{"_id":"5ceef22abdec22071b38b1e6","slug":"15591634812-rohtak-news88","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर निगम, पब्लिक हेल्\nथ और जनता के अमृत पर सरकारी फरमान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर निगम, पब्लिक हेल् थ और जनता के अमृत पर सरकारी फरमान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रोहतक। नगर निगम, पब्लिक हेल्थ और जनता के ‘अमृत’ पर हरियाणा सरकार ने एक और नया फरमान जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि अमृत प्रोजेक्ट तो नगर निगम के पास ही रहेगा। आगे पब्लिक हेल्थ को देखना होगा कि वह जनता को कैसे अमृत ‘पेयजल’ पहुंचाएगा। रोहतक नगर निगम को छोड़कर प्रदेश के अन्य नगर निगमों ने पब्लिक हेल्थ से इसका चार्ज भी ले लिया था। मंगलवार को एक बार फिर तय हुआ है कि प्रदेश की पेयजल व सीवर व्यवस्था को पहले की तरह पब्लिक हेल्थ विभाग ही देखेगा।
नगर निगम और पब्लिक हेल्थ के बीच अमृत प्रोजेक्ट को लेकर चल रही खींचतान में सरकार ने अपना फैसला सुना कर दोनों को शांत कर दिया है, लेकिन जनता की मुसीबत ज्यों की त्यों बनी है। पेयजल व सीवर का जिम्मा संभाल रहे पब्लिक हेल्थ को एक बार फिर जिम्मेदारी मिल गई है। अब समस्या यह हो रही है कि पिछले छह माह से किसी नये काम का बजट ही नहीं बनाया गया है, विभाग को उम्मीद थी कि नगर निगम आगे का कार्य करेगा। दोनों की खींचतान में छह माह से एक साल के बीच होने वाले कार्यों की देरी भी हो गई है। नये आदेश आने के बाद नया एस्टीमेट बनाने और अप्रूवल के लिए भेजने और बजट पास होने में समय लगेगा। इस बीच तेज गर्मी में लोगों की समस्या का समाधान करना पब्लिक हेल्थ विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। सरकार के इस फैसले का पब्लिक हेल्थ और उसके कर्मचारी अपने-अपने तरीकों से विरोध भी कर रहे थे।
सारा खेल अमृत के बजट का
सूत्रों की मानें तो शहर की पेयजल व सीवर व्यवस्था को लेकर खेला गया खेल अमृत प्रोजेक्ट के तहत आए करोड़ों के बजट का था। पब्लिक हेल्थ स्वयं चाहता था कि इसके तहत वह अपनी मर्जी से काम कराए, जबकि नगर निगम को यह प्रोजेक्ट मिल गया। इसे लेकर दोनों पक्षों के अधिकारियों की कई बार बैठकें भी हुई, लेकिन सारा मामला लटका रहा।
विज्ञापन
बोले अधिकारी
अपनी नाकामी छिपाने के लिए पब्लिक हेल्थ बहाने बाजी करता है और फालतू की बात करता है। निगम का बकाया लाखों का टैक्स देने की बजाए अन्य बातें की जाती है। इस पर निगम जल्द एक्शन लेगा। अमृत प्रोजेक्ट के तहत काम नगर निगम ही करेगा। शहर की पेयजल व सीवर व्यवस्था को पब्लिक हेल्थ ही देखेगा। इस संबंध में आदेश हो गए हैं। जिस प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है वह पब्लिक हेल्थ की सहमति से ही बना है। इसे 2020 तक पूरा कर पब्लिक हेल्थ को दे दिया जाएगा। पब्लिक हेल्थ अपनी अर्बन शाखा अलग होने पर खुश नहीं था, क्योंकि उनके पास सिर्फ ग्रामीण एरिया बच रहा था।
- राम स्वरूप, निगम आयुक्त
संदेश मिल गया है कि अमृत प्रोजेक्ट का काम नगर निगम कराएगा और पेयजल व सीवर की जिम्मेदारी पहले की तरह पब्लिक हेल्थ की ही होगी। अब मुख्य समस्या यह है कि नगर निगम अपने प्रोजेक्ट में पब्लिक हेल्थ की सलाह नहीं लेगा, इससे पेयजल लाइन व सीवर लाइन कहां मिलानी है स्पष्ट नहीं होगा। इसमें निगम यदि पब्लिक हेल्थ को साथ लेकर चलता तो अच्छा होता। जनता हमें अपनी शिकायत बताती है, काम भी पब्लिक हेल्थ को कराना होता है। अब नये सिरे से फंड की डिमांड भेजी जाएगी। तब तक जैसे अब तक काम चला रहे थे, वैसे आगे भी चलाएंगे।
- भानू प्रताप, कार्यकारी अभियंता, पब्लिक हेल्थ
पब्लिक हेल्थ के कर्मचारियों को नगर निगम में शामिल होने पर आपत्ति थी। क्योंकि निगम पहले ही अपने सफाई कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दे पाता। पब्लिक हेल्थ के कर्मचारी स्थाई हैं और उनका वेतन सीधा सरकार से आता है। अमृत प्रोजेक्ट को लेकर चली खींचतान का खामियाजा जल्द देखने को मिलेगा। इन गर्मियों में पेयजल को लेकर स्थिति अनियंत्रित हो सकती है। नगर निगम के पास उपभोक्ता शिकायत नहीं करते तो वह काम क्या कराएंगे, जवाब पब्लिक हेल्थ को ही देना होगा। विभाग की स्थिति यह है कि तीन डिवीजन में एक कार्यकारी अभियंता और एक ही एसडीओ है। ऐसे में समस्या का अंत कैसे हो सकता है।
- मेहर सिंह नैन, चेयरमैन, हरियाणा संयुक्त कर्मचारी संघ व पब्लिक हेल्थ लिपिक एसोसिएशन
संयुक्त रूप से काम न करना बना समस्या
पब्लिक हेल्थ के एक पूर्व अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अमृत प्रोजेक्ट पर यदि पब्लिक हेल्थ काम कर रहा होता तो अब तक काम समाप्त हो गया होता। पब्लिक हेल्थ और नगर निगम के बीच सहयोग न होने से यह काम लटक गया है। पिछले छह माह से पब्लिक हेल्थ भी शांत था कि नगर निगम काम संभालेगा और आगे कार्य करेगा। विभाग पहले ही टैंकर का 15 से 20 लाख रुपये व जल घर से सिल्ट सफाई का एस्टीमेट काट चुका है। ऐसे में काम पहले से ही लेट है। इसके बाद टैंकर का एस्टीमेट काटने से टेल एंड एरिया में पानी पहुंचाना मुसीबत हो जाएगा और जल घर के टैंक से सिल्ट साफ न होने पर पेयजल स्टोर करने की क्षमता में भी कमी आएगी।
विज्ञापन
नगर निगम और पब्लिक हेल्थ के बीच अमृत प्रोजेक्ट को लेकर चल रही खींचतान में सरकार ने अपना फैसला सुना कर दोनों को शांत कर दिया है, लेकिन जनता की मुसीबत ज्यों की त्यों बनी है। पेयजल व सीवर का जिम्मा संभाल रहे पब्लिक हेल्थ को एक बार फिर जिम्मेदारी मिल गई है। अब समस्या यह हो रही है कि पिछले छह माह से किसी नये काम का बजट ही नहीं बनाया गया है, विभाग को उम्मीद थी कि नगर निगम आगे का कार्य करेगा। दोनों की खींचतान में छह माह से एक साल के बीच होने वाले कार्यों की देरी भी हो गई है। नये आदेश आने के बाद नया एस्टीमेट बनाने और अप्रूवल के लिए भेजने और बजट पास होने में समय लगेगा। इस बीच तेज गर्मी में लोगों की समस्या का समाधान करना पब्लिक हेल्थ विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। सरकार के इस फैसले का पब्लिक हेल्थ और उसके कर्मचारी अपने-अपने तरीकों से विरोध भी कर रहे थे।
विज्ञापन
सारा खेल अमृत के बजट का
सूत्रों की मानें तो शहर की पेयजल व सीवर व्यवस्था को लेकर खेला गया खेल अमृत प्रोजेक्ट के तहत आए करोड़ों के बजट का था। पब्लिक हेल्थ स्वयं चाहता था कि इसके तहत वह अपनी मर्जी से काम कराए, जबकि नगर निगम को यह प्रोजेक्ट मिल गया। इसे लेकर दोनों पक्षों के अधिकारियों की कई बार बैठकें भी हुई, लेकिन सारा मामला लटका रहा।
विज्ञापन
बोले अधिकारी
अपनी नाकामी छिपाने के लिए पब्लिक हेल्थ बहाने बाजी करता है और फालतू की बात करता है। निगम का बकाया लाखों का टैक्स देने की बजाए अन्य बातें की जाती है। इस पर निगम जल्द एक्शन लेगा। अमृत प्रोजेक्ट के तहत काम नगर निगम ही करेगा। शहर की पेयजल व सीवर व्यवस्था को पब्लिक हेल्थ ही देखेगा। इस संबंध में आदेश हो गए हैं। जिस प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है वह पब्लिक हेल्थ की सहमति से ही बना है। इसे 2020 तक पूरा कर पब्लिक हेल्थ को दे दिया जाएगा। पब्लिक हेल्थ अपनी अर्बन शाखा अलग होने पर खुश नहीं था, क्योंकि उनके पास सिर्फ ग्रामीण एरिया बच रहा था।
- राम स्वरूप, निगम आयुक्त
संदेश मिल गया है कि अमृत प्रोजेक्ट का काम नगर निगम कराएगा और पेयजल व सीवर की जिम्मेदारी पहले की तरह पब्लिक हेल्थ की ही होगी। अब मुख्य समस्या यह है कि नगर निगम अपने प्रोजेक्ट में पब्लिक हेल्थ की सलाह नहीं लेगा, इससे पेयजल लाइन व सीवर लाइन कहां मिलानी है स्पष्ट नहीं होगा। इसमें निगम यदि पब्लिक हेल्थ को साथ लेकर चलता तो अच्छा होता। जनता हमें अपनी शिकायत बताती है, काम भी पब्लिक हेल्थ को कराना होता है। अब नये सिरे से फंड की डिमांड भेजी जाएगी। तब तक जैसे अब तक काम चला रहे थे, वैसे आगे भी चलाएंगे।
- भानू प्रताप, कार्यकारी अभियंता, पब्लिक हेल्थ
पब्लिक हेल्थ के कर्मचारियों को नगर निगम में शामिल होने पर आपत्ति थी। क्योंकि निगम पहले ही अपने सफाई कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दे पाता। पब्लिक हेल्थ के कर्मचारी स्थाई हैं और उनका वेतन सीधा सरकार से आता है। अमृत प्रोजेक्ट को लेकर चली खींचतान का खामियाजा जल्द देखने को मिलेगा। इन गर्मियों में पेयजल को लेकर स्थिति अनियंत्रित हो सकती है। नगर निगम के पास उपभोक्ता शिकायत नहीं करते तो वह काम क्या कराएंगे, जवाब पब्लिक हेल्थ को ही देना होगा। विभाग की स्थिति यह है कि तीन डिवीजन में एक कार्यकारी अभियंता और एक ही एसडीओ है। ऐसे में समस्या का अंत कैसे हो सकता है।
- मेहर सिंह नैन, चेयरमैन, हरियाणा संयुक्त कर्मचारी संघ व पब्लिक हेल्थ लिपिक एसोसिएशन
संयुक्त रूप से काम न करना बना समस्या
पब्लिक हेल्थ के एक पूर्व अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अमृत प्रोजेक्ट पर यदि पब्लिक हेल्थ काम कर रहा होता तो अब तक काम समाप्त हो गया होता। पब्लिक हेल्थ और नगर निगम के बीच सहयोग न होने से यह काम लटक गया है। पिछले छह माह से पब्लिक हेल्थ भी शांत था कि नगर निगम काम संभालेगा और आगे कार्य करेगा। विभाग पहले ही टैंकर का 15 से 20 लाख रुपये व जल घर से सिल्ट सफाई का एस्टीमेट काट चुका है। ऐसे में काम पहले से ही लेट है। इसके बाद टैंकर का एस्टीमेट काटने से टेल एंड एरिया में पानी पहुंचाना मुसीबत हो जाएगा और जल घर के टैंक से सिल्ट साफ न होने पर पेयजल स्टोर करने की क्षमता में भी कमी आएगी।