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पीजीआई की ओपीडी से बगैर दवा लिए लौट रहे मरीज
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रोहतक। प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र पीजीआईएमएस के नाम बड़े व दर्शन छोटे हैं। यहां डॉक्टर से परामर्श के बाद दवा लेने के लिए मरीजों को दो से तीन घंटे कतार में रहना पड़ता है। इस पर भी दवा मिल जाए, यह गारंटी नहीं है। संस्थान के औषधालयों पर दोपहर एक से दो बजे ही ताले लग रहे हैं। ऐसे में मरीजों को घंटों कतार में रहने के बाद भी बगैर दवा लिए ही घर लौटना पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि यहां दवा नहीं है। दवा है। वह भी पर्याप्त मात्रा में। इसके बावजूद मरीज आहत हैं। इस परेशानी की वजह काम को आसान बनाने वाली आधुनिक तकनीक बताई जा रही है। यह हम नहीं ओपीडी की व्यवस्था व यहां राहत की आस में आए मरीज कह रहे हैं। जबकि शासन व प्रशासन इस ओर से निश्चिंत हैं।
दरअसल, संस्थान में औषधालयों के काउंटरों पर कम्प्यूटर सिस्टम लगाए गए हैं। इन्हें काम काम आसान व बेहतर बनाने के उद्देश्य से लगाया गया है। कम्प्यूटर सिस्टम लगाए भी दो महीने से ज्यादा समय हो चुका है। बीच में कुछ समय कंप्यूटर बंद भी रहे। अब इन पर काम शुरू हुआ है। इसके साथ ही मरीजों की परेशानी भी शुरू हो गई है। यहां कंप्यूटर पर मरीज के ओपीडी कार्ड से उसका नाम स्कैन करना, स्कैन नहीं होने पर हाथ से रिकार्ड दर्ज करना, दवा सर्च करना, उसकी संख्या दर्ज कर ब्यौरा सेवा करना होता है। इस काम में पांच से सात मिनट का समय लगता है। ऐसे में औषधालय के काउंटर पर दवा लेने के लिए आने वाले मरीजों को कतार में लगना पड़ रहा है। यह कतार इतनी बड़ी हो जाती है कि मरीजों को दवा के लिए दो से तीन घंटे इंतजार करना पड़ता है। इस पर भी अनेक मरीज बगैर दवा रह जाते हैं। औषधालय के कर्मचारियों का ड्यूटी समय पूरा होने से पहले ही यहां दवा वितरण बंद हो जाता है।
मरीजों की दवा नहीं मिलने की शिकायत के बाद मंगलवार को अमर उजाला टीम सच जानने ओपीडी पहुंची। यहां 75 नंबर औषधालय पर दोपहर एक बजे ही दवा वितरण बंद मिला। बाहर मरीज दवा को लेकर शोर मचा रहे थे। इन्हें फार्मासिस्ट ने कल आने की सलाह देकर वापस भेज दिया। इसके सामने 50 नंबर पर दोपहर तीन बजे के बाद भी महिलाएं हाथ में ओपीडी कार्ड लिए दवा की गुहार लगाती रही। जबकि यहां तैनात कर्मचारियों ने उन्हें समय पूरा होने की बात कहते हुए दवा देने से इनकार कर दिया। दवा नहीं मिलने से नाराज दो महिलाएं तो औषधालय में ही पहुंच गया। यहां कर्मचारियों से उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई। इसके बावजूद उन्हें दवा नहीं मिली। ओपीडी के प्रवेश द्वार के साथ बने मुख्य औषधालय में भी तीन बजे से पहले ही कर्मचारी चलते बने। यहां कम्प्यूटर सिस्टम लॉक कर दवाएं अलमारी में रखी और सभी चले गए।
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दवा नहीं मिलने पर महिलाओं ने व्यवस्था को कोसा
ओपीडी में दवा नहीं मिलने पर महिलाओं ने संस्थान की व्यवस्था को जमकर कोसा। कर्मचारियों को भलाबुरा भी कहा। कुछ महिलाएं शोर मचाते हुए औषाधलय में घुस गई। बाद में वे अपने घरों को रवाना हो गई।
ओपीडी कार्ड के बाद औषधालयों में लगे कंप्यूटर
पीजीआई प्रशासन ने व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से पहले रिसेप्शन पर ओपीडी कार्ड बनाने के लिए कम्प्यूटर लगाए थे। अब औषधालयों पर भी कम्प्यूटर लगाए जा रहे हैं। इससे संस्थान को स्टोर में मौजूद दवाओं का पूरा ब्यौरा अपडेट रहेगा। ऐसे में खत्म होने वाली दवाओं को समय पर मंगवाने की व्यवस्था की जा सकेगी।
एक मरीज को दवा देने लग रहे 5 से 7 मिनट
पीजीआई प्रशासन की सुविधा मरीजों की आफत बन गई है। औषधालयों पर कंप्यूटर में रिकार्ड दर्ज करने के चलते एक मरीज को दवा देने में करीब पांच से सात मिनट का समय लग रहा है। जबकि पहले रजिस्ट्रार में हाथ से रिकार्ड दर्ज करने में मुश्किल से एक से दो मिनट लगते रहे हैं। यही नहीं कम्प्यूटर के साथ रजिस्टर में भी फार्मासिस्टों को रिकार्ड दर्ज करना पड़ रहा है।
फार्मासिस्ट 40 डाटा एंट्री आपरेटर सिर्फ एक
फार्मासिस्टों ने बताया कि संस्थान व ठेकेदार के बीच हुए टेंडर में पांच कम्प्यूटरों पर एक डाटा एंट्री आपरेटर भी दिया जाना तय हुआ है। जबकि ऐसा नहीं है। यहां 40 फार्मासिस्टों का रिकार्ड रखने के लिए एक ही डाटा एंट्री आपरेटर है। हमें ही दवा देने के साथ मरीज का रिकार्ड कम्प्यूटर में दर्ज करना पड़ रहा है।
मरीज बोले :
केस 1 :
कमर व घुटने में दर्द है। इलाज के लिए सुबह दस बजे पीजीआई पहुंचा। पहले कार्ड बनवाने फिर डॉक्टर के कमरे के बाहर बारी का इंतजार करना पड़ा। दवा लेने 75 नंबर खिड़की पर आया तो कर्मचारी ने मना कर दिया। खिड़की दो बजे से पहले ही बंद कर दी गई।
बाबूलाल, न्यू विजय नगर।
केस 2 :
हार्ट अटैक आया था। इसके बाद से दवा चल रही है। मंगलवार सुबह दस बजे पीजीआई था। धक्के खाकर बड़ी मुश्किल से डॉक्टर को दिखाया। दवा लेने खिड़की पर पहुंचा तो कोई नहीं मिला। अब दवा बाजार से महंगे दाम पर खरीदनी पड़ेगी।
गोपीराम, खैराना।
केस 3 :
कारपेंटर का काम करता हूं। काम करते समय मशीन में हाथ आ गया था। डॉक्टर को कई टांके लगाने पड़े। मंगलवार सुबह सात बजे यहां आया था। टांके कटवाने व एक्सरे के बाद दवा लेने पहुंचा तो कर्मचारी ने खिड़की बंद बताते हुए कल आने को कहा।
फारुख, गोहाना रोड।
केस 4 :
पैर में कांच लग गया था। घाव ज्यादा था। यहां डॉक्टर को दिखाया तो दवा लिख दी। पहले पर्ची बनवाने फिर डॉक्टर को दिखाने में ही 11 बज गए। दवा लेने के लिए तीन बजे तक लाइन में खड़ा रहा। अब कह रहे हैं टाइम हो गया, कल आना।
रामजीवन, महम।
केस 5 :
कमर व पेट में दर्द है। सुबह आठ बजे इलाज के लिए पीजीआई पहुंची। यहां खून की जांच के बाद डॉक्टर को दिखाया। यहां से दूसरे डॉक्टर के पास भेज दिया। दो घंटे लाइन में खड़ी रही अब दवा नहीं दे रहे हैं। सुबह घर से भूखी चली थी। घर से लाई थोड़ी खिचड़ी खाकर काम चलाया। दवा तो मिली नहीं किराया और लग गया।
इंद्रावती, गांधरा।
संस्थान में दवा पर्याप्त मात्रा में है। सभी मरीजों को दवा दी जा रही है। कोई बगैर दवा के नहीं जा रहा है। कंप्यूटर सिस्टम लग रहे हैं। इससे काम बेहतर हुआ है। किसी को परेशानी नहीं आने दी जा रही है।
इंदू प्रभा, चीफ फार्मासिस्ट, पीजीआईएमएस।
व्यवस्था एक नजर में
- 1200 मरीज रोज आ रहे 75 नंबर खिड़की पर।
- 1000 मरीज मुख्य औषधालय पर आ रहे रोज।
- 800 मरीज 50 नंबर औषधालय पर आ रहे रोज।
- 75 नंबर औषधालय में तीन कम्प्यूटर व छह फार्मासिस्ट।
- 50 नंबर औषधालय में चार कम्प्यूटर व चार फार्मासिस्ट।
- मुख्य औषधालय में पांच कम्प्यूटर व चार फार्मासिस्ट हैं।
- 3 ही नियमित फार्मासिस्ट पीजीआई की ओपीडी में हैं।
- 7 फार्मासिस्टों की पीजीआई की ओपीडी में जरूरत है।
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दरअसल, संस्थान में औषधालयों के काउंटरों पर कम्प्यूटर सिस्टम लगाए गए हैं। इन्हें काम काम आसान व बेहतर बनाने के उद्देश्य से लगाया गया है। कम्प्यूटर सिस्टम लगाए भी दो महीने से ज्यादा समय हो चुका है। बीच में कुछ समय कंप्यूटर बंद भी रहे। अब इन पर काम शुरू हुआ है। इसके साथ ही मरीजों की परेशानी भी शुरू हो गई है। यहां कंप्यूटर पर मरीज के ओपीडी कार्ड से उसका नाम स्कैन करना, स्कैन नहीं होने पर हाथ से रिकार्ड दर्ज करना, दवा सर्च करना, उसकी संख्या दर्ज कर ब्यौरा सेवा करना होता है। इस काम में पांच से सात मिनट का समय लगता है। ऐसे में औषधालय के काउंटर पर दवा लेने के लिए आने वाले मरीजों को कतार में लगना पड़ रहा है। यह कतार इतनी बड़ी हो जाती है कि मरीजों को दवा के लिए दो से तीन घंटे इंतजार करना पड़ता है। इस पर भी अनेक मरीज बगैर दवा रह जाते हैं। औषधालय के कर्मचारियों का ड्यूटी समय पूरा होने से पहले ही यहां दवा वितरण बंद हो जाता है।
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मरीजों की दवा नहीं मिलने की शिकायत के बाद मंगलवार को अमर उजाला टीम सच जानने ओपीडी पहुंची। यहां 75 नंबर औषधालय पर दोपहर एक बजे ही दवा वितरण बंद मिला। बाहर मरीज दवा को लेकर शोर मचा रहे थे। इन्हें फार्मासिस्ट ने कल आने की सलाह देकर वापस भेज दिया। इसके सामने 50 नंबर पर दोपहर तीन बजे के बाद भी महिलाएं हाथ में ओपीडी कार्ड लिए दवा की गुहार लगाती रही। जबकि यहां तैनात कर्मचारियों ने उन्हें समय पूरा होने की बात कहते हुए दवा देने से इनकार कर दिया। दवा नहीं मिलने से नाराज दो महिलाएं तो औषधालय में ही पहुंच गया। यहां कर्मचारियों से उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई। इसके बावजूद उन्हें दवा नहीं मिली। ओपीडी के प्रवेश द्वार के साथ बने मुख्य औषधालय में भी तीन बजे से पहले ही कर्मचारी चलते बने। यहां कम्प्यूटर सिस्टम लॉक कर दवाएं अलमारी में रखी और सभी चले गए।
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दवा नहीं मिलने पर महिलाओं ने व्यवस्था को कोसा
ओपीडी में दवा नहीं मिलने पर महिलाओं ने संस्थान की व्यवस्था को जमकर कोसा। कर्मचारियों को भलाबुरा भी कहा। कुछ महिलाएं शोर मचाते हुए औषाधलय में घुस गई। बाद में वे अपने घरों को रवाना हो गई।
ओपीडी कार्ड के बाद औषधालयों में लगे कंप्यूटर
पीजीआई प्रशासन ने व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से पहले रिसेप्शन पर ओपीडी कार्ड बनाने के लिए कम्प्यूटर लगाए थे। अब औषधालयों पर भी कम्प्यूटर लगाए जा रहे हैं। इससे संस्थान को स्टोर में मौजूद दवाओं का पूरा ब्यौरा अपडेट रहेगा। ऐसे में खत्म होने वाली दवाओं को समय पर मंगवाने की व्यवस्था की जा सकेगी।
एक मरीज को दवा देने लग रहे 5 से 7 मिनट
पीजीआई प्रशासन की सुविधा मरीजों की आफत बन गई है। औषधालयों पर कंप्यूटर में रिकार्ड दर्ज करने के चलते एक मरीज को दवा देने में करीब पांच से सात मिनट का समय लग रहा है। जबकि पहले रजिस्ट्रार में हाथ से रिकार्ड दर्ज करने में मुश्किल से एक से दो मिनट लगते रहे हैं। यही नहीं कम्प्यूटर के साथ रजिस्टर में भी फार्मासिस्टों को रिकार्ड दर्ज करना पड़ रहा है।
फार्मासिस्ट 40 डाटा एंट्री आपरेटर सिर्फ एक
फार्मासिस्टों ने बताया कि संस्थान व ठेकेदार के बीच हुए टेंडर में पांच कम्प्यूटरों पर एक डाटा एंट्री आपरेटर भी दिया जाना तय हुआ है। जबकि ऐसा नहीं है। यहां 40 फार्मासिस्टों का रिकार्ड रखने के लिए एक ही डाटा एंट्री आपरेटर है। हमें ही दवा देने के साथ मरीज का रिकार्ड कम्प्यूटर में दर्ज करना पड़ रहा है।
मरीज बोले :
केस 1 :
कमर व घुटने में दर्द है। इलाज के लिए सुबह दस बजे पीजीआई पहुंचा। पहले कार्ड बनवाने फिर डॉक्टर के कमरे के बाहर बारी का इंतजार करना पड़ा। दवा लेने 75 नंबर खिड़की पर आया तो कर्मचारी ने मना कर दिया। खिड़की दो बजे से पहले ही बंद कर दी गई।
बाबूलाल, न्यू विजय नगर।
केस 2 :
हार्ट अटैक आया था। इसके बाद से दवा चल रही है। मंगलवार सुबह दस बजे पीजीआई था। धक्के खाकर बड़ी मुश्किल से डॉक्टर को दिखाया। दवा लेने खिड़की पर पहुंचा तो कोई नहीं मिला। अब दवा बाजार से महंगे दाम पर खरीदनी पड़ेगी।
गोपीराम, खैराना।
केस 3 :
कारपेंटर का काम करता हूं। काम करते समय मशीन में हाथ आ गया था। डॉक्टर को कई टांके लगाने पड़े। मंगलवार सुबह सात बजे यहां आया था। टांके कटवाने व एक्सरे के बाद दवा लेने पहुंचा तो कर्मचारी ने खिड़की बंद बताते हुए कल आने को कहा।
फारुख, गोहाना रोड।
केस 4 :
पैर में कांच लग गया था। घाव ज्यादा था। यहां डॉक्टर को दिखाया तो दवा लिख दी। पहले पर्ची बनवाने फिर डॉक्टर को दिखाने में ही 11 बज गए। दवा लेने के लिए तीन बजे तक लाइन में खड़ा रहा। अब कह रहे हैं टाइम हो गया, कल आना।
रामजीवन, महम।
केस 5 :
कमर व पेट में दर्द है। सुबह आठ बजे इलाज के लिए पीजीआई पहुंची। यहां खून की जांच के बाद डॉक्टर को दिखाया। यहां से दूसरे डॉक्टर के पास भेज दिया। दो घंटे लाइन में खड़ी रही अब दवा नहीं दे रहे हैं। सुबह घर से भूखी चली थी। घर से लाई थोड़ी खिचड़ी खाकर काम चलाया। दवा तो मिली नहीं किराया और लग गया।
इंद्रावती, गांधरा।
संस्थान में दवा पर्याप्त मात्रा में है। सभी मरीजों को दवा दी जा रही है। कोई बगैर दवा के नहीं जा रहा है। कंप्यूटर सिस्टम लग रहे हैं। इससे काम बेहतर हुआ है। किसी को परेशानी नहीं आने दी जा रही है।
इंदू प्रभा, चीफ फार्मासिस्ट, पीजीआईएमएस।
व्यवस्था एक नजर में
- 1200 मरीज रोज आ रहे 75 नंबर खिड़की पर।
- 1000 मरीज मुख्य औषधालय पर आ रहे रोज।
- 800 मरीज 50 नंबर औषधालय पर आ रहे रोज।
- 75 नंबर औषधालय में तीन कम्प्यूटर व छह फार्मासिस्ट।
- 50 नंबर औषधालय में चार कम्प्यूटर व चार फार्मासिस्ट।
- मुख्य औषधालय में पांच कम्प्यूटर व चार फार्मासिस्ट हैं।
- 3 ही नियमित फार्मासिस्ट पीजीआई की ओपीडी में हैं।
- 7 फार्मासिस्टों की पीजीआई की ओपीडी में जरूरत है।