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जाट भवन
Updated Mon, 19 Mar 2018 02:31 AM IST
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सवालों के घिरा जाट भवन का सोलर सिस्टम, लगने के बाद से पड़ा है ठप
चार लाख रुपये से लगाए गए सिस्टम में घालमेल का अंदेशा, समाज के लोगाें ने जांच का उठाया मुद्दा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जाट भवन का सोलर सिस्टम सवालाें के घेरे में है। भवन में लगने के बाद से चार लाख रुपये की लागत का यह सिस्टम ठप पड़ा है। समाज के लोगाें ने इस मामले में निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। इस बारे में उपायुक्त को शिकायत भी दी गई है।
शिकायत में कहा गया है कि सेक्टर एक स्थित जाट भवन में सोलर सिस्टम लगाया गया है। इसके लिए चार लाख रुपये खर्च आया। लगने के बाद से यह सिस्टम बंद पड़ा है। इस कारण सिस्टम का लाभ नहीं मिल रहा है। जबकि खरीद से पहले भवन की 75 प्रतिशत बिजली जरूरत सिस्टम से पूरी होने का दावा किया गया था। ऐसे में यह संस्था की राशि के गबन का मामला बनता है। सोलर सिस्टम निम्न गुणवत्ता वाला लगाया गया है। इस मामले की विजिलेंस जांच होनी चाहिए। सिस्टम किस कंपनी ने लगाया व कितनी राशि का गबन हुआ है, यह स्पष्ट किया जाए। वर्ष 2014 में यह सिस्टम खरीदने के लिए कमेटी गठित की गई थी। यह कमेटी भी शक के दायरे में है। इस ओर शीघ्र कार्रवाई की जानी चाहिए।
डीआईसी रजिस्ट्रार राजेश खेड़ा का कहना है कि मामले की शिकायत आई है। इसकी जांच एपीओ कर रहे हैं। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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चार लाख रुपये से लगाए गए सिस्टम में घालमेल का अंदेशा, समाज के लोगाें ने जांच का उठाया मुद्दा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जाट भवन का सोलर सिस्टम सवालाें के घेरे में है। भवन में लगने के बाद से चार लाख रुपये की लागत का यह सिस्टम ठप पड़ा है। समाज के लोगाें ने इस मामले में निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। इस बारे में उपायुक्त को शिकायत भी दी गई है।
शिकायत में कहा गया है कि सेक्टर एक स्थित जाट भवन में सोलर सिस्टम लगाया गया है। इसके लिए चार लाख रुपये खर्च आया। लगने के बाद से यह सिस्टम बंद पड़ा है। इस कारण सिस्टम का लाभ नहीं मिल रहा है। जबकि खरीद से पहले भवन की 75 प्रतिशत बिजली जरूरत सिस्टम से पूरी होने का दावा किया गया था। ऐसे में यह संस्था की राशि के गबन का मामला बनता है। सोलर सिस्टम निम्न गुणवत्ता वाला लगाया गया है। इस मामले की विजिलेंस जांच होनी चाहिए। सिस्टम किस कंपनी ने लगाया व कितनी राशि का गबन हुआ है, यह स्पष्ट किया जाए। वर्ष 2014 में यह सिस्टम खरीदने के लिए कमेटी गठित की गई थी। यह कमेटी भी शक के दायरे में है। इस ओर शीघ्र कार्रवाई की जानी चाहिए।
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डीआईसी रजिस्ट्रार राजेश खेड़ा का कहना है कि मामले की शिकायत आई है। इसकी जांच एपीओ कर रहे हैं। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।