{"_id":"5a7389de4f1c1b8e238b61bd","slug":"191517521374-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमर उजाला एक्सक्लूसिव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
Updated Fri, 02 Feb 2018 03:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो
दिल्ली और रोहतक में 24 रेलवे क्रॉसिंग पर शुरू हुईं इलेक्ट्रॉनिक लेवल क्रासिंग मशीन --
अब गेटमैन नहीं स्टेशन से आया सिग्नल खोलेगा रेलवे क्रॉसिंग का बैरियर
- सीधे रेलवे सिग्नल व रेलवे स्टेशन से कनेक्ट रहेंगी मशीनें
- संबंधित रेलवे स्टेशन से हरी झंडी मिलने के बाद ही खुल सकेंगे बैरियर
- रेलवे अधिकारियों व कर्मचारियों में तालमेल की भी नहीं रहेगी कमी
महबूब अली
रोहतक।
रेल अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच तालमेल की कमी व हादसों पर अंकुश लगाने के लिये रोहतक व दिल्ली में 24 रेलवे क्रासिंग पर इलेक्ट्रॉनिक एलसी (लेवल क्रासिंग) मशीन लगाई गई है। मशीन सीधे संबंधित रेलवे स्टेशन से कनेक्ट रहेगी। रेलवे स्टेशन से हरी झंडी मिलने के बाद ही बैरियर खुल सकेंगे। वीरवार से मशीनों को चालू करा दिया गया। मशीन के माध्यम से अब रेलवे अधिकारियों व कर्मचारियों में भी तालमेल बना रहेगा।
अभी ऐसा होता था कि ट्रेनों के गुजारने के समय रेलवे क्रासिंग को केबिन मैन बंद करता था। कई बार लोगों की शिकायत रहती थी कि के केबिन मैन ट्रेन आने के समय से पूर्व ही रेलवे क्रॉसिंग को बंद कर देता है। यहीं नही ट्रेन जाने के काफी देर बाद तक फाटक को लगाए रखता है। कई बार तो रेलवे बैरियर नहीं लगाने की भी शिकायत मिलती थी।
रेलवे विभाग के सीपीआरओ नितिन जैन ने बताया कि रेलवे क्रॉसिंग पर हादसों पर अंकुश लगाने तथा अधिकारियों के बीच तालमेल को बनाए रखने के लिये कुछ समय पूर्व ही रोहतक व दिल्ली के विभिन्न स्थानों की रेलवे क्रासिंग पर इलेक्ट्रॉनिक लेवल क्रासिंग मशीन लगवाई गईं थीं। जिन्हें किसी कारणवश चालू नहीं कराया जा सका था। गुरुवार से रोहतक व दिल्ली के 24 स्थानों पर लगवायी गई मशीनों को संबंधित सिग्नल व रेलवे स्टेशन से कनेक्ट कर चालू करा दिया गया। रेलवे स्टेशन के अधिकारियों के कंप्यूटर से हरी झंडी मिलने के बाद ही बैरियर को गिराया या फिर खोला जा सकेगा। रेलवे स्टेशन के अधिकारी व केबिन मेन फोन पर भी एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही अन्य स्थानों पर लगवाई गई मशीनों को चालू करा दिया गया जाएगा।
विज्ञापन
रोहतक के इन रेलवे क्रासिंग पर चालू कराई गई है मशीन
- शीला बाईपास स्थित रेलवे क्रॉसिंग
- बजरंग भवन रेलवे फाटक
- डबल फाटक रेलवे क्रॉसिंग
- नये बस अड्डे के पास स्थित क्रॉसिंग
वीरवार को ही मशीनों को चालू कराया गया है। इससे जहां रेलवे स्टेशन के अधिकारियों के बीच तालमेल बना रहेगा। वहीं रेलवे बैरियर को बंद या फिर खोलने में केबिन मैन की भी मनमानी नहीं चलेगी। कम्यूनिकेशन गैप की वजह से होने वाले हादसों पर भी कुछ हद तक अंकुश लग सके गा।
- नितिन जैन, सीपीआरओ, रेलवे
मशीनों के चालू होने से जहां काफी देर तक रेलवे क्रासिंग बंद नहीं हो सकेगी। वहीं अधिकारी और कर्मचारी एक दूसरे के सीधे संपर्क में रहेंगे।
- आरके तनेजा, आरडब्ल्यू रोहतक
क्या है लेवल क्रॉसिंग बैरियर मशीन
यह बिजली से संचालित एक मशीन होती है। जो सीधे रेलवे स्टेशन और सिग्नल से कनेक्ट रहती है। मशीन के अंदर एक मोटर भी लगी है। रेलवे स्टेशन के अधिकारियों के हरी झंडी देने के बाद ही मशीन में लगे स्विच के माध्यम से बैरियरों को गिराया व खोला जा सकता है। इसके लिए मशीन में रेलवे स्टेशन से ही हरी व लाल बत्ती का सिग्नल मिलता है। एलसी शुरू होने के बाद केबिन मैन अब अपनी मर्जी से फाटक को नहीं खोल पाएंगे। बता दें कि पहले फाटक को केबिन मैन स्वयं खोलता और बंद करता था। फाटक की चाभी केबिन मैन के पास ही होती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। फाटक की एक चाभी केबिन मैन के पास और एक मास्टर चाभी स्टेशन में होगी। स्टेशन से लाक खुलने के बाद केबिन मैन संबंधित फाटक को खोल सकेगा। हालांकि ये पूरा सिस्टम कंप्यूटराइज्ड होगा।
विज्ञापन
दिल्ली और रोहतक में 24 रेलवे क्रॉसिंग पर शुरू हुईं इलेक्ट्रॉनिक लेवल क्रासिंग मशीन --
अब गेटमैन नहीं स्टेशन से आया सिग्नल खोलेगा रेलवे क्रॉसिंग का बैरियर
- सीधे रेलवे सिग्नल व रेलवे स्टेशन से कनेक्ट रहेंगी मशीनें
- संबंधित रेलवे स्टेशन से हरी झंडी मिलने के बाद ही खुल सकेंगे बैरियर
- रेलवे अधिकारियों व कर्मचारियों में तालमेल की भी नहीं रहेगी कमी
महबूब अली
रोहतक।
रेल अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच तालमेल की कमी व हादसों पर अंकुश लगाने के लिये रोहतक व दिल्ली में 24 रेलवे क्रासिंग पर इलेक्ट्रॉनिक एलसी (लेवल क्रासिंग) मशीन लगाई गई है। मशीन सीधे संबंधित रेलवे स्टेशन से कनेक्ट रहेगी। रेलवे स्टेशन से हरी झंडी मिलने के बाद ही बैरियर खुल सकेंगे। वीरवार से मशीनों को चालू करा दिया गया। मशीन के माध्यम से अब रेलवे अधिकारियों व कर्मचारियों में भी तालमेल बना रहेगा।
अभी ऐसा होता था कि ट्रेनों के गुजारने के समय रेलवे क्रासिंग को केबिन मैन बंद करता था। कई बार लोगों की शिकायत रहती थी कि के केबिन मैन ट्रेन आने के समय से पूर्व ही रेलवे क्रॉसिंग को बंद कर देता है। यहीं नही ट्रेन जाने के काफी देर बाद तक फाटक को लगाए रखता है। कई बार तो रेलवे बैरियर नहीं लगाने की भी शिकायत मिलती थी।
विज्ञापन
रेलवे विभाग के सीपीआरओ नितिन जैन ने बताया कि रेलवे क्रॉसिंग पर हादसों पर अंकुश लगाने तथा अधिकारियों के बीच तालमेल को बनाए रखने के लिये कुछ समय पूर्व ही रोहतक व दिल्ली के विभिन्न स्थानों की रेलवे क्रासिंग पर इलेक्ट्रॉनिक लेवल क्रासिंग मशीन लगवाई गईं थीं। जिन्हें किसी कारणवश चालू नहीं कराया जा सका था। गुरुवार से रोहतक व दिल्ली के 24 स्थानों पर लगवायी गई मशीनों को संबंधित सिग्नल व रेलवे स्टेशन से कनेक्ट कर चालू करा दिया गया। रेलवे स्टेशन के अधिकारियों के कंप्यूटर से हरी झंडी मिलने के बाद ही बैरियर को गिराया या फिर खोला जा सकेगा। रेलवे स्टेशन के अधिकारी व केबिन मेन फोन पर भी एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही अन्य स्थानों पर लगवाई गई मशीनों को चालू करा दिया गया जाएगा।
विज्ञापन
रोहतक के इन रेलवे क्रासिंग पर चालू कराई गई है मशीन
- शीला बाईपास स्थित रेलवे क्रॉसिंग
- बजरंग भवन रेलवे फाटक
- डबल फाटक रेलवे क्रॉसिंग
- नये बस अड्डे के पास स्थित क्रॉसिंग
वीरवार को ही मशीनों को चालू कराया गया है। इससे जहां रेलवे स्टेशन के अधिकारियों के बीच तालमेल बना रहेगा। वहीं रेलवे बैरियर को बंद या फिर खोलने में केबिन मैन की भी मनमानी नहीं चलेगी। कम्यूनिकेशन गैप की वजह से होने वाले हादसों पर भी कुछ हद तक अंकुश लग सके गा।
- नितिन जैन, सीपीआरओ, रेलवे
मशीनों के चालू होने से जहां काफी देर तक रेलवे क्रासिंग बंद नहीं हो सकेगी। वहीं अधिकारी और कर्मचारी एक दूसरे के सीधे संपर्क में रहेंगे।
- आरके तनेजा, आरडब्ल्यू रोहतक
क्या है लेवल क्रॉसिंग बैरियर मशीन
यह बिजली से संचालित एक मशीन होती है। जो सीधे रेलवे स्टेशन और सिग्नल से कनेक्ट रहती है। मशीन के अंदर एक मोटर भी लगी है। रेलवे स्टेशन के अधिकारियों के हरी झंडी देने के बाद ही मशीन में लगे स्विच के माध्यम से बैरियरों को गिराया व खोला जा सकता है। इसके लिए मशीन में रेलवे स्टेशन से ही हरी व लाल बत्ती का सिग्नल मिलता है। एलसी शुरू होने के बाद केबिन मैन अब अपनी मर्जी से फाटक को नहीं खोल पाएंगे। बता दें कि पहले फाटक को केबिन मैन स्वयं खोलता और बंद करता था। फाटक की चाभी केबिन मैन के पास ही होती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। फाटक की एक चाभी केबिन मैन के पास और एक मास्टर चाभी स्टेशन में होगी। स्टेशन से लाक खुलने के बाद केबिन मैन संबंधित फाटक को खोल सकेगा। हालांकि ये पूरा सिस्टम कंप्यूटराइज्ड होगा।