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एक गार्ड घोटाले के बाद भी नहीं जागा पीजीआईएमएस
Updated Thu, 12 Jul 2018 03:00 AM IST
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एक गार्ड घोटाले के बाद भी नहीं जागा पीजीआईएमएस
पांच पत्र जारी होने के बाद भी अधिकारी मौन
संस्थान का लोगो
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में गार्ड घोटाले की जांच भले ही एसआईटी कर रही हो, लेकिन संस्थान की नींद अभी तक नहीं खुली है। निजी सुरक्षा कंपनी की मनमानी पर अधिकारियों का चुप्पी साधना सामान्य बात हो गया है। जबकि सुरक्षा कंट्रोल रूम की बात करें तो एक के बाद एक पांच पत्र कंपनी की लापरवाही के जारी हो गए हैं, इसके बावजूद अधिकारी मौन हैं।
सूत्रों की मानें तो संस्थान में 675 सुरक्षा गार्ड का निजी कंपनी से टेंडर हुआ है। निजी कंपनी ने एमओयू को ताक पर रख कर अभी तक 25 फीसदी सेवानिवृत्त फौजियों की भर्ती नहीं की है। इसके अलावा अधिकांश गार्ड ओवरएज हैं। इन सभी पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी एक चीफ सुरक्षा अधिकारी और दो सहायक सुरक्षा अधिकारियों के पास है। सुरक्षा कंट्रोल रूम निजी गार्डों की आए दिन होने वाली हड़तालों को लेकर परेशान हैं कि वह किसी भी समय आपात विभाग, लेबर रूम, ऑपरेशन थियेटर, धनवंतरी अपेक्स ट्रॉमा सेंटर जैसी अत्यावश्यक सर्विस को पीछे छोड़ कर हड़ताल में शामिल हो जाते हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि जब संस्थान का निजी कंपनी से एमओयू साइन हुआ तो इसमें तय था कि सुरक्षा गार्ड कोई यूनियन नहीं बना सकते और हड़ताल भी नहीं कर सकते। इसके बावजूद आए दिन गार्ड काम छोड़ कर सीधा कुलपति कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंच जाते हैं। जबकि नियमानुसार एक अनुपस्थिति पर 1000 रुपये प्रति दिन गार्ड पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है।
इन तारीखों को जारी हुआ पत्र
6 जुलाई
7 जुलाई
9 जुलाई
10 जुलाई
11 जुलाई
जांच पर भी है सभी को आपत्ति
सूत्रों की मानें तो संस्थान में कार्य करने वाले निजी सुरक्षा गार्डों को आपत्ति है कि जांच अधिकारी किसी भी समय जांच करते हैं। कोई अपने निजी काम के चलते यदि दो से तीन मिनट भी इधर-उधर होता है तो जुर्माना लगा दिया जाता है। इसके साथ ही समय पर वेतन नहीं मिलता। वहीं जांच करने वालों की मानें तो सुरक्षा गार्ड जांच के दौरान अपना नंबर और नाम तक गलत बताते हैं। स्थिति यह है कि कोई डीसी का पीए तो कोई मंत्री का पीए बन कर फोन पर धमकी देते हैं। अब ऐसे फर्जी कॉल करने वालों की नंबर के आधार पर पुलिस में शिकायत दी जाएगी।
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दो सुरक्षा अधिकारी है निलंबित, डॉक्टर की बारी का इंतजार
पूर्व में निजी सुरक्षा कंपनी द्वारा किया गया गार्ड घोटाला उजागर होने के बाद दो सुरक्षा अधिकारी निलंबित चल रहे हैं। इसके अलावा अब जांच की आंच डॉक्टरों पर आने वाली है। इसके बावजूद संस्थान कोई सबक नहीं ले रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों की शह पर निजी कंपनी अपनी मनमानी कर रही है।
गार्डों की सैलरी संबंधी समस्या का समाधान हो गया है। इसके अलावा सुरक्षा गार्डों का हड़ताल करना सही नहीं है। इस संबंध में निजी सुरक्षा कंपनी से बात की जाएगी। एक सप्ताह के अंदर सारी व्यवस्थाओं को लाइन में ला दिया जाएगा।
- डॉ. एम.सी. गुप्ता, डीन, पीजीआईएमएस
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पांच पत्र जारी होने के बाद भी अधिकारी मौन
संस्थान का लोगो
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में गार्ड घोटाले की जांच भले ही एसआईटी कर रही हो, लेकिन संस्थान की नींद अभी तक नहीं खुली है। निजी सुरक्षा कंपनी की मनमानी पर अधिकारियों का चुप्पी साधना सामान्य बात हो गया है। जबकि सुरक्षा कंट्रोल रूम की बात करें तो एक के बाद एक पांच पत्र कंपनी की लापरवाही के जारी हो गए हैं, इसके बावजूद अधिकारी मौन हैं।
सूत्रों की मानें तो संस्थान में 675 सुरक्षा गार्ड का निजी कंपनी से टेंडर हुआ है। निजी कंपनी ने एमओयू को ताक पर रख कर अभी तक 25 फीसदी सेवानिवृत्त फौजियों की भर्ती नहीं की है। इसके अलावा अधिकांश गार्ड ओवरएज हैं। इन सभी पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी एक चीफ सुरक्षा अधिकारी और दो सहायक सुरक्षा अधिकारियों के पास है। सुरक्षा कंट्रोल रूम निजी गार्डों की आए दिन होने वाली हड़तालों को लेकर परेशान हैं कि वह किसी भी समय आपात विभाग, लेबर रूम, ऑपरेशन थियेटर, धनवंतरी अपेक्स ट्रॉमा सेंटर जैसी अत्यावश्यक सर्विस को पीछे छोड़ कर हड़ताल में शामिल हो जाते हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि जब संस्थान का निजी कंपनी से एमओयू साइन हुआ तो इसमें तय था कि सुरक्षा गार्ड कोई यूनियन नहीं बना सकते और हड़ताल भी नहीं कर सकते। इसके बावजूद आए दिन गार्ड काम छोड़ कर सीधा कुलपति कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंच जाते हैं। जबकि नियमानुसार एक अनुपस्थिति पर 1000 रुपये प्रति दिन गार्ड पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है।
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इन तारीखों को जारी हुआ पत्र
6 जुलाई
7 जुलाई
9 जुलाई
10 जुलाई
11 जुलाई
जांच पर भी है सभी को आपत्ति
सूत्रों की मानें तो संस्थान में कार्य करने वाले निजी सुरक्षा गार्डों को आपत्ति है कि जांच अधिकारी किसी भी समय जांच करते हैं। कोई अपने निजी काम के चलते यदि दो से तीन मिनट भी इधर-उधर होता है तो जुर्माना लगा दिया जाता है। इसके साथ ही समय पर वेतन नहीं मिलता। वहीं जांच करने वालों की मानें तो सुरक्षा गार्ड जांच के दौरान अपना नंबर और नाम तक गलत बताते हैं। स्थिति यह है कि कोई डीसी का पीए तो कोई मंत्री का पीए बन कर फोन पर धमकी देते हैं। अब ऐसे फर्जी कॉल करने वालों की नंबर के आधार पर पुलिस में शिकायत दी जाएगी।
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दो सुरक्षा अधिकारी है निलंबित, डॉक्टर की बारी का इंतजार
पूर्व में निजी सुरक्षा कंपनी द्वारा किया गया गार्ड घोटाला उजागर होने के बाद दो सुरक्षा अधिकारी निलंबित चल रहे हैं। इसके अलावा अब जांच की आंच डॉक्टरों पर आने वाली है। इसके बावजूद संस्थान कोई सबक नहीं ले रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों की शह पर निजी कंपनी अपनी मनमानी कर रही है।
गार्डों की सैलरी संबंधी समस्या का समाधान हो गया है। इसके अलावा सुरक्षा गार्डों का हड़ताल करना सही नहीं है। इस संबंध में निजी सुरक्षा कंपनी से बात की जाएगी। एक सप्ताह के अंदर सारी व्यवस्थाओं को लाइन में ला दिया जाएगा।
- डॉ. एम.सी. गुप्ता, डीन, पीजीआईएमएस