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लाडो के फैसले पर फक्र, सरकार भी बनाए कोई सख्त कानून : महाबीर
Updated Wed, 12 Jul 2017 12:35 AM IST
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लाडो के फैसले पर फक्र, सरकार भी बनाए कोई सख्त कानून : महाबीर
चरखी दादरी। जनसंख्या वृद्धि एक घातक समस्या है और हर नागरिक को इस बारे में सोचने की जरूरत है। लाड़ो (गीता फौगाट) ने इसे देखते हुए दो बच्चे ही पैदा करने का जो फैसला लिया है उस पर मुझे फक्र है। हम दो-हमारे दो का नारा तो सरकार पहले ही दे चुकी है लेकिन अब चीन की तर्ज पर भारत में भी इस दिशा में सख्त कानून बनाकर लागू करने की जरूरत है। अगर सरकार ऐसा कोई कानून लागू करती है तो देश की उन्नति में यह रास्ता अवश्य प्रशस्त करेगा। यह बात अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवानों गीता व बबीता फौगाट के पिता द्रोणाचार्य अवार्डी महाबीर फौगाट ने अमर उजाला से खास बातचीत में कही। उनके अलावा गीता की मां दयाकौर ने भी इस फैसले को गौरवपूर्ण बताया है।
फौगाट ने कहा कि आज के समय में अगर कोई बेटा-बेटी में फर्क समझता है तो वह सबसे मूर्ख आदमी है। बेटियां किसी भी क्षेत्र में कम नहीं है और यह बात गीता-बबीता सहित देश की अन्य बेटियों ने सच भी कर दिखाई है। वहीं गीता की मां दयाकौर ने कहा कि पुराने समय में लोग जागरूक नहीं थे। यही कारण है कि समाज के डर से बेटे की लालसा में चार बेटियां पैदा कर दीं, लेकिन अब युवा पीढ़ी जागरूक है और अपना ही नहीं समाज का भला-बुरा सोचती है। गीता ने भी यह सही फैसला लिया है। पुराने समय के लोगों की सोच में और वर्तमान पीढ़ी मं जमीन आसमान का अंतर है। गीता ही नहीं देश की हर बेटी को इस तरह की पहल करनी चाहिए। बेटियों के प्रति समाज का पहले नजरिया कुछ ओर था लेकिन अब इसमें काफी बदलाव आया है। मैंने खुद इस चीज को महसूस किया है।
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चरखी दादरी। जनसंख्या वृद्धि एक घातक समस्या है और हर नागरिक को इस बारे में सोचने की जरूरत है। लाड़ो (गीता फौगाट) ने इसे देखते हुए दो बच्चे ही पैदा करने का जो फैसला लिया है उस पर मुझे फक्र है। हम दो-हमारे दो का नारा तो सरकार पहले ही दे चुकी है लेकिन अब चीन की तर्ज पर भारत में भी इस दिशा में सख्त कानून बनाकर लागू करने की जरूरत है। अगर सरकार ऐसा कोई कानून लागू करती है तो देश की उन्नति में यह रास्ता अवश्य प्रशस्त करेगा। यह बात अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवानों गीता व बबीता फौगाट के पिता द्रोणाचार्य अवार्डी महाबीर फौगाट ने अमर उजाला से खास बातचीत में कही। उनके अलावा गीता की मां दयाकौर ने भी इस फैसले को गौरवपूर्ण बताया है।
फौगाट ने कहा कि आज के समय में अगर कोई बेटा-बेटी में फर्क समझता है तो वह सबसे मूर्ख आदमी है। बेटियां किसी भी क्षेत्र में कम नहीं है और यह बात गीता-बबीता सहित देश की अन्य बेटियों ने सच भी कर दिखाई है। वहीं गीता की मां दयाकौर ने कहा कि पुराने समय में लोग जागरूक नहीं थे। यही कारण है कि समाज के डर से बेटे की लालसा में चार बेटियां पैदा कर दीं, लेकिन अब युवा पीढ़ी जागरूक है और अपना ही नहीं समाज का भला-बुरा सोचती है। गीता ने भी यह सही फैसला लिया है। पुराने समय के लोगों की सोच में और वर्तमान पीढ़ी मं जमीन आसमान का अंतर है। गीता ही नहीं देश की हर बेटी को इस तरह की पहल करनी चाहिए। बेटियों के प्रति समाज का पहले नजरिया कुछ ओर था लेकिन अब इसमें काफी बदलाव आया है। मैंने खुद इस चीज को महसूस किया है।
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