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पुलिस कर्मचारियों के तबादले
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रोहतक।
पुलिस महकमे में एसआई के बड़े स्तर पर तबादले हुए हैं। आईजी संदीप खिरवार ने 95 एसआई को इधर से उधर करते हुए तुरंत प्रभाव से कार्यभार संभालने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत से 12 एसआई बाहर जाएंगे व 15 यहां कार्यभार संभालेंगे।
आईजी के निर्देशानुसार, रोहतक से एसआई देवेंद्र को झज्जर, एसआई अनेश सोनीपत, एसआई बिजेंद्र सिंह सोनीपत, एसआई भगत सिंह दादरी, एसआई धर्मवीर सोनीपत, एसआई दिलबाग सिंह झज्जर, एसआई जयनारायण दादरी, एसआई राजकरण झज्जर, एसआई शमशेर सिंह दादरी, एसआई सतपाल झज्जर, एसआई प्रदीप कुमार दादरी, एसआई सत्यवान झज्जर भेजे गए हैं। इसके अलावा झज्जर से एसआई रमेश व सूरजभान, सोनीपत से सुरेंद्र, सतबीर, रामफल, सुरेश, कुलदीप, ईश्वर, बलजीत, कृष्ण, बीर सिंह, दीवान सिंह, भिवानी से भूषण सिंह, प्रकाश चंद व वीर सिंह को रोहतक भेजा गया है।
7 महिला एसआई गई 6 आई
आईजी ने पुरुष पुलिस कर्मचारियों के अलावा महिला पुरुष कर्मचारियों के भी तबादले किए हैं। इसमें एसआई सुशीला को सोनीपत, देवी रानी सोनीपत, हवाकौर भिवानी, सुनीता भिवानी, चांदकौर भिवानी, विद्यावती भिवानी, विजेता को सोनीपत भेजा गया है। जबकि झज्जर से एसआई उर्मिला, पीएसआई सुदेश कुमारी, सोनीपत से शकुंतला, भिवानी से प्रवीन, सुशीला देवी, सुनीता का रोहतक तबादला किया गया है।
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रोहतक।
अर्बन एस्टेट थाना इलाके में चार साल की बच्ची से हुए दुष्कर्म मामले में आठ साल के आरोपी की जमानत याचिका बुधवार को नामंजूर हो गई। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। बच्ची से तीन नाबालिग लड़कों ने दुष्कर्म किया था। इनमें सबसे कम उम्र का आरोपी आठ वर्ष का है।
मिनाक्षी नांदल का कहना है कि सात फरवरी को बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ। इसके बाद से आरोपी पुलिस हिरासत में रहे। पुलिस मामले की पड़ताल में जुटी हुई है। इस केस के आरोपियों में सबसे छोटे आठ साल के नाबालिग की जमानत याचिका उसके परिजनों ने अदालत में लगाई। अदालत में बच्ची की सहायतार्थ एडवोकेट चेतना अरोड़ा व सीमा कादियान आगे आई हैं। इन्होंने बिना खर्चे केस लड़ना स्वीकार किया। आरोपी के वकीलों का तर्क था कि आठ साल का बच्चा रेप करने लायक नहीं होता। इस वजह से उसे जमानत दी जाए। इस पर अदालत में पीड़िता की वकील चेतना ने कहा कि यह एक गंभीर अपराध है और जांच के अधीन यदि आरोपियों में किसी को भी जमानत मिलती है तो यह समाज पर ग्रहण का काम करेगा। इसलिए जमानत खारिज की जाए। न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई करते हुए जमानत याचिका को रद्द कर दिया।
इधर, पीड़ित बच्ची अब भी गंभीर पीड़ा झेल रही है। उसका आपरेशन हुआ है। डॉक्टर ने फिलहाल उसे खतरे से बाहर बताया है।
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पुलिस महकमे में एसआई के बड़े स्तर पर तबादले हुए हैं। आईजी संदीप खिरवार ने 95 एसआई को इधर से उधर करते हुए तुरंत प्रभाव से कार्यभार संभालने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत से 12 एसआई बाहर जाएंगे व 15 यहां कार्यभार संभालेंगे।
आईजी के निर्देशानुसार, रोहतक से एसआई देवेंद्र को झज्जर, एसआई अनेश सोनीपत, एसआई बिजेंद्र सिंह सोनीपत, एसआई भगत सिंह दादरी, एसआई धर्मवीर सोनीपत, एसआई दिलबाग सिंह झज्जर, एसआई जयनारायण दादरी, एसआई राजकरण झज्जर, एसआई शमशेर सिंह दादरी, एसआई सतपाल झज्जर, एसआई प्रदीप कुमार दादरी, एसआई सत्यवान झज्जर भेजे गए हैं। इसके अलावा झज्जर से एसआई रमेश व सूरजभान, सोनीपत से सुरेंद्र, सतबीर, रामफल, सुरेश, कुलदीप, ईश्वर, बलजीत, कृष्ण, बीर सिंह, दीवान सिंह, भिवानी से भूषण सिंह, प्रकाश चंद व वीर सिंह को रोहतक भेजा गया है।
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7 महिला एसआई गई 6 आई
आईजी ने पुरुष पुलिस कर्मचारियों के अलावा महिला पुरुष कर्मचारियों के भी तबादले किए हैं। इसमें एसआई सुशीला को सोनीपत, देवी रानी सोनीपत, हवाकौर भिवानी, सुनीता भिवानी, चांदकौर भिवानी, विद्यावती भिवानी, विजेता को सोनीपत भेजा गया है। जबकि झज्जर से एसआई उर्मिला, पीएसआई सुदेश कुमारी, सोनीपत से शकुंतला, भिवानी से प्रवीन, सुशीला देवी, सुनीता का रोहतक तबादला किया गया है।
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रोहतक।
अर्बन एस्टेट थाना इलाके में चार साल की बच्ची से हुए दुष्कर्म मामले में आठ साल के आरोपी की जमानत याचिका बुधवार को नामंजूर हो गई। अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। बच्ची से तीन नाबालिग लड़कों ने दुष्कर्म किया था। इनमें सबसे कम उम्र का आरोपी आठ वर्ष का है।
मिनाक्षी नांदल का कहना है कि सात फरवरी को बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ। इसके बाद से आरोपी पुलिस हिरासत में रहे। पुलिस मामले की पड़ताल में जुटी हुई है। इस केस के आरोपियों में सबसे छोटे आठ साल के नाबालिग की जमानत याचिका उसके परिजनों ने अदालत में लगाई। अदालत में बच्ची की सहायतार्थ एडवोकेट चेतना अरोड़ा व सीमा कादियान आगे आई हैं। इन्होंने बिना खर्चे केस लड़ना स्वीकार किया। आरोपी के वकीलों का तर्क था कि आठ साल का बच्चा रेप करने लायक नहीं होता। इस वजह से उसे जमानत दी जाए। इस पर अदालत में पीड़िता की वकील चेतना ने कहा कि यह एक गंभीर अपराध है और जांच के अधीन यदि आरोपियों में किसी को भी जमानत मिलती है तो यह समाज पर ग्रहण का काम करेगा। इसलिए जमानत खारिज की जाए। न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई करते हुए जमानत याचिका को रद्द कर दिया।
इधर, पीड़ित बच्ची अब भी गंभीर पीड़ा झेल रही है। उसका आपरेशन हुआ है। डॉक्टर ने फिलहाल उसे खतरे से बाहर बताया है।