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बडेसरा गांव के पास जूई नहर टूटी, फसल जलमग्न
Updated Sat, 09 Sep 2017 02:03 AM IST
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बडेसरा गांव के पास जूई नहर टूटी, फसल जलमग्र
भिवानी
पानी का दबाव न झेल पाने की वजह से जूई नहर बडेसरा गांव के पास टूट गई। सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूब गई। नहर टूटने के कारण किसानों को भारी फसली नुकसान हुआ है। किसानों ने मुआवजे की मांग की है। सिंचाई विभाग का कहना है कि नहर में मांग से ज्यादा पानी छोड़ने पर नहर टूट गई। शुक्रवार अल सुबह सैर को निकले युवाओं ने जूई नहर टूटने की सूचना ग्रामीणों को दी। माना जा रहा है कि रात को किसी वक्त जूई नहर का किनारा टूट गया। नहर का पानी आसपास के सैकड़ों एकड़ मेें फैल गया। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को वाकया बताया।
किसानों का आरोप है कि सूचना देने के घंटों बाद भी नहर पाटने के लिए सिंचाई विभाग का कोई कर्मचारी या अधिकारी मौके पर नहीं आया। किसान राजकुमार ने बताया कि नहर को समय रहते पाट दिया जाता तो उनका इतना नुक्सान नहीं होता। किसानों ने बताया कि गांव की करीब 500 एकड़ फसल बर्बाद हो गई। किसानों की मांग है कि सरकार या सिंचाई विभाग उनके नुकसान की भरपाई के लिए उचित मुआवजा दे। सिंचाई विभाग के एक्सईएन अमृत सिंह ने बताया कि उनके अधिकारी व कर्मचारी सूचना पाते ही मौके पर पहुंच गए थे। उन्होने बताया कि इस समय जूई फीडर में 600 क्यूसेक पानी की मांग की थी, लेकिन एकाएक नहर में 800 क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया। नतीजतन नहर टूट गई। उन्होंने बताया कि नहर के साथ क्षेत्र के पानी को अगली बुर्जी पर लगे पंप सेट से वापस नहर में डाल दिया जाएगा।
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पानी का दबाव न झेल पाने की वजह से जूई नहर बडेसरा गांव के पास टूट गई। सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूब गई। नहर टूटने के कारण किसानों को भारी फसली नुकसान हुआ है। किसानों ने मुआवजे की मांग की है। सिंचाई विभाग का कहना है कि नहर में मांग से ज्यादा पानी छोड़ने पर नहर टूट गई। शुक्रवार अल सुबह सैर को निकले युवाओं ने जूई नहर टूटने की सूचना ग्रामीणों को दी। माना जा रहा है कि रात को किसी वक्त जूई नहर का किनारा टूट गया। नहर का पानी आसपास के सैकड़ों एकड़ मेें फैल गया। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को वाकया बताया।
किसानों का आरोप है कि सूचना देने के घंटों बाद भी नहर पाटने के लिए सिंचाई विभाग का कोई कर्मचारी या अधिकारी मौके पर नहीं आया। किसान राजकुमार ने बताया कि नहर को समय रहते पाट दिया जाता तो उनका इतना नुक्सान नहीं होता। किसानों ने बताया कि गांव की करीब 500 एकड़ फसल बर्बाद हो गई। किसानों की मांग है कि सरकार या सिंचाई विभाग उनके नुकसान की भरपाई के लिए उचित मुआवजा दे। सिंचाई विभाग के एक्सईएन अमृत सिंह ने बताया कि उनके अधिकारी व कर्मचारी सूचना पाते ही मौके पर पहुंच गए थे। उन्होने बताया कि इस समय जूई फीडर में 600 क्यूसेक पानी की मांग की थी, लेकिन एकाएक नहर में 800 क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया। नतीजतन नहर टूट गई। उन्होंने बताया कि नहर के साथ क्षेत्र के पानी को अगली बुर्जी पर लगे पंप सेट से वापस नहर में डाल दिया जाएगा।
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