमंडल में भी नए कार्यालय स्थापित कर यहां अधिकारियों की नियुक्ति करने की भी जरूरत है। उपमंडल स्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने की यहां भी दरकार है। अगर पूरे जिले की बात करें तो महिला कालेज की कमी सबसे अधिक इस समय खल रही है। भाजपा सरकार के तीन साल के कार्यकाल में दादरी क्षेत्र से जुड़ी सरकार की घोषणाओं पर एक खास रिपोर्ट.............. सरकार के पाले में अब ये प्रोजेक्ट
यूपीडी ड्रेन प्रोजेक्ट-जिले में हर साल जलभराव सेे करीब पांच हजार एकड़ जमीन बिजाई के लायक नहीं रहती। यहां लंबे समय से ड्रेन की मांग की जाती रही है गत मई माह में यहां यूपीडी ड्रेेन निर्माण का प्रोजेक्ट प्लानिंग में था लेकिन सीएम ऑफिस से इस फाइल पर यह तर्क देते हुए रोक लगा दी गई थी कि जब तक पायलेट प्रोजेक्ट ढाकला-सुबाना जिला झज्जर का यूपीडी ड्रेन प्रोजेक्ट सफल नहीं हो जाता तब तक चरखी दादरी में यूपीडी ड्रेन नहीं बनेगी।
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लघु सचिवालय की बिल्डिंग- जिला मुख्यालय के मुताबिक लघु सचिवालय की वर्तमान बिल्डिंग में जगह व सुविधाएं मुहैया नहीं है। सरकार के आदेशों पर जिला प्रशासन ने शहर से बाहर इस बिल्डिंग को ले जाने का खाका तैयार कर सरकार को भेज दिया है। प्रशासन ने तीन-अलग-अलग रूटों पर स्थित जगह चयनित की है। सरकार के आदेशों अनुसार 45 से 50 एकड़ जमीन का प्रपोजल तैयार कर प्रशासन ने भेज रखा है लेकिन आठ माह बाद भी प्रशासन को आगामी आदेशों का इंतजार है।
पुलिस लाइन, क्वार्टर व जेल निर्माण- जिला पुलिस प्रशासन ने जेल बनाने सहित अधिकारियों व पुलिस कर्मचारियों के करीब 250 क्वार्टर बनाने के लिए हैड ऑफिस प्रपोजल भेज चुका है। इस प्रपोजल को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है और इसका निर्माण पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन द्वारा करवाया जाना है। इसके लिए बजट निर्धारण नहीं हुआ है। बजट पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही धरातल पर प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।
नगर परिषद कार्यालय का नया भवन : नगर परिषद बिल्डिंग शिफ्टिंग की प्लानिंग जिला प्रशासन की सहमति से नप अधिकारियों ने पूरी कर ली। सीएम के जिला प्रवास कार्यक्रम के दौरान परसराम हेतराम स्कूल के समीप आधुनिक नया नप कार्यालय बनाने के लिए प्रपोजल उन्हें सौंपा गया। नप कार्यालय की नई बिल्डिंग निर्माण पर करीब 700 लाख रुपये लागत आने की संभावना है। इसमें कॉमन फैसिलिटी सेंटर की सुविधा भी जनता को मुहैया कराने का प्रावधान है। इस प्रोजेक्ट पर भी अभी तक सहमति सरकार ने नहीं दी है। अस्पताल के नए भवन की शिफ्टिंग- गत कांग्रेस सरकार ने चरखी दादरी में करीब 10 करोड़ से सिविल अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। भाजपा सरकार ने आते ही इसका बजट घटाकर करीब सात करोड़ रुपये कर दिया था। हालांकि बाद में बजट फिर से बढ़ाया गया। बीते काफी समय से अस्पताल की बिल्डिंग बनकर तैयार है लेकिन शिफ्टिंग पर पेच फंसा हुआ है। विपक्षी दल इसे कई दफा मुद्दा बनाकर प्रदर्शन कर चुके हैं लेकिन इसके बावजूद अब तक नए भवन में सरकार जिला अस्पताल को शिफ्ट नहीं करवा पाई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी- जिला मुख्यालय के मुताबिक अभी भी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं हो पाया है। सभी सरकारी कार्यालय शुरू करने के लिए अभी जगह व अधिकारियों दोनों की कमी खल रही है। जिला प्रशासन ने जगह व अधिकारियों की कमी दूर करने के लिए सरकार को प्रपोजल भेज रखा है। इसकी जानकारी डीसी विजय कुमार सिद्प्पा ने प्रवास कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को दी थी। इससे पहले वीडियो कांफ्रेंसिंग में भी डीसी यह मांग मुख्य सचिव के सामने उठा चुके हैं।
कुछ घोषणाओं पर चल रहा काम तो कुछ को बजट कर जरूरत
गांधी नगर एफओबी:- शहर के गांधी नगर में फुटओवर ब्रिज की मांग लंबे समय से की जाती रही है लेकिन यह प्रस्तावित प्रोजेक्ट भी अब खटाई में पड़ा है। एक साल बाद तक यहां एफओबी निर्माण की प्रक्रिया धरातल पर शुरू नहीं हो पाई। इसके चलते गांधी नगर के करीब आठ हजार लोग शहर से कटे हुए हैं।
बलाली कुश्ती हॉल:-बलाली कुश्ती हाल की घोषणा भी सीएम ने कर रखी है लेकिन इस प्रोजेक्ट पर अभी निर्माण शुरू नहीं हो सका है। इसके टेंडर के लिए कागज प्रक्रिया जारी है। यह कुश्ती हॉल उत्तरी भारत का एकमात्र आधुनिक तरीके का बनना है। इसके लिए गांव में 10 एकड़ जमीन का प्रस्ताव पारित हो चुका है।
खेल स्टेडियमों का निर्माण:-जिले में 10 व्यायामशालाएं एवं खेल स्टेडियमों के निर्माण की घोषणा भी सीएम की ओर से की गई थी लेकिन अधिकतर स्टेडियमों के निर्माण का काम पूरा सका है। शहर में भी राजकीय खेल स्टेडियम नहीं है जबकि इसके लिए गांव समसपुर के समीप 25 एकड़ जमीन का प्रस्ताव पंचायत खेल विभाग को सौंप चुकी है। यह स्टेडियम मंजूरी के इंतजार में है।
शिक्षा विभाग- जिले के गांव सारंगपुर, डूडीवाला, बिरही के अलावा पांच स्कूलों को अपगे्रड करने की भी घोषणा की गई थी लेकिन इस शैक्षिक सत्र में गांव सरूपगढ़ का स्कूल ही प्रमोट होकर सीनियर सेकंडरी तक बना रहा है।
सामुदायिक केंद्र निर्माण- जिले के कई गांवों में सामुदायिक केंद्रों के निर्माण की भी घोषणा की गई थी लेकिन अधिकतर का निर्माण नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों की माने तो सामुदायिक केंद्र का निर्माण कराने के लिए पंचायत को जमीन मुहैया करानी थी।
सीवरेज- पेयजल प्रोजेक्ट:-शहर के सीवरेज व पेयजल प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में हैं। सीवरेज व पेयजल के लिए भेज रखे प्रोजेक्टों को मंजूरी की इंतजार है। शहर के काफी एरिया में सीवरेज व पेयजल की नई लाइनों की जरूरत बनी हुई है।
वर्जन::
सीएम घोषणाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश मैंने तमाम विभागाध्यक्षों को दे रखे हैं। जिला मुख्यालय पर जल्द से जल्द सभी विभागो के कार्यालय स्थापित करवा दिए जाएंगें। आगे भी जो जिले की जरूरतें होंगी उनहें जिला प्रशासन सरकार तक पहुंचा देगा। विजय कुमार सिद्प्पा, डीसी, चरखी दादरी
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चरखी दादरी।
प्रदेश की मनोहर सरकार को आज तीन साल पूरे हो गए। इन तीन सालों में सरकार ने दादरी की दशकों पुरानी जिला बनाने की मांग परवान चढ़ाकर नायाब तोहफा दिया। इसके बाद से ही जिला के मुताबिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी लगातार जिलावासियों को खल रही है। जिला बनाने के बाद कई बड़े प्रोजेक्टों के लिए सरकार की तरफ से अभी बजट चरखी दादरी के लिए नहीं दिया गया है। सीएम मनोहर लाल की ओर से करीब 13 माह पूर्व की गई घोषणाओं में से कुछ प्रोजेक्टों को तो सरकार की तरफ से मंजूरी मिल चुकी है लेकिन बजट जारी न होने के चलते धरातल पर काम शुरू नहीं हो पाया है। वहीं, करोड़ों की कुछेक घोषणाएं ड्राप आउट हो चुकी हैं।
दादरी में सभी विभागों को एक छत के नीचे बैठाने के लिए नया लघु सचिवालय निर्माण के लिए साइट तलाशने के निर्देश तो सरकार ने दिए लेकिन करीब सात माह से यह फाइल चंडीगढ़ अटकी पड़ी है। वहीं, सौ बेड के अस्पताल के लिए निर्मित बिल्डिंग की जिला अस्पताल में शिफ्टिंग अभी तक नहीं हो पाई। जिले की अगर जरूरतों की बात करें तो स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल व मूलभूत सुविधाओं में विस्तार की बेहद कमी खल रही है। जिले का दर्जा देने के लिए नोटिफिकेशन जारी हुए करीब दस माह का समय बीत चुका है लेकिन अब तक करीब 55 विभागों में से पांच नए विभाग ही स्थापित हो पाए हैं। जिला बनने के बाद पुलिस प्रशासन के दायरे में विस्तार हुआ है और जिले में पुलिस कर्मचारियों की संख्या करीब 530 है। डीसी कार्यालय में करीब 80 कर्मचारियों की पोस्ट सेंशन हैं लेकिन चरखी डीसी कार्यालय महज पांच से सात कर्मचारियों के सहारे ही चल रहा है। इसका सीधे तौर पर असर जिला के विकास पर पड़ रहा है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो दादरी जिला में विकास का खाका खींचने के लिए बजट की कमी सबसे अधिक खल रही है। दादरी जिला मुख्यालय के साथ-साथ बाढड़ा उपमंडल में भी नए कार्यालय स्थापित कर यहां अधिकारियों की नियुक्ति करने की भी जरूरत है। उपमंडल स्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने की यहां भी दरकार है। अगर पूरे जिले की बात करें तो महिला कालेज की कमी सबसे अधिक इस समय खल रही है। भाजपा सरकार के तीन साल के कार्यकाल में दादरी क्षेत्र से जुड़ी सरकार की घोषणाओं पर एक खास रिपोर्ट.............. सरकार के पाले में अब ये प्रोजेक्ट
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यूपीडी ड्रेन प्रोजेक्ट-जिले में हर साल जलभराव सेे करीब पांच हजार एकड़ जमीन बिजाई के लायक नहीं रहती। यहां लंबे समय से ड्रेन की मांग की जाती रही है गत मई माह में यहां यूपीडी ड्रेेन निर्माण का प्रोजेक्ट प्लानिंग में था लेकिन सीएम ऑफिस से इस फाइल पर यह तर्क देते हुए रोक लगा दी गई थी कि जब तक पायलेट प्रोजेक्ट ढाकला-सुबाना जिला झज्जर का यूपीडी ड्रेन प्रोजेक्ट सफल नहीं हो जाता तब तक चरखी दादरी में यूपीडी ड्रेन नहीं बनेगी।
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लघु सचिवालय की बिल्डिंग- जिला मुख्यालय के मुताबिक लघु सचिवालय की वर्तमान बिल्डिंग में जगह व सुविधाएं मुहैया नहीं है। सरकार के आदेशों पर जिला प्रशासन ने शहर से बाहर इस बिल्डिंग को ले जाने का खाका तैयार कर सरकार को भेज दिया है। प्रशासन ने तीन-अलग-अलग रूटों पर स्थित जगह चयनित की है। सरकार के आदेशों अनुसार 45 से 50 एकड़ जमीन का प्रपोजल तैयार कर प्रशासन ने भेज रखा है लेकिन आठ माह बाद भी प्रशासन को आगामी आदेशों का इंतजार है।
पुलिस लाइन, क्वार्टर व जेल निर्माण- जिला पुलिस प्रशासन ने जेल बनाने सहित अधिकारियों व पुलिस कर्मचारियों के करीब 250 क्वार्टर बनाने के लिए हैड ऑफिस प्रपोजल भेज चुका है। इस प्रपोजल को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है और इसका निर्माण पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन द्वारा करवाया जाना है। इसके लिए बजट निर्धारण नहीं हुआ है। बजट पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही धरातल पर प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।
नगर परिषद कार्यालय का नया भवन : नगर परिषद बिल्डिंग शिफ्टिंग की प्लानिंग जिला प्रशासन की सहमति से नप अधिकारियों ने पूरी कर ली। सीएम के जिला प्रवास कार्यक्रम के दौरान परसराम हेतराम स्कूल के समीप आधुनिक नया नप कार्यालय बनाने के लिए प्रपोजल उन्हें सौंपा गया। नप कार्यालय की नई बिल्डिंग निर्माण पर करीब 700 लाख रुपये लागत आने की संभावना है। इसमें कॉमन फैसिलिटी सेंटर की सुविधा भी जनता को मुहैया कराने का प्रावधान है। इस प्रोजेक्ट पर भी अभी तक सहमति सरकार ने नहीं दी है। अस्पताल के नए भवन की शिफ्टिंग- गत कांग्रेस सरकार ने चरखी दादरी में करीब 10 करोड़ से सिविल अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। भाजपा सरकार ने आते ही इसका बजट घटाकर करीब सात करोड़ रुपये कर दिया था। हालांकि बाद में बजट फिर से बढ़ाया गया। बीते काफी समय से अस्पताल की बिल्डिंग बनकर तैयार है लेकिन शिफ्टिंग पर पेच फंसा हुआ है। विपक्षी दल इसे कई दफा मुद्दा बनाकर प्रदर्शन कर चुके हैं लेकिन इसके बावजूद अब तक नए भवन में सरकार जिला अस्पताल को शिफ्ट नहीं करवा पाई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी- जिला मुख्यालय के मुताबिक अभी भी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं हो पाया है। सभी सरकारी कार्यालय शुरू करने के लिए अभी जगह व अधिकारियों दोनों की कमी खल रही है। जिला प्रशासन ने जगह व अधिकारियों की कमी दूर करने के लिए सरकार को प्रपोजल भेज रखा है। इसकी जानकारी डीसी विजय कुमार सिद्प्पा ने प्रवास कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को दी थी। इससे पहले वीडियो कांफ्रेंसिंग में भी डीसी यह मांग मुख्य सचिव के सामने उठा चुके हैं।
कुछ घोषणाओं पर चल रहा काम तो कुछ को बजट कर जरूरत
गांधी नगर एफओबी:- शहर के गांधी नगर में फुटओवर ब्रिज की मांग लंबे समय से की जाती रही है लेकिन यह प्रस्तावित प्रोजेक्ट भी अब खटाई में पड़ा है। एक साल बाद तक यहां एफओबी निर्माण की प्रक्रिया धरातल पर शुरू नहीं हो पाई। इसके चलते गांधी नगर के करीब आठ हजार लोग शहर से कटे हुए हैं।
बलाली कुश्ती हॉल:-बलाली कुश्ती हाल की घोषणा भी सीएम ने कर रखी है लेकिन इस प्रोजेक्ट पर अभी निर्माण शुरू नहीं हो सका है। इसके टेंडर के लिए कागज प्रक्रिया जारी है। यह कुश्ती हॉल उत्तरी भारत का एकमात्र आधुनिक तरीके का बनना है। इसके लिए गांव में 10 एकड़ जमीन का प्रस्ताव पारित हो चुका है।
खेल स्टेडियमों का निर्माण:-जिले में 10 व्यायामशालाएं एवं खेल स्टेडियमों के निर्माण की घोषणा भी सीएम की ओर से की गई थी लेकिन अधिकतर स्टेडियमों के निर्माण का काम पूरा सका है। शहर में भी राजकीय खेल स्टेडियम नहीं है जबकि इसके लिए गांव समसपुर के समीप 25 एकड़ जमीन का प्रस्ताव पंचायत खेल विभाग को सौंप चुकी है। यह स्टेडियम मंजूरी के इंतजार में है।
शिक्षा विभाग- जिले के गांव सारंगपुर, डूडीवाला, बिरही के अलावा पांच स्कूलों को अपगे्रड करने की भी घोषणा की गई थी लेकिन इस शैक्षिक सत्र में गांव सरूपगढ़ का स्कूल ही प्रमोट होकर सीनियर सेकंडरी तक बना रहा है।
सामुदायिक केंद्र निर्माण- जिले के कई गांवों में सामुदायिक केंद्रों के निर्माण की भी घोषणा की गई थी लेकिन अधिकतर का निर्माण नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों की माने तो सामुदायिक केंद्र का निर्माण कराने के लिए पंचायत को जमीन मुहैया करानी थी।
सीवरेज- पेयजल प्रोजेक्ट:-शहर के सीवरेज व पेयजल प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में हैं। सीवरेज व पेयजल के लिए भेज रखे प्रोजेक्टों को मंजूरी की इंतजार है। शहर के काफी एरिया में सीवरेज व पेयजल की नई लाइनों की जरूरत बनी हुई है।
वर्जन::
सीएम घोषणाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश मैंने तमाम विभागाध्यक्षों को दे रखे हैं। जिला मुख्यालय पर जल्द से जल्द सभी विभागो के कार्यालय स्थापित करवा दिए जाएंगें। आगे भी जो जिले की जरूरतें होंगी उनहें जिला प्रशासन सरकार तक पहुंचा देगा। विजय कुमार सिद्प्पा, डीसी, चरखी दादरी