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रेडियोलॉजी विभाग और पीपीपी मोड के सीटी स्कैन सेंटर के चक्कर काट रहे मरीज
Updated Thu, 15 Mar 2018 03:08 AM IST
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रेडियोलॉजी विभाग और पीपीपी मोड के सीटी स्कैन सेंटर के चक्कर काट रहे मरीज
- नॉन एमएलसी केसों की समय पर नहीं मिलती जांच रिपोर्ट
- संस्थान की सरकारी मशीन सप्ताह से पड़ी है खराब
- 46 लाख की ट्यूब आने के बाद ही शुरू होगा काम
संजय कुमार
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में आने वाले नॉन एमएलसी केस के गंभीर रोगियों को इन दिनों रेडियोलॉजी और पीपीपी मोड पर लगे सीटी स्कैन जांच केंद्र के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। क्योंकि रेडियोलॉजी विभाग की सीटी स्कैन मशीन खराब हो गई है। इसके चलते विभाग के डॉक्टर नियमानुसार एमएलसी केस के सीटी स्कैन की रिपोर्ट तो बना रहे हैं, लेकिन नॉन एमएलसी केस की रिपोर्ट पेंडिंग चल रही है। निजी जांच केंद्र रिपोर्ट देने के लिए मरीज से समय मांगता है, जबकि गंभीर मरीज का उपचार करने के लिए डॉक्टर को तत्काल रिपोर्ट की जरूरत होती है।
संस्थान के रेडियोलॉजी विभाग की सीटी स्कैन मशीन 17 साल पुरानी है। इस मशीन पर अधिकांश एमएलसी और नॉन एमएलसी केसों के मरीजों की जांच की जाती है। मशीन के खराब होने पर अब सारा वर्क लोड निजी जांच केंद्र पर आ गया है। रेडियोलॉजी विभाग के डॉक्टर मरीजों की सहूलियत के लिए एमएलसी केसों की रिपोर्टिंग तो कर देते हैं, लेकिन वह नॉन एमएलसी केसों की रिपोर्टिंग नहीं कर रहे हैं। विभाग का कहना है कि यह रिपोर्ट निजी जांच केंद्र को तत्काल देनी चाहिए। क्योंकि जिस प्रकार एमएलसी केस का मरीज गंभीर अवस्था में होता है वैसे ही नॉन एमएलसी का मरीज भी गंभीर अवस्था में होता है। जब निजी जांच सेंटर जांच की फीस वसूल रहा है तो उसे ही रिपोर्ट भी देनी चाहिए। लेकिन निजी जांच केंद्र मरीजों को रिपोर्ट के लिए तीन दिन का समय दे रहा है। ऐसे में मरीज का उपचार कर रहे चिकित्सक की मजबूरी हो रही है कि वह गंभीर स्थिति के मरीज का उपचार कैसे करे। दोनों के विवाद में संस्थान में आने वाले गंभीर रोगी आए दिन पिस रहे हैं। अधिकांश मरीजों ने तो अब इस विवाद से बचने के लिए निजी जांच केंद्रों की ओर रूख कर लिया है। इस संबंध में मरीज खुल कर बोलने को तैयार नहीं है। मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि उन्हें निजी केंद्र में भी जांच फीस देनी है और बाहर भी, वह विवाद में उलझ कर अपने मरीज की जान खतरे में नहीं डालना चाहते।
खराब ट्यूब की कीमत है 46 लाख रुपये
एक्सपर्ट की मानें तो सीटी स्कैन जांच मशीन में खराब ट्यूब की कीमत 46 लाख रुपये है। यह विदेश से मंगाई जानी है। इसके लिए आर्डर किया जा चुका है। सूत्रों की मानें तो कंपनी इसके लिए पहले पेमेंट मांग रही है, इस पर अड़चन लगी है और पुर्जा नहीं आ पा रहा है। प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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बोले अधिकारी
नियमानुसार हमारे डॉक्टर एमएलएसी केस की रिपोर्टिंग कर रहे हैं। बाकी जांच निजी सेंटर कर रहा है तो उसे मरीज को रिपोर्ट भी देनी चाहिए। खराब मशीन का पुर्जा आर्डर किया है, इसके आते ही कार्य शुरू हो जाएगा।
- डॉ. रोहताश यादव, विभागाध्यक्ष, रेडियोलॉजी विभाग, पीजीआईएमएस
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रेडियोलॉजी विभाग और पीपीपी मोड के सीटी स्कैन सेंटर के चक्कर काट रहे मरीज
- नॉन एमएलसी केसों की समय पर नहीं मिलती जांच रिपोर्ट
- संस्थान की सरकारी मशीन सप्ताह से पड़ी है खराब
- 46 लाख की ट्यूब आने के बाद ही शुरू होगा काम
संजय कुमार
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में आने वाले नॉन एमएलसी केस के गंभीर रोगियों को इन दिनों रेडियोलॉजी और पीपीपी मोड पर लगे सीटी स्कैन जांच केंद्र के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। क्योंकि रेडियोलॉजी विभाग की सीटी स्कैन मशीन खराब हो गई है। इसके चलते विभाग के डॉक्टर नियमानुसार एमएलसी केस के सीटी स्कैन की रिपोर्ट तो बना रहे हैं, लेकिन नॉन एमएलसी केस की रिपोर्ट पेंडिंग चल रही है। निजी जांच केंद्र रिपोर्ट देने के लिए मरीज से समय मांगता है, जबकि गंभीर मरीज का उपचार करने के लिए डॉक्टर को तत्काल रिपोर्ट की जरूरत होती है।
संस्थान के रेडियोलॉजी विभाग की सीटी स्कैन मशीन 17 साल पुरानी है। इस मशीन पर अधिकांश एमएलसी और नॉन एमएलसी केसों के मरीजों की जांच की जाती है। मशीन के खराब होने पर अब सारा वर्क लोड निजी जांच केंद्र पर आ गया है। रेडियोलॉजी विभाग के डॉक्टर मरीजों की सहूलियत के लिए एमएलसी केसों की रिपोर्टिंग तो कर देते हैं, लेकिन वह नॉन एमएलसी केसों की रिपोर्टिंग नहीं कर रहे हैं। विभाग का कहना है कि यह रिपोर्ट निजी जांच केंद्र को तत्काल देनी चाहिए। क्योंकि जिस प्रकार एमएलसी केस का मरीज गंभीर अवस्था में होता है वैसे ही नॉन एमएलसी का मरीज भी गंभीर अवस्था में होता है। जब निजी जांच सेंटर जांच की फीस वसूल रहा है तो उसे ही रिपोर्ट भी देनी चाहिए। लेकिन निजी जांच केंद्र मरीजों को रिपोर्ट के लिए तीन दिन का समय दे रहा है। ऐसे में मरीज का उपचार कर रहे चिकित्सक की मजबूरी हो रही है कि वह गंभीर स्थिति के मरीज का उपचार कैसे करे। दोनों के विवाद में संस्थान में आने वाले गंभीर रोगी आए दिन पिस रहे हैं। अधिकांश मरीजों ने तो अब इस विवाद से बचने के लिए निजी जांच केंद्रों की ओर रूख कर लिया है। इस संबंध में मरीज खुल कर बोलने को तैयार नहीं है। मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि उन्हें निजी केंद्र में भी जांच फीस देनी है और बाहर भी, वह विवाद में उलझ कर अपने मरीज की जान खतरे में नहीं डालना चाहते।
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खराब ट्यूब की कीमत है 46 लाख रुपये
एक्सपर्ट की मानें तो सीटी स्कैन जांच मशीन में खराब ट्यूब की कीमत 46 लाख रुपये है। यह विदेश से मंगाई जानी है। इसके लिए आर्डर किया जा चुका है। सूत्रों की मानें तो कंपनी इसके लिए पहले पेमेंट मांग रही है, इस पर अड़चन लगी है और पुर्जा नहीं आ पा रहा है। प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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नियमानुसार हमारे डॉक्टर एमएलएसी केस की रिपोर्टिंग कर रहे हैं। बाकी जांच निजी सेंटर कर रहा है तो उसे मरीज को रिपोर्ट भी देनी चाहिए। खराब मशीन का पुर्जा आर्डर किया है, इसके आते ही कार्य शुरू हो जाएगा।
- डॉ. रोहताश यादव, विभागाध्यक्ष, रेडियोलॉजी विभाग, पीजीआईएमएस