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Rohtak News: कैंसर के 20 मरीज रोज आ रहे सामने
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विकास सैनी
रोहतक।
बदलते दौर में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ बीमारियां भी बढ़ी हैं। इसमें कैंसर मुख्य है। यह भी अनेक तरह का। पीजीआईएमएस के आंकड़ों पर नजर डालें तो रोजाना औसतन 20 नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। ये मरीज भी तीन चार चौथी स्टेज में होते हैं। इसकी वजह कैंसर व स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव है। मरीज यदि समय रहते अपनी जांच कराए और शुरुआती समय में ही बीमारी को पहचान लिया जाए तो 90 प्रतिशत कैंसर का इलाज संभव है। इसके लिए चिकित्सक सही जांच पर जोर देते हैं।
पीजीआईएमएस के सर्जिकल ओंकोलॉजी विभाग में हर तरह की कैंसर के मरीजों का इलाज होता है। इसमें मुंह के कैंसर संबंधी मरीज अधिक होते हैं। इनमें फेफडे व खाने की नली वाले मरीज भी शामिल है। इनकी संख्या यहां की ओपीडी की 50 प्रतिशत है। जबकि महिलाओं में होने वाले सर्विक्स कैंसर के करीब 35 प्रतिशत व ब्रेस्ट कैंसर के करीब 30 प्रतिशत मामले होते हैं। संस्थान की ओपीडी में औसतन 150 मरीज आते हैं। इनमें से 50 मरीज नए होते हैं। इस हिसाब से औसतन 20 मरीज रोज सामने आ रहे हैं। यह चिंता का विषय है। इस स्थिति को देखते हुए जागरूकता जरूरी है।
संस्थान में हैं जांच के सभी उपकरण
पीजीआई में कैंसर की पहचान के सभी उपकरण मौजूद हैं। सर्विक्स कैंसर के लिए पैप्स मीयर व ब्रेस्ट कैंसर के लिए मेमोग्राफी व एमआरआई की सुविधा उपलब्ध है। चिकित्सकों के मुताबिक, सर्विक्स कैंस के लिए एचपीवी वायरस कारण होता है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। यह वैक्सीन बच्चियों को निर्धारित उम्र तक देकर उन्हें इस वायरस व खतरनाक कैंसर से सुरक्षित रख सकते हैं। इसके लिए अभिभावकों का जागरूक होना जरूरी है। यही नहीं ब्रेस्ट कैंसर में समय पर जांच से मरीज में बीमारी की पहचान होने पर बगैर ब्रेस्ट निकाले इलाज संभव है।
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संस्थान में हर तरह की कैंसर के मरीज आ रहे हैं। इन्हें इलाज दिया जा रहा है। समय रहते बीमारी की पहचान होने पर 90 प्रतिशत केसों में इलाज संभव है। जागरूकता की कमी के चलते ज्यादातर मामले अंतिम समय में आते हैं। इस स्थिति में चिकित्सक के लिए इलाज या मरीज को बचाना मुश्किल होता है। संस्थान की ओपीडी में करीब 50 नए मरीज सामने आ रहे हैं। इस स्थिति में जागरूकता बेहद जरूरी है।
डाॅ. संजीव प्रसाद, हेड, सर्जिकल ओंकोलॉजी, पीजीआईएमएस।
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रोहतक।
बदलते दौर में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ बीमारियां भी बढ़ी हैं। इसमें कैंसर मुख्य है। यह भी अनेक तरह का। पीजीआईएमएस के आंकड़ों पर नजर डालें तो रोजाना औसतन 20 नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। ये मरीज भी तीन चार चौथी स्टेज में होते हैं। इसकी वजह कैंसर व स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव है। मरीज यदि समय रहते अपनी जांच कराए और शुरुआती समय में ही बीमारी को पहचान लिया जाए तो 90 प्रतिशत कैंसर का इलाज संभव है। इसके लिए चिकित्सक सही जांच पर जोर देते हैं।
पीजीआईएमएस के सर्जिकल ओंकोलॉजी विभाग में हर तरह की कैंसर के मरीजों का इलाज होता है। इसमें मुंह के कैंसर संबंधी मरीज अधिक होते हैं। इनमें फेफडे व खाने की नली वाले मरीज भी शामिल है। इनकी संख्या यहां की ओपीडी की 50 प्रतिशत है। जबकि महिलाओं में होने वाले सर्विक्स कैंसर के करीब 35 प्रतिशत व ब्रेस्ट कैंसर के करीब 30 प्रतिशत मामले होते हैं। संस्थान की ओपीडी में औसतन 150 मरीज आते हैं। इनमें से 50 मरीज नए होते हैं। इस हिसाब से औसतन 20 मरीज रोज सामने आ रहे हैं। यह चिंता का विषय है। इस स्थिति को देखते हुए जागरूकता जरूरी है।
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संस्थान में हैं जांच के सभी उपकरण
पीजीआई में कैंसर की पहचान के सभी उपकरण मौजूद हैं। सर्विक्स कैंसर के लिए पैप्स मीयर व ब्रेस्ट कैंसर के लिए मेमोग्राफी व एमआरआई की सुविधा उपलब्ध है। चिकित्सकों के मुताबिक, सर्विक्स कैंस के लिए एचपीवी वायरस कारण होता है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। यह वैक्सीन बच्चियों को निर्धारित उम्र तक देकर उन्हें इस वायरस व खतरनाक कैंसर से सुरक्षित रख सकते हैं। इसके लिए अभिभावकों का जागरूक होना जरूरी है। यही नहीं ब्रेस्ट कैंसर में समय पर जांच से मरीज में बीमारी की पहचान होने पर बगैर ब्रेस्ट निकाले इलाज संभव है।
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संस्थान में हर तरह की कैंसर के मरीज आ रहे हैं। इन्हें इलाज दिया जा रहा है। समय रहते बीमारी की पहचान होने पर 90 प्रतिशत केसों में इलाज संभव है। जागरूकता की कमी के चलते ज्यादातर मामले अंतिम समय में आते हैं। इस स्थिति में चिकित्सक के लिए इलाज या मरीज को बचाना मुश्किल होता है। संस्थान की ओपीडी में करीब 50 नए मरीज सामने आ रहे हैं। इस स्थिति में जागरूकता बेहद जरूरी है।
डाॅ. संजीव प्रसाद, हेड, सर्जिकल ओंकोलॉजी, पीजीआईएमएस।