{"_id":"5b85bd1442c79246695cdd6a","slug":"191535491348-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट ने पीजीआईएमएस के आठ डॉक्टरों के मेवात जाने पर लगाया स्टे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट ने पीजीआईएमएस के आठ डॉक्टरों के मेवात जाने पर लगाया स्टे
Updated Wed, 29 Aug 2018 02:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने पीजीआईएमएस के आठ डॉक्टरों के मेवात जाने पर लगाया स्टे
प्रकाशित समाचार की फोटो प्रति एसएनजे तीन
अमर उजाला फॉलोअप
-एमसीआई को गुमराह करने की पालिसी संस्थान को पड़ सकती है भारी
-एचएसएमटीए ने बजाया था पीजीआईएमएस प्रशासन के विरोध में बिगुल
-हर साल स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर भी इस प्रक्रिया पर जताते थे आपत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष शहीद हसन खान मेवाती गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज नलहर नूंह में रिक्त स्टाफ को पूरा दिखाने का प्रयास पीजीआईएमएस को भारी पड़ गया है। नियमों को ताक पर रखकर डेपुटेशन पर भेजे गए आठ डॉक्टरों की सुनवाई करते हुए मंगलवार को हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्टे दे दिया। इस मुद्दे को हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन (एचएसएमटीए) ने भी सख्त लहजे में उठाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों के फैसले का विरोध किया था।
हाईकोर्ट की ओर से पीजीआईएमएस के आठों डॉक्टरों को मिले स्टे के बाद संस्थान की मुसीबत बढ़ गई है। सूत्रों की मानें तो यह मामला मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के संज्ञान में भी भेजा जा चुका है। ऐसे में पीजीआईएमएस रोहतक व मेवाती गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। डॉक्टरों की मानें तो एमसीआई के निरीक्षण के दौरान हमेशा स्टाफ को फर्जी तरीके से इधर-उधर दिखाया जाता है जबकि यह नियमों के खिलाफ है। स्टाफ पूरा करने की बजाय संस्थान डेपुटेशन के माध्यम से स्टाफ की संख्या को पूरा करता है। मगर एमसीआई के नियमानुसार कोई संस्थान अपने डॉक्टरों को किसी अन्य संस्थान में नहीं दिखा सकता। डेपुटेशन पर भेजे गए आठों डॉक्टरों के पक्ष में हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने भी कड़ा रुख जताया था।
---
इन डॉक्टरों को किया था पीजीआईएमएस से रिलीव
नाम पद विभाग
डॉ. शालिनी अग्रवाल प्रोफेसर रेडियोलॉजी
डॉ. विजय कालरा एसोसिएट प्रोफेसर ईएनटी
डॉ. रविंद्र सोलंकी एसोसिएट प्रोफेसर पीजीआईडीएस
डॉ. राजेश गुप्ता प्रोफेसर टीबी एंड चेस्ट
डॉ. पुरुषोत्तम एसोसिएट प्रोफेसर मनोचिकित्सा
डॉ. राज सिंह प्रोफेसर ऑर्थोपेडिक्स
डॉ. तरुण यादव असिस्टेंट प्रोफेसर एनेस्थिसियोलॉजी
डॉ. आलोक खन्ना प्रोफेसर पीडियाट्रिक्स
विज्ञापन
प्रकाशित समाचार की फोटो प्रति एसएनजे तीन
अमर उजाला फॉलोअप
-एमसीआई को गुमराह करने की पालिसी संस्थान को पड़ सकती है भारी
-एचएसएमटीए ने बजाया था पीजीआईएमएस प्रशासन के विरोध में बिगुल
-हर साल स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर भी इस प्रक्रिया पर जताते थे आपत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष शहीद हसन खान मेवाती गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज नलहर नूंह में रिक्त स्टाफ को पूरा दिखाने का प्रयास पीजीआईएमएस को भारी पड़ गया है। नियमों को ताक पर रखकर डेपुटेशन पर भेजे गए आठ डॉक्टरों की सुनवाई करते हुए मंगलवार को हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्टे दे दिया। इस मुद्दे को हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन (एचएसएमटीए) ने भी सख्त लहजे में उठाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों के फैसले का विरोध किया था।
हाईकोर्ट की ओर से पीजीआईएमएस के आठों डॉक्टरों को मिले स्टे के बाद संस्थान की मुसीबत बढ़ गई है। सूत्रों की मानें तो यह मामला मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के संज्ञान में भी भेजा जा चुका है। ऐसे में पीजीआईएमएस रोहतक व मेवाती गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। डॉक्टरों की मानें तो एमसीआई के निरीक्षण के दौरान हमेशा स्टाफ को फर्जी तरीके से इधर-उधर दिखाया जाता है जबकि यह नियमों के खिलाफ है। स्टाफ पूरा करने की बजाय संस्थान डेपुटेशन के माध्यम से स्टाफ की संख्या को पूरा करता है। मगर एमसीआई के नियमानुसार कोई संस्थान अपने डॉक्टरों को किसी अन्य संस्थान में नहीं दिखा सकता। डेपुटेशन पर भेजे गए आठों डॉक्टरों के पक्ष में हरियाणा स्टेट मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने भी कड़ा रुख जताया था।
विज्ञापन
---
इन डॉक्टरों को किया था पीजीआईएमएस से रिलीव
नाम पद विभाग
डॉ. शालिनी अग्रवाल प्रोफेसर रेडियोलॉजी
डॉ. विजय कालरा एसोसिएट प्रोफेसर ईएनटी
डॉ. रविंद्र सोलंकी एसोसिएट प्रोफेसर पीजीआईडीएस
डॉ. राजेश गुप्ता प्रोफेसर टीबी एंड चेस्ट
डॉ. पुरुषोत्तम एसोसिएट प्रोफेसर मनोचिकित्सा
डॉ. राज सिंह प्रोफेसर ऑर्थोपेडिक्स
डॉ. तरुण यादव असिस्टेंट प्रोफेसर एनेस्थिसियोलॉजी
डॉ. आलोक खन्ना प्रोफेसर पीडियाट्रिक्स