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नए सत्र में परिवहन सेवा के नाम पर हो रही ठगी
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रोहतक। नए शैक्षणिक सत्र में सरकारी स्कूल विद्यार्थियों की बाट जोह रहे हैं तो निजी स्कूलों में दाखिले की होड़ लगी है। यहां बच्चों से दाखिला फीस, किताबें व वर्दी ही नहीं परिवहन सेवा के नाम पर भी ठगी की जा रही है। निजी स्कूल बस सेवा के नाम पर तीन से छह रुपये प्रति किलोमीटर शुल्क वसूल रहे हैं। यह शुल्क रोडवेज के 85 पैसे प्रति किलोमीटर किराए का करीब साढ़े तीन रुपये से सात रुपये प्रति किलोमीटर अधिक बनता है। शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन अभिभावकों से की जा रही इस ठगी से अनजान बना हुआ है। उन्हें शिकायत या किसी हादसे का इंतजार है।
जिले में 270 स्कूलों की 1150 बसें पंजीकृत
जिले के 270 निजी स्कूलों में बच्चों को घर से स्कूल व स्कूल से घर तक पहुंचाने के लिए 1150 बसें हैं। इन बसों में बच्चों से एक हजार से तीन हजार रुपये प्रति महीने शुल्क वसूला जा रहा है। यह शुल्क स्कूल से घर के बीच प्रत्येक पांच किलोमीटर की दूरी के हिसाब से तय किया गया है। पहले पांच किलोमीटर में किराया एक हजार से 1300 रुपये तक है। इससे आगे 1800 रुपये तक व 15 किलोमीटर से अधिक के लिए 2500 से तीन हजार रुपये तक किराया तय किया गया है। हर स्कूल का किराया लगभग इसी मद में अलग-अलग है।
कंडम बसों पर पेंट करा कर चला रहे काम
जिले के कुछ निजी स्कूल परिवहन सेवा के नाम पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसकी वजह कंडम बसों को चलाना है। कुछ स्कूल संचालक अपने फायदे के लिए कंडम बसों पर पेंट करा कर उन्हीं से काम चला रहे हैं। नियमानुसार प्रदेश में डीजल वाहन दस व पेट्रोल वाहन 15 वर्ष तक की सड़कों पर चलाए जा सकते हैं। विभाग इतनी ही अनुमति देता है। इसके बाद भी कुछ स्कूल विभाग से एनओसी लेकर इन्हीं वाहनों को इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में बच्चों के साथ अनहोनी होने का भय बना हुआ है।
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यह है नियम : आरटीए विभाग के नियमानुसार वाहन का निर्धारित समय पूरा होने के बाद इसे नहीं चलाया जा सकता है। एनओसी लेने के बावजूद ऐसा वाहन सड़क पर दौड़ता मिलता है तो उसे जब्त किया जाएगा। इसके बाद विभाग ही इसे नीलाम करेगा। वाहन मालिक के पास इसका कोई अधिकार नहीं रहेगा।
यूं समझें किराए का गणित
शहर से बाहर जींद रोड स्थित एक स्कूल ने पहले पांच किलोमीटर के लिए 1265 रुपये मासिक किराया तय किया है। इस किराए को 30 दिन में बांटने पर यह करीब 42 रुपये 16 पैसे प्रति दिन बनता है। इस किराए को रोजाना पांच किलोमीटर आने व पांच किलोमीटर जाने के हिसाब से कुल 10 किलोमीटर से भाग करने पर चार रुपये 21 पैसे प्रति किलोमीटर शुल्क आता है। यह रोडवेज के निर्धारित 85 पैसे से काफी अधिक बनता है।
बस में बैठे बगैर अवकाश के दिन भी किराया वसूली
निजी स्कूल बच्चों से बस में बैठे बगैर भी किराया वसूल रहे हैं। या यूं कहें कि बच्चों को अवकाश के दिन अपने घर रह कर भी बस किराया देना पड़ रहा है। महीने में कम से कम चार रविवार आते हैं। इन दिनों स्कूल बंद रहते हैं। यही स्थिति गर्मी व सर्दी की छुट्टियों में भी रहती है। इन दिनों न स्कूल की लेबर लगती है न डीजल। इस हिसाब से यदि 1265 रुपये मासिक परिवहन शुल्क को 26 दिनों में बांटे तो यह 48 रुपये 65 पैसे बनता है। यह और भी अधिक है।
रोड टैक्स का एक हजार रुपये मासिक शुल्क
आरटीए कार्यालय के एक कर्मचारी ने बताया कि सरकार ने निजी स्कूल बसों पर अक्टूबर 2017 में ही रोड टैक्स लगाया है। यह एक हजार रुपये मासिक है। जबकि इससे पहले स्कूल आरटीए कार्यालय में बच्चों को घर से स्कूल लाने जाने के लिए नि:शुल्क सेवा देने का लिखित शपथ पत्र देकर आते रहे हैं। इसके बावजूद बच्चों से किराया वसूली की जाती रही है। नए नियमों के तहत स्कूल अब विद्यार्थियों से सामान्य किराया वसूल सकते हैं। पहले यह छूट नहीं थी।
निजी स्कूल विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने में जुटे हैं। इसके लिए तय मानकों के तहत ही फीस व किराया वसूला जा रहा है। कुछ स्कूल हो सकते हैं, जिन्होंने फीस व किराया ज्यादा बढ़ाया हो। संघ से जुड़े स्कूलों में ऐसा नहीं है। सभी स्कूल संचालक नियमों के तहत काम कर रहे हैं। गलत करने वालों के खिलाफ विभाग कार्रवाई करे।
रवींद्र नांदल, प्रधान, निजी स्कूल एसोसिएशन।
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जिले में 270 स्कूलों की 1150 बसें पंजीकृत
जिले के 270 निजी स्कूलों में बच्चों को घर से स्कूल व स्कूल से घर तक पहुंचाने के लिए 1150 बसें हैं। इन बसों में बच्चों से एक हजार से तीन हजार रुपये प्रति महीने शुल्क वसूला जा रहा है। यह शुल्क स्कूल से घर के बीच प्रत्येक पांच किलोमीटर की दूरी के हिसाब से तय किया गया है। पहले पांच किलोमीटर में किराया एक हजार से 1300 रुपये तक है। इससे आगे 1800 रुपये तक व 15 किलोमीटर से अधिक के लिए 2500 से तीन हजार रुपये तक किराया तय किया गया है। हर स्कूल का किराया लगभग इसी मद में अलग-अलग है।
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कंडम बसों पर पेंट करा कर चला रहे काम
जिले के कुछ निजी स्कूल परिवहन सेवा के नाम पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसकी वजह कंडम बसों को चलाना है। कुछ स्कूल संचालक अपने फायदे के लिए कंडम बसों पर पेंट करा कर उन्हीं से काम चला रहे हैं। नियमानुसार प्रदेश में डीजल वाहन दस व पेट्रोल वाहन 15 वर्ष तक की सड़कों पर चलाए जा सकते हैं। विभाग इतनी ही अनुमति देता है। इसके बाद भी कुछ स्कूल विभाग से एनओसी लेकर इन्हीं वाहनों को इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में बच्चों के साथ अनहोनी होने का भय बना हुआ है।
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यह है नियम : आरटीए विभाग के नियमानुसार वाहन का निर्धारित समय पूरा होने के बाद इसे नहीं चलाया जा सकता है। एनओसी लेने के बावजूद ऐसा वाहन सड़क पर दौड़ता मिलता है तो उसे जब्त किया जाएगा। इसके बाद विभाग ही इसे नीलाम करेगा। वाहन मालिक के पास इसका कोई अधिकार नहीं रहेगा।
यूं समझें किराए का गणित
शहर से बाहर जींद रोड स्थित एक स्कूल ने पहले पांच किलोमीटर के लिए 1265 रुपये मासिक किराया तय किया है। इस किराए को 30 दिन में बांटने पर यह करीब 42 रुपये 16 पैसे प्रति दिन बनता है। इस किराए को रोजाना पांच किलोमीटर आने व पांच किलोमीटर जाने के हिसाब से कुल 10 किलोमीटर से भाग करने पर चार रुपये 21 पैसे प्रति किलोमीटर शुल्क आता है। यह रोडवेज के निर्धारित 85 पैसे से काफी अधिक बनता है।
बस में बैठे बगैर अवकाश के दिन भी किराया वसूली
निजी स्कूल बच्चों से बस में बैठे बगैर भी किराया वसूल रहे हैं। या यूं कहें कि बच्चों को अवकाश के दिन अपने घर रह कर भी बस किराया देना पड़ रहा है। महीने में कम से कम चार रविवार आते हैं। इन दिनों स्कूल बंद रहते हैं। यही स्थिति गर्मी व सर्दी की छुट्टियों में भी रहती है। इन दिनों न स्कूल की लेबर लगती है न डीजल। इस हिसाब से यदि 1265 रुपये मासिक परिवहन शुल्क को 26 दिनों में बांटे तो यह 48 रुपये 65 पैसे बनता है। यह और भी अधिक है।
रोड टैक्स का एक हजार रुपये मासिक शुल्क
आरटीए कार्यालय के एक कर्मचारी ने बताया कि सरकार ने निजी स्कूल बसों पर अक्टूबर 2017 में ही रोड टैक्स लगाया है। यह एक हजार रुपये मासिक है। जबकि इससे पहले स्कूल आरटीए कार्यालय में बच्चों को घर से स्कूल लाने जाने के लिए नि:शुल्क सेवा देने का लिखित शपथ पत्र देकर आते रहे हैं। इसके बावजूद बच्चों से किराया वसूली की जाती रही है। नए नियमों के तहत स्कूल अब विद्यार्थियों से सामान्य किराया वसूल सकते हैं। पहले यह छूट नहीं थी।
निजी स्कूल विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने में जुटे हैं। इसके लिए तय मानकों के तहत ही फीस व किराया वसूला जा रहा है। कुछ स्कूल हो सकते हैं, जिन्होंने फीस व किराया ज्यादा बढ़ाया हो। संघ से जुड़े स्कूलों में ऐसा नहीं है। सभी स्कूल संचालक नियमों के तहत काम कर रहे हैं। गलत करने वालों के खिलाफ विभाग कार्रवाई करे।
रवींद्र नांदल, प्रधान, निजी स्कूल एसोसिएशन।