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हनुमान सिंड्रोम

Sun, 20 May 2018 02:52 AM IST
Updated Sun, 20 May 2018 02:52 AM IST
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हनुमान सिंड्रोम
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
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आधुनिक युग में त्रेता युग से कहीं अधिक हावी है ‘हनुमान सिंड्रोम’

संजय कुमार
रोहतक। आधुनिक युग में त्रेता युग से कहीं अधिक हावी है हनुमान सिंड्रोम। इससे ग्रस्त व्यक्ति को यदि समय पर उपचार दे दिया जाये तो वह असंभव को भी संभव बना सकता है। यदि ऐसा नहीं होता तो वहीं व्यक्ति मानसिक रोगी बन जाता है और समय के साथ उसके अंदर आत्महत्या करने की प्रवृति बढ़ने लगती है। मनोचिकित्सक मानते हैं कि अकसर यह समस्या उन लोगों को होती है जो अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की शक्ति रखते हैं, लेकिन किन्हीं कारणों से वह बीच में रुक जाते हैं।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्य विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप पांडेय के अनुसार तनावपूर्ण जीवन हर व्यक्ति जी रहा है। इसी में कुछ ऐसे व्यक्ति होते हैं जो कि काबिल तो होते हैं, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते वह लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते या स्वयं को वहां तक पहुंचने में असहज महसूस करते हैं। यह समस्या वर्तमान में परीक्षा में अंकों को लेकर, प्रतियोगी परीक्षाओं में, मनचाहे कॉलेज में सीटों व कोर्स को लेकर तथा नौकरियों को लेकर अधिकांश देखी जाती है। ओपीडी में प्रतिदिन 40 के करीब ऐसे मरीज उपचार के लिये आते हैं। दुर्भाग्यवश अब तक चार मरीज आत्महत्या भी कर चुके हैं, क्योंकि जब मरीज ओपीडी में नहीं आ रहे थे तो उनके परिजनों से संपर्क साधा गया तो घटना का पता चला।
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क्या है हनुमान सिंड्रोम
डॉ. प्रदीप ने बताया कि त्रेता युग में राम भक्त हनुमान जब सीता की खोज के लिये जब हिंद महासागर पहुंचे तो हताश हो गये कि वह अब वह क्या करें। ऐसे में जामवंत ने हनुमान को उनकी शक्तियां याद कराई तो वह सीता का पता ही नहीं लगा कर आये, बल्कि लंका को जला कर भी आ गये। ऐसे ही वर्तमान में भी कई युवा ऐसे हैं जो कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन वह कुछ समय के लिये भूल जाते हैं कि वह हर चीज पाने में सक्षम हैं। मनोचिकित्सक इस काल को इसे हनुमान सिंड्रोम कहते हैं, जिसका उपचार केवल पीड़ित व्यक्ति को उनकी शक्तियां याद दिलाना है। एक्सपर्ट ने बताया कि यह समस्या सामान्य है, यह समय के साथ-साथ चलती है। इसका दूसरा उदाहरण द्वापर युग में महाभारत के युद्ध को भी देख सकते हैं। कुुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन जब हनुमान सिंड्रोम से ग्रस्त हो कर हताश होते हैं तो कृष्ण जामवंत के रूप में उन्हें उनकी शक्तियां बताते हैं और वही अर्जुन पूरे युद्ध के नायक बनते हैं।
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परिजनों को चाहिये वह बने जामवंत
एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि आपका बच्चा किसी वजह से हताश हो गया है तो उसे उसकी पिछली उपलब्धियां याद दिलाये। इससे उसमें हौसला आयेगा और वह वापस अपनी मंजिल पर बढ़ने के लिये उत्साहित होगा। यह कार्य घर में परिजन, स्कूल में गुरुजन व कार्यालय में उसके सीनियर अधिकारी कर सकते हैं।
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