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आधार कार्ड नहीं था, अभ्यर्थी ने अंदर दी परीक्षा, तब तक मां घर जाकर लाई आधार कार्ड
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रोहतक। नियम 134ए के तहत निजी स्कूल में निशुल्क प्रवेश पाने के लिए आयोजित परीक्षा के लिए गोहाना अड्डा निवासी नौवीं कक्षा की हिमाक्षी अपनी मां लतिका के साथ गांधी नगर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पहुंची। इस दौरान उन्हें पता लगा कि बेटी का आधार कार्ड नहीं है। इस पर वे परेशान हो गई, लेकिन वहां पर तैनात स्टाफ ने उनकी बेटी को प्रवेश परीक्षा देने से नहीं रोका और साथ ही उन्हें प्रवेश परीक्षा खत्म होने तक आधार कार्ड लेकर परीक्षा केंद्र पर पहुंचने की सलाह दी। सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे तक परीक्षा चली। इस दौरान उसकी मां घर जाकर उसका आधार कार्ड लेकर पहुंची। परीक्षा समाप्त होने पर केंद्र से बाहर आई हिमाक्षी का चेहरा खुला हुआ था, क्योंकि उसकी परीक्षा अच्छी हुई, उसे सभी सवालों के जवाब आते थे, वहीं दूसरी ओर लतिका ने सही समय पर अपनी बेटी का आधार कार्ड लाकर परीक्षा केंद्र पर जांच करवा ली है। लतिका ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को ही बीआरसी केंद्र पर सभी दस्तावेजों की जांच करवा ली थी, और उन्हें नहीं पता था कि प्रवेश परीक्षा के दौरान भी उन्हें किसी तरह की आईडी या दस्तावेज लेकर पहुंचना है।
परीक्षार्थी बोले- पेपर तो जमा ए आसान था
पेपर तो जमा ए आसान बना राख्या था, सारे ए तो प्रश्नां के उत्तर मनैं आवैं थे। दो घंट्या का पेपर डेढ़ घंटा मैं ए पूरा हो ग्या।
- नीतिन, सलारा मोहल्ला, नौवीं कक्षा
पेपर ठीक ए ठाक था, ना ए तो घन्ना मुश्किल था, अर ना ए घना आसान था। 60 प्रश्न आए थे, सारे हो गए, कोई भी सवाल सैलेब्स तै बाहर ना था।
- विशाल, विजय नगर, दसवीं कक्षा
मनै दो फार्म भरे थे, एक ऑफ लाइन अर एक ऑनलाइन, दोनों के रोल नंबर आ गए। तो समझ नहीं आ रहा था कौन सा रोल नंबर पर पेपर दूं, पेपर तै पहलां थोड़ा कन्फ्यूज था, लेकिन पेपर अच्छा हुआ।
- लोचन, केवलगंज, दसवीं कक्षा
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परीक्षार्थी बोले- पेपर तो जमा ए आसान था
पेपर तो जमा ए आसान बना राख्या था, सारे ए तो प्रश्नां के उत्तर मनैं आवैं थे। दो घंट्या का पेपर डेढ़ घंटा मैं ए पूरा हो ग्या।
- नीतिन, सलारा मोहल्ला, नौवीं कक्षा
पेपर ठीक ए ठाक था, ना ए तो घन्ना मुश्किल था, अर ना ए घना आसान था। 60 प्रश्न आए थे, सारे हो गए, कोई भी सवाल सैलेब्स तै बाहर ना था।
- विशाल, विजय नगर, दसवीं कक्षा
मनै दो फार्म भरे थे, एक ऑफ लाइन अर एक ऑनलाइन, दोनों के रोल नंबर आ गए। तो समझ नहीं आ रहा था कौन सा रोल नंबर पर पेपर दूं, पेपर तै पहलां थोड़ा कन्फ्यूज था, लेकिन पेपर अच्छा हुआ।
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- लोचन, केवलगंज, दसवीं कक्षा