फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   पास फेल प्रणाली लागू करवाने के लिए संसद मार्च 21 को

पास फेल प्रणाली लागू करवाने के लिए संसद मार्च 21 को

Thu, 21 Dec 2017 03:01 AM IST
Updated Thu, 21 Dec 2017 03:01 AM IST
विज्ञापन
पास फेल प्रणाली लागू करवाने के लिए संसद मार्च 21 को
पास-फेल प्रणाली खत्म करने से भारी नुकसान, गुणवत्ता में आई गिरावट
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
आल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन के छात्र नेता हरीश कुमार ने कहा है कि 21 दिसंबर को पास-फेल प्रणाली को पहली कक्षा से लागू करवाने के लिए अखिल भारतीय संसद मार्च किया जाएगा। 2009 में ‘शिक्षा का अधिकार’ कानून के तहत 8वीं कक्षा तक पास-फेल प्रणाली खत्म करने से छात्रों का भारी नुकसान हुआ है। इसने एक पीढ़ी को पूरी तरह से अपंग बना दिया है, इससे शिक्षा की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है।

उन्होंने बताया कि ‘संसदीय स्थाई कमेटी’ ने भी अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि पांचवीं कक्षा के 53.3 फीसदी छात्र दूसरी कक्षा की पुस्तकें तक नहीं पढ़ सकते, 46.6 फीसदी छात्र दो अंकों की सामान्य जोड़-घटा भी नहीं कर सकते। 8वीं कक्षा के अधिकतर छात्र हिंदी की एक लाईन भी ठीक से नहीं लिख पाते हैं। परिणाम स्वरूप छात्र फेल हो जाते हैं। ‘बेरोकटोक पास प्रणाली’ लागू होने से 60 प्रतिशत तक प्राइमरी शिक्षा व्यापार की भेंट चढ़ गई है। इससे दोहरी शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा मिल रहा है। एक तरफ तो सरकारी स्कूल हैं, जिनमें सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। इन स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। दूसरी तरफ प्राईवेट स्कूल अच्छी शिक्षा देने के नाम पर भारी मुनाफा लूट रहे हैं। पार्लियामेंटरी स्टैंडिंग कमेटी व अन्य शिक्षा संबंधी कमेटियों ने भी ‘बेरोकटोक पास प्रणाली’ के दुष्परिणाम को स्वीकारते हुए ‘पास-फेल प्रणाली’ को दोबारा लागू करने के पक्ष में अपना मत दिया था। छात्र, शिक्षक, अभिभावक व शिक्षा प्रेमी लोग भी ‘पास-फेल प्रणाली’ लागू करने की बार-बार मांग कर रहे हैं। लेकिन शिक्षा की इतनी भारी बर्बादी के पश्चात भी सरकार इस मांग को सिर्फ पांचवीं कक्षा से लागू करने की बात कर रही है। उन्होंने आरोप जड़ते हुए कहा कि सरकार शिक्षा की जिम्मेदारी से अपना पल्ला झाड़ने व पूंजीपतियों को मुनाफा पहुंचाने के उद्देश्य से निजी शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा दे रही है। सरकारी स्कूलों को बंद कर स्कूली शिक्षा का पूर्णरूप से निजीकरण करने का घोर षड़यंत्र कारी कदम उठाया जा रहा है, इस नीति को ‘क्लोजर व मर्जर’ नाम दिया गया है। इस नीति के नाम पर सरकार नया स्कूल खोलने की बजाए उल्टे सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है। छात्र संगठन एआईडीएसओ 2009 से ही बेरोकटोक पास नीति के खिलाफ आंदोलन करता आ रहा है। जब तक भारत सरकार संगठन की इस मांग को नहीं मानती तब तक संगठन आंदोलन करता रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed