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दिनभर चला सांसद सैनी व यशपाल मलिक के बीच शह व मात का खेल
Updated Tue, 12 Jun 2018 02:48 AM IST
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सैनी समर्थकों और मलिक गुट के बीच शह-मात के खेल में दोनों मान रहे जीत, ग्रामीण बोले भाईचारे की हार
: जाट आरक्षण संघर्ष समिति के दबाव में रद्द हुआ सैनी का कार्यक्रम : अशोक बल्हारा
: मोखरा के नजदीक पहुंच कर सांसद ने दिखाई दिलेरी : तेजबीर सैन
: दिनभर फूली रही पुलिस व प्रशासन की सासें, डीसी रखे हुए थे कड़ी नजर
: अधिकारियों ने सांसद को मनाया, बोले आयोजकों से मिलकर जाऊंगा
विजेंद्र कौशिक।
रोहतक। मोखरा गांव में सांसद सैनी की जनसभा को सोमवार को पूरा दिन सांसद सैनी समर्थकों और जाट नेता यशपाल मलिक गुट के बीच शह और मात का खेल चलता रहा। जसिया में जाट नेता अशोक बल्हारा ने कहा कि जाट समाज की एकता के चलते ही मोखरा में सांसद सैनी का कार्यक्रम नहीं सका। वहीं, लोकतंत्र मंच के प्रदेश प्रवक्ता तेजबीर सैन ने कहा कि सांसद सैनी दिलेर हैं और मोखरा गांव की सीमा तक पहुंच कर आयोजकों से मिलकर गए। इसके लिए सांसद सैनी ने सरेआम आयोजकों की पीठ थपथपाई।
महम हलके में मोखरा सबसे बड़ा गांव है, जिसकी विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका रहती है। चौबीसी के अंदर कहावत है कि जिस तरफ मोखरा झुक गया, उस नेता का बेड़ा पार हो गया। क्योंकि मोखरा में चार पंचायत हैं, जिसमें मोखरा खास, मोखरा रोज, मोखरा छाज्जान व मोखरा खेड़ी शामिल हैं। खेड़ी में जहां राजपूत, ब्राह्मण व दूसरे समुदाय के लोग ज्यादा हैं, जबकि तीन अन्य पंचायतों में जाट समुदाय की संख्या ज्यादा है। मोखरा गांव की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सांसद सैनी को पहले भी समर्थकों ने बुलाने का प्रयास किया था, लेकिन विरोध के चलते प्रोग्राम रद्द हो गया था। अबकी बार फिर सांसद को गांव निवासी मानसिंह राजपूत ने साथी निंदाना निवासी श्रीभगवान व धर्मबीर डाबला के साथ मिलकर गांव में बुलाया। सांसद के गांव में आने का यशपाल मलिक गुट विरोध कर रहा था।
डीसी ने दिखाई सूझबूझ, दोपहर खोला अनुमति न देने का पत्ता
मोखरा के मामले को निपटने के लिए जिला प्रशासन ने योजना के तहत काम किया। पूरे हालात पर नजर रखी। रविवार शाम को जब जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता अशोक बल्हारा ने साफ किया था कि समिति की 12 जून को जसिया में होने वाली मीटिंग, अब 11 जून को होगी। वह जसिया की बजाए मोखरा में भी हो सकती है। इससे प्रशासन की चिंता की लकीरें बढ़ गई, क्योंकि सांसद सैनी को भी सोमवार दोपहर बाद मोखरा पहुंचना था।
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...जब अड़ गए सांसद, आयोजकों से मिलकर ही जाऊंगा
दोपहर बाद करीब दो बजे सांसद सैनी के रोहद बाईपास पर पहुंचने की सूचना मिली। सांपला पुलिस व प्रशासन के अधिकारी टोल पर पहुंच गए और सांसद को मोखरा में न जाने की सलाह दी। बताया कि डीसी ने उनके गांव में जाने की अनुमति नहीं दी है। सांसद से सांपला के रेस्ट हाउस में बातचीत की गई। सांसद आयोजकों से मिलने की बात पर अड़ गए। कहा, चाय के प्रोग्राम के लिए क्या अनुमति अनिवार्य है। कोई रैली नहीं कर रहे हैं। उधर, तब तक पुलिस आयोजकों को थाने में ले जा चुकी थी। अधिकारियों ने चंडीगढ़ बात की। तय हुआ कि सांसद को कलानौर जाने दिया जाए।
सांसद ने थपथपाई मानसिंह की पीठ
सत जिंदा कॉलेज के रास्ते जब सांसद व उनके समर्थक मोखरा की तरफ कूच कर गए। आगे पुलिस ने नाका लगाकर रोक लिया। सांसद व समर्थक सड़क पर बैठ गए। मांग रखी कि आयोजकों से मिलवाया जाए। तब पुलिस तीनों आयोजकों मानसिंह, श्रीभगवान व धर्मबीर को सांसद के पास लेकर पहुंची। सांसद राजकुमार सैनी ने जमकर मानसिंह राजपूत की पीठ थपथपाई।
मोखरा में हुई भाईचारे की हार
पूरे घटनाक्रम के बाद खुफिया विभाग ने रिपोर्ट तैयार की है कि दिनभर के घटनाक्रम से मोखरा गांव में भाईचारे बिगड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत मानकर चल रहे हैं। इसके चलते पुलिस ने मोखरा में पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी है।
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: जाट आरक्षण संघर्ष समिति के दबाव में रद्द हुआ सैनी का कार्यक्रम : अशोक बल्हारा
: मोखरा के नजदीक पहुंच कर सांसद ने दिखाई दिलेरी : तेजबीर सैन
: दिनभर फूली रही पुलिस व प्रशासन की सासें, डीसी रखे हुए थे कड़ी नजर
: अधिकारियों ने सांसद को मनाया, बोले आयोजकों से मिलकर जाऊंगा
विजेंद्र कौशिक।
रोहतक। मोखरा गांव में सांसद सैनी की जनसभा को सोमवार को पूरा दिन सांसद सैनी समर्थकों और जाट नेता यशपाल मलिक गुट के बीच शह और मात का खेल चलता रहा। जसिया में जाट नेता अशोक बल्हारा ने कहा कि जाट समाज की एकता के चलते ही मोखरा में सांसद सैनी का कार्यक्रम नहीं सका। वहीं, लोकतंत्र मंच के प्रदेश प्रवक्ता तेजबीर सैन ने कहा कि सांसद सैनी दिलेर हैं और मोखरा गांव की सीमा तक पहुंच कर आयोजकों से मिलकर गए। इसके लिए सांसद सैनी ने सरेआम आयोजकों की पीठ थपथपाई।
महम हलके में मोखरा सबसे बड़ा गांव है, जिसकी विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका रहती है। चौबीसी के अंदर कहावत है कि जिस तरफ मोखरा झुक गया, उस नेता का बेड़ा पार हो गया। क्योंकि मोखरा में चार पंचायत हैं, जिसमें मोखरा खास, मोखरा रोज, मोखरा छाज्जान व मोखरा खेड़ी शामिल हैं। खेड़ी में जहां राजपूत, ब्राह्मण व दूसरे समुदाय के लोग ज्यादा हैं, जबकि तीन अन्य पंचायतों में जाट समुदाय की संख्या ज्यादा है। मोखरा गांव की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सांसद सैनी को पहले भी समर्थकों ने बुलाने का प्रयास किया था, लेकिन विरोध के चलते प्रोग्राम रद्द हो गया था। अबकी बार फिर सांसद को गांव निवासी मानसिंह राजपूत ने साथी निंदाना निवासी श्रीभगवान व धर्मबीर डाबला के साथ मिलकर गांव में बुलाया। सांसद के गांव में आने का यशपाल मलिक गुट विरोध कर रहा था।
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डीसी ने दिखाई सूझबूझ, दोपहर खोला अनुमति न देने का पत्ता
मोखरा के मामले को निपटने के लिए जिला प्रशासन ने योजना के तहत काम किया। पूरे हालात पर नजर रखी। रविवार शाम को जब जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेता अशोक बल्हारा ने साफ किया था कि समिति की 12 जून को जसिया में होने वाली मीटिंग, अब 11 जून को होगी। वह जसिया की बजाए मोखरा में भी हो सकती है। इससे प्रशासन की चिंता की लकीरें बढ़ गई, क्योंकि सांसद सैनी को भी सोमवार दोपहर बाद मोखरा पहुंचना था।
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...जब अड़ गए सांसद, आयोजकों से मिलकर ही जाऊंगा
दोपहर बाद करीब दो बजे सांसद सैनी के रोहद बाईपास पर पहुंचने की सूचना मिली। सांपला पुलिस व प्रशासन के अधिकारी टोल पर पहुंच गए और सांसद को मोखरा में न जाने की सलाह दी। बताया कि डीसी ने उनके गांव में जाने की अनुमति नहीं दी है। सांसद से सांपला के रेस्ट हाउस में बातचीत की गई। सांसद आयोजकों से मिलने की बात पर अड़ गए। कहा, चाय के प्रोग्राम के लिए क्या अनुमति अनिवार्य है। कोई रैली नहीं कर रहे हैं। उधर, तब तक पुलिस आयोजकों को थाने में ले जा चुकी थी। अधिकारियों ने चंडीगढ़ बात की। तय हुआ कि सांसद को कलानौर जाने दिया जाए।
सांसद ने थपथपाई मानसिंह की पीठ
सत जिंदा कॉलेज के रास्ते जब सांसद व उनके समर्थक मोखरा की तरफ कूच कर गए। आगे पुलिस ने नाका लगाकर रोक लिया। सांसद व समर्थक सड़क पर बैठ गए। मांग रखी कि आयोजकों से मिलवाया जाए। तब पुलिस तीनों आयोजकों मानसिंह, श्रीभगवान व धर्मबीर को सांसद के पास लेकर पहुंची। सांसद राजकुमार सैनी ने जमकर मानसिंह राजपूत की पीठ थपथपाई।
मोखरा में हुई भाईचारे की हार
पूरे घटनाक्रम के बाद खुफिया विभाग ने रिपोर्ट तैयार की है कि दिनभर के घटनाक्रम से मोखरा गांव में भाईचारे बिगड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत मानकर चल रहे हैं। इसके चलते पुलिस ने मोखरा में पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी है।