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अंग्रेजों के समय की टंकी कहां गई,
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रेवाड़ी। शहर के वार्ड नंबर-18 में अंग्रेजों के समय पेयजल के लिए बनाई गई टंकी कैसे तोड़ी, किसने तोड़ी और कहां गई 8 माह चली सुनवाई के दौरान नप के जिम्मेदार इसका जवाब नहीं दे सके। अब हरियाणा के सूचना आयुक्त ने नप ईओ व जेई को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा कि आपके खिलाफ सूचना नहीं देने मामले में कार्रवाई क्यों न की जाए। इसके लिए आयुक्त ने 24 सितंबर 2019 तक का समय दिया है। यदि अधिकारी जवाब नहीं देते तो प्रतिदिन जुर्माना लगाने से सहित विभागीय कार्रवाई हो सकती है।
9 अक्तूबर 2018 को मोहल्ला छिप्पटवाड़ा निवासी साकेत धींगड़ा ने नगर परिषद रेवाड़ी की से उनके मौहल्ले से अंग्रेजों के समय की पानी टंकी तोडने के बारे में आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी। साकेत का कहना है कि टंकी लाखो रुपए की थी, टंकी से आधे से ज्यादा शहर को पेयजल सप्लाई होता था, लेकिन नप अधिकारियों ने मनमाने तरीके से टंकी को तुड़वा दिया। साकेत की आरटीआई को नप ईओ ने उनके ही विभाग के जेई को भेज दिया। एक माह बाद भी सूचना नहीं मिली तो सीटीएम के पास अपील की गई। यहां से जवाब नहीं मिला तो 24 दिसंबर 2018 को मामला हरियाणा सूचना आयुक्त के पास पहुंच गया। यहां पर 14 जून को हुई सुनवाई में भी नप की ओर से जवाब जमा नहीं कराया गया। ऐसे में सूचना आयुक्त ने सूचना देने में हो रही देरी के लिए नप अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया है।
टंकी तोड़कर सामुदायिक भवन निर्माण का प्रस्ताव, ईंट तक नहीं लगी
टंकी तोड़ने के बाद नप की ओर से उक्त जगह पर सामुदायिक भवन निर्माण का प्रस्ताव 20 मई 2013 को कर दिया था। लेकिन हालात ऐसे हैं कि आज तक यहां पर ईंट तक नहीं लग पाई है। आरटीआई कार्यकर्ता ने जब प्रस्ताव की कॉपी मांगी तो नप की ओर से कॉपी भी उपलब्ध नहीं कराई गई। हालात ऐसे हैं कि नप के पास तोड़ी गई टंकी की ऊंचाई व उसके व्यास तक के बारे में जानकारी नहीं है।
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गोलमाल, इसलिए नहीं जिम्मेदारों के पास जानकारी
आरटीआई कार्यकर्ता साकेत धींगड़ा का कहना है कि जिन लोगों पर टंकी तोड़ने की जिम्मेदारी थी, उनको रिकॉर्ड भी रखना था। ऐसा नहीं होने के पीछे कुछ न कुछ गोलमाल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। नप अधिकारियों की ओर से आठ माह बीत जाने के बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं करना स्वच्छता का विषय है। या फिर कुछ छुपाने की कोशिश की जा रही है।
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9 अक्तूबर 2018 को मोहल्ला छिप्पटवाड़ा निवासी साकेत धींगड़ा ने नगर परिषद रेवाड़ी की से उनके मौहल्ले से अंग्रेजों के समय की पानी टंकी तोडने के बारे में आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी। साकेत का कहना है कि टंकी लाखो रुपए की थी, टंकी से आधे से ज्यादा शहर को पेयजल सप्लाई होता था, लेकिन नप अधिकारियों ने मनमाने तरीके से टंकी को तुड़वा दिया। साकेत की आरटीआई को नप ईओ ने उनके ही विभाग के जेई को भेज दिया। एक माह बाद भी सूचना नहीं मिली तो सीटीएम के पास अपील की गई। यहां से जवाब नहीं मिला तो 24 दिसंबर 2018 को मामला हरियाणा सूचना आयुक्त के पास पहुंच गया। यहां पर 14 जून को हुई सुनवाई में भी नप की ओर से जवाब जमा नहीं कराया गया। ऐसे में सूचना आयुक्त ने सूचना देने में हो रही देरी के लिए नप अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिया है।
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टंकी तोड़कर सामुदायिक भवन निर्माण का प्रस्ताव, ईंट तक नहीं लगी
टंकी तोड़ने के बाद नप की ओर से उक्त जगह पर सामुदायिक भवन निर्माण का प्रस्ताव 20 मई 2013 को कर दिया था। लेकिन हालात ऐसे हैं कि आज तक यहां पर ईंट तक नहीं लग पाई है। आरटीआई कार्यकर्ता ने जब प्रस्ताव की कॉपी मांगी तो नप की ओर से कॉपी भी उपलब्ध नहीं कराई गई। हालात ऐसे हैं कि नप के पास तोड़ी गई टंकी की ऊंचाई व उसके व्यास तक के बारे में जानकारी नहीं है।
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गोलमाल, इसलिए नहीं जिम्मेदारों के पास जानकारी
आरटीआई कार्यकर्ता साकेत धींगड़ा का कहना है कि जिन लोगों पर टंकी तोड़ने की जिम्मेदारी थी, उनको रिकॉर्ड भी रखना था। ऐसा नहीं होने के पीछे कुछ न कुछ गोलमाल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। नप अधिकारियों की ओर से आठ माह बीत जाने के बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं करना स्वच्छता का विषय है। या फिर कुछ छुपाने की कोशिश की जा रही है।