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दूसरे दिन भी हल्की बारिश, फिर भी नहीं बुझी जिले की प्यास
Updated Thu, 10 Aug 2017 01:08 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
कहने को तो दो दिन से हल्की बारिश से तन भीगने से राहत जरूर मिली है, लेकिन जिले की जरूरत के हिसाब से बारिश न होने के कारण मन में जरूर उदासी है। दक्षिण हरियाणा पहले से ही सूखाग्रस्त क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां की पूरी कृषि बारिश पर ही निर्भर रहती है। इसके बाद भी पर्याप्त बारिश नहीं होने बड़ी चिंता का विषय है। पिछले दिनों यहां बारिश तो हुई, लेकिन वह गत वर्ष की तुलना में अभी कम है। हालांकि अभी बारिश का पूरा समय शेष है, ऐसे में किसानों को बारिश की पूरी उम्मीद है। अभी लोग बारिश आने की और इंतजार कर रहे हैं। बारिश हो भी रही है, लेकिन वह बहुत कम है। मंगलवार के बाद बुधवार को भी थोड़ी देर के लिए बारिश हुई, जिससे जमीन में नमी जरूर हो गई, लेकिन इसका अधिक लाभ नहीं मिल सका।
यह है बारिश की स्थिति
अगर आंकड़ों की बात की जाए तो अगस्त में अभी तक खोल में 6.5, बावल में 102, रेवाड़ी में 34, जाटूसाना में आठ एवं कोसली में 10 एमएम बारिश हुई है। वहीं जुलाई माह की बात की जाए तो जिलेभर में केवल 400 एमएम बारिश हुई। वहीं इससे पूर्व 2016 में 1126 एमएम, 2015 में 511, 2014 में 379 एवं 2013 में 785 एमएम बारिश हुई थी।
जून रहा बेहतर
इस वर्ष जुलाई माह में जहां कम बारिश हुई वहीं जून माह में हुई बारिश ने किसानों को राहत प्रदान की। इस वर्ष जून में 811 एमएम बारिश हुई थी। इससे पूर्व 2016 में 245 एमएम, 2015 में 355 एमएम, 2014 में 317 एवं 2013 में 188 एमएम बारिश हुई।
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वन विभाग को भी सताने लगी चिंता
बारिश कम होने की चिंता वन विभाग को भी सताने लगी है। बारिश में पौधरोपण की आस लगाए विभाग के सामने बारिश का कम होना बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। इस वर्ष वन विभाग ने करीब सवा चार लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। इनमें से करीब सवा दो लाख पौधे वन विभाग ने लगाए हैं। लेकिन अब बाकी के पौधे लगाने मेें वन विभाग को बड़ी बाधा आ रही है। विभाग अब बारिश का ही इंतजार रहा है, जिससे अपना लक्ष्य हासिल कर सके।
यह सही है कि इस बार कुछ बारिश कम हुई है, लेकिन विभाग लक्ष्य पूरा कर लेगा। बारिश के पानी के अतिरिक्त नहरी पानी से भी लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। -राजेश चुघ, डीएफओ, रेवाड़ी
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रेवाड़ी।
कहने को तो दो दिन से हल्की बारिश से तन भीगने से राहत जरूर मिली है, लेकिन जिले की जरूरत के हिसाब से बारिश न होने के कारण मन में जरूर उदासी है। दक्षिण हरियाणा पहले से ही सूखाग्रस्त क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां की पूरी कृषि बारिश पर ही निर्भर रहती है। इसके बाद भी पर्याप्त बारिश नहीं होने बड़ी चिंता का विषय है। पिछले दिनों यहां बारिश तो हुई, लेकिन वह गत वर्ष की तुलना में अभी कम है। हालांकि अभी बारिश का पूरा समय शेष है, ऐसे में किसानों को बारिश की पूरी उम्मीद है। अभी लोग बारिश आने की और इंतजार कर रहे हैं। बारिश हो भी रही है, लेकिन वह बहुत कम है। मंगलवार के बाद बुधवार को भी थोड़ी देर के लिए बारिश हुई, जिससे जमीन में नमी जरूर हो गई, लेकिन इसका अधिक लाभ नहीं मिल सका।
यह है बारिश की स्थिति
अगर आंकड़ों की बात की जाए तो अगस्त में अभी तक खोल में 6.5, बावल में 102, रेवाड़ी में 34, जाटूसाना में आठ एवं कोसली में 10 एमएम बारिश हुई है। वहीं जुलाई माह की बात की जाए तो जिलेभर में केवल 400 एमएम बारिश हुई। वहीं इससे पूर्व 2016 में 1126 एमएम, 2015 में 511, 2014 में 379 एवं 2013 में 785 एमएम बारिश हुई थी।
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जून रहा बेहतर
इस वर्ष जुलाई माह में जहां कम बारिश हुई वहीं जून माह में हुई बारिश ने किसानों को राहत प्रदान की। इस वर्ष जून में 811 एमएम बारिश हुई थी। इससे पूर्व 2016 में 245 एमएम, 2015 में 355 एमएम, 2014 में 317 एवं 2013 में 188 एमएम बारिश हुई।
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वन विभाग को भी सताने लगी चिंता
बारिश कम होने की चिंता वन विभाग को भी सताने लगी है। बारिश में पौधरोपण की आस लगाए विभाग के सामने बारिश का कम होना बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। इस वर्ष वन विभाग ने करीब सवा चार लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। इनमें से करीब सवा दो लाख पौधे वन विभाग ने लगाए हैं। लेकिन अब बाकी के पौधे लगाने मेें वन विभाग को बड़ी बाधा आ रही है। विभाग अब बारिश का ही इंतजार रहा है, जिससे अपना लक्ष्य हासिल कर सके।
यह सही है कि इस बार कुछ बारिश कम हुई है, लेकिन विभाग लक्ष्य पूरा कर लेगा। बारिश के पानी के अतिरिक्त नहरी पानी से भी लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। -राजेश चुघ, डीएफओ, रेवाड़ी