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द्रोपदी की राखी का श्री कृष्ण ने रखा था मान : पवन
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झज्जर। सिद्ध श्री 1008 बाबा कांशीगिरि जी महाराज मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के विश्राम अवसर पर कथा वाचक पवन कौशिक ने रक्षाबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामान्य बंधन भले ही किसी को पसंद न हो, लेकिन रक्षाबंधन के पवित्र बंधन में हर कोई बंधना चाहता है। रेशम की डोर भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है।
इस दौरान सावन उत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। महिला संकीर्तन मंडली की संगीता वर्मा, पूनम छाबड़ा, संतोष हंस और इंदू भुगड़ा ने भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महिला समिति प्रधान इंदू भुगड़ा ने रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। महिला सेवा समिति ने कथा वाचक का अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया और सदस्यों ने व्यास पीठ को रक्षा सूत्र बांधा। नगर पार्षद सुषमा गोसाई समेत समिति के सदस्य मौजूद रहे।
पवन कौशिक ने द्रौपदी और श्रीकृष्ण से जुड़ी कथा सुनाते हुए बताया कि द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की घायल उंगली पर साड़ी का टुकड़ा बांधा था। बाद में चीरहरण के समय श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाकर उस बंधन का फर्ज निभाया।
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इस दौरान सावन उत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। महिला संकीर्तन मंडली की संगीता वर्मा, पूनम छाबड़ा, संतोष हंस और इंदू भुगड़ा ने भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महिला समिति प्रधान इंदू भुगड़ा ने रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। महिला सेवा समिति ने कथा वाचक का अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया और सदस्यों ने व्यास पीठ को रक्षा सूत्र बांधा। नगर पार्षद सुषमा गोसाई समेत समिति के सदस्य मौजूद रहे।
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पवन कौशिक ने द्रौपदी और श्रीकृष्ण से जुड़ी कथा सुनाते हुए बताया कि द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की घायल उंगली पर साड़ी का टुकड़ा बांधा था। बाद में चीरहरण के समय श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाकर उस बंधन का फर्ज निभाया।
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