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एनर्जी के लिए देसी खाना पर्याप्त
Updated Tue, 20 Nov 2018 02:39 AM IST
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रोटी, दाल, चावल और मट्ठे में ही भरपूर एनर्जी
-एनर्जी के लिए पारंपरिक खाने के अलावा दूसरे तत्वों की नहीं है जरूरत
-एमडीयू के माइक्रो बायोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित ज्ञान कार्यक्रम में सामने आई बात
-आस्ट्रेलिया से आए डॉ. मनोज कुमार राउत बोले, प्रोटीन क्यों व कैसा खा रहे हैं जानना जरूरी
विकास सैनी
रोहतक। हमारे पारंपरिक देसी खाने रोटी, दाल, चावल और मट्ठे में भरपूर एनर्जी है। यह खाना सही तरीके से पर्याप्त मात्रा में खाया जाए तो बेहतर है। इससे खेलों की खान हरियाणा के खिलाड़ियों को किसी तरह के एनर्जी फूड की जरूरत नहीं होगी। विदेशों में हमारा ही हूल फूड (पूरा भोजन) पैटर्न अपनाया जा रहा है। वहां पारंपरिक खाने की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जबकि, यहां ऐसा नहीं है। यह कहना है फंक्शनल फूड व फूड प्रोटीन केमेस्ट्री एक्सपर्ट डॉ. मनोज कुमार राउत का। वे एमएचआरडी के तहत एमडीयू के माइक्रो बायोलॉजी विभाग की ओर से स्वराज सदन में आयोजित ज्ञान कार्यक्रम में शामिल होने आस्ट्रेलिया से आए हैं। यहां अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने खाने की गुणवत्ता पर विचार साझा किए।
डॉ. राउत का कहना है कि खेल या दूसरे किसी भी क्षेत्र में एकदम कामयाबी नहीं मिलती है। इसके लिए लगातार काम करना होता है। खेल क्षेत्र में प्रयास बचपन से शुरू करना होता है। इसके लिए खिलाड़ी को लगातार काम करने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। एक दिन कड़ी मेहनत के बाद अगले दिन के लिए पूरी ऊर्जा का स्त्रोत केवल देसी खाने में है। इसमें डेयरी प्रोडक्ट्स व सोया प्रोटीन अहम हैं। ये हमारे पास प्रचूर मात्रा में उपलब्ध हैं। हमें केवल इनके उपयोग पर ध्यान देना है। प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट्स सभी की जरूरत होती है। यह पर्याप्त मात्र में हों, इसके लिए बैलेंस डाइट सबसे उत्तम है।
पाठ्यक्रम में शामिल हो न्यूट्रिशन
परंपरागत खाने का सही ढंग से इस्तेमाल कर उसकी पूरी ऊर्जा का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए न्यूट्रिशन (पोषाहार) की जानकारी होना जरूरी है। शुरू से ही इसे बच्चों को पढ़ाया जाए तो वे खुद इसका सदुपयोग कर सकेंगे। इसके लिए न्यूट्रिशन को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा।
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मल्टीग्रेन की तरफ लौट रहा समाज
समाज में बदलाव तेजी से आ रहे हैं। इसी कड़ी में मल्टीग्रेन भी लौट आया है। लोग ब्रेड हो या चपाती मल्टीग्रेन पसंद कर रहे हैं। इसकी वजह शरीर को सभी पोषक तत्वों के साथ फाइबर की भी जरूरत होना है।
आबादी के हिसाब से उत्पादन बढ़ाना बड़ी चुनौती
एमडीयू के माइक्रो बायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रत्यूष शुक्ला ने बताया कि जनसंख्या का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यह बेहद तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती आबादी ने खाद्यान्न की समस्या को बढ़ा दिया है। अनाज का उत्पादन भी आबादी के हिसाब से करना होगा। यही नहीं, प्रोटीन किसे, कितना और कैसे चाहिए, यह भी समझना होगा। इसके लिए स्टडी व नॉलेज होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से ज्ञान कार्यक्रम आयोजित किया गया है। यहां आस्ट्रेलियाई फूड कंपनी के निदेशक डॉ. मनोज कुमार रावत विशेष रूप से आए हैं। इन्हें एमएचआरडी ने बुलाया है।
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-एनर्जी के लिए पारंपरिक खाने के अलावा दूसरे तत्वों की नहीं है जरूरत
-एमडीयू के माइक्रो बायोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित ज्ञान कार्यक्रम में सामने आई बात
-आस्ट्रेलिया से आए डॉ. मनोज कुमार राउत बोले, प्रोटीन क्यों व कैसा खा रहे हैं जानना जरूरी
विकास सैनी
रोहतक। हमारे पारंपरिक देसी खाने रोटी, दाल, चावल और मट्ठे में भरपूर एनर्जी है। यह खाना सही तरीके से पर्याप्त मात्रा में खाया जाए तो बेहतर है। इससे खेलों की खान हरियाणा के खिलाड़ियों को किसी तरह के एनर्जी फूड की जरूरत नहीं होगी। विदेशों में हमारा ही हूल फूड (पूरा भोजन) पैटर्न अपनाया जा रहा है। वहां पारंपरिक खाने की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जबकि, यहां ऐसा नहीं है। यह कहना है फंक्शनल फूड व फूड प्रोटीन केमेस्ट्री एक्सपर्ट डॉ. मनोज कुमार राउत का। वे एमएचआरडी के तहत एमडीयू के माइक्रो बायोलॉजी विभाग की ओर से स्वराज सदन में आयोजित ज्ञान कार्यक्रम में शामिल होने आस्ट्रेलिया से आए हैं। यहां अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने खाने की गुणवत्ता पर विचार साझा किए।
डॉ. राउत का कहना है कि खेल या दूसरे किसी भी क्षेत्र में एकदम कामयाबी नहीं मिलती है। इसके लिए लगातार काम करना होता है। खेल क्षेत्र में प्रयास बचपन से शुरू करना होता है। इसके लिए खिलाड़ी को लगातार काम करने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। एक दिन कड़ी मेहनत के बाद अगले दिन के लिए पूरी ऊर्जा का स्त्रोत केवल देसी खाने में है। इसमें डेयरी प्रोडक्ट्स व सोया प्रोटीन अहम हैं। ये हमारे पास प्रचूर मात्रा में उपलब्ध हैं। हमें केवल इनके उपयोग पर ध्यान देना है। प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट्स सभी की जरूरत होती है। यह पर्याप्त मात्र में हों, इसके लिए बैलेंस डाइट सबसे उत्तम है।
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पाठ्यक्रम में शामिल हो न्यूट्रिशन
परंपरागत खाने का सही ढंग से इस्तेमाल कर उसकी पूरी ऊर्जा का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए न्यूट्रिशन (पोषाहार) की जानकारी होना जरूरी है। शुरू से ही इसे बच्चों को पढ़ाया जाए तो वे खुद इसका सदुपयोग कर सकेंगे। इसके लिए न्यूट्रिशन को पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा।
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मल्टीग्रेन की तरफ लौट रहा समाज
समाज में बदलाव तेजी से आ रहे हैं। इसी कड़ी में मल्टीग्रेन भी लौट आया है। लोग ब्रेड हो या चपाती मल्टीग्रेन पसंद कर रहे हैं। इसकी वजह शरीर को सभी पोषक तत्वों के साथ फाइबर की भी जरूरत होना है।
आबादी के हिसाब से उत्पादन बढ़ाना बड़ी चुनौती
एमडीयू के माइक्रो बायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रत्यूष शुक्ला ने बताया कि जनसंख्या का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यह बेहद तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती आबादी ने खाद्यान्न की समस्या को बढ़ा दिया है। अनाज का उत्पादन भी आबादी के हिसाब से करना होगा। यही नहीं, प्रोटीन किसे, कितना और कैसे चाहिए, यह भी समझना होगा। इसके लिए स्टडी व नॉलेज होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से ज्ञान कार्यक्रम आयोजित किया गया है। यहां आस्ट्रेलियाई फूड कंपनी के निदेशक डॉ. मनोज कुमार रावत विशेष रूप से आए हैं। इन्हें एमएचआरडी ने बुलाया है।