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केवल गेहूं और चावल की खेती से किस्मत नहीं बदल सकता किसान: नितिन गडकरी

Tue, 27 Mar 2018 02:19 AM IST
Updated Tue, 27 Mar 2018 02:19 AM IST
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केवल गेहूं और चावल की खेती से किस्मत नहीं बदल सकता किसान: नितिन गडकरी
केवल गेहूं और चावल की खेती से किस्मत नहीं बदल सकता किसान : नितिन गडकरी
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- एग्री लीडरशिप समिट-2018 के समापन समारोह में इनोवेशन, तकनीक और रिचर्स पर जोर दिया गया
- हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल और केंद्रीय इस्पात मंत्री ने समिट को किसानों की समृद्धि की पहल बताया

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
तृतीय एग्री लीडरशिप समिट-2018 के समापन के दौरान सोमवार को केंद्रीय परिवहन एवं जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सिर्फ गेहूं और चावल की खेती कर किसान अपनी किस्मत नहीं बदल सकता है। उसे इनोवेशन, टैक्निक और रिचर्स को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा का किसान तभी समृद्ध होगा जब वह डीजल का विकल्प खोज ले।

उन्होेंने किसानों से कहा कि आज देश में अनाज का भंडार सरप्लस है, जिसमें हरियाणा के किसानों का बड़ा योगदान है। यह भी सच है कि गेहूं-चावल के उत्पादन से किसान की किस्मत नहीं बदलेगी, इसके लिए किसान को अपना दृष्टिकोण बदलना होगा। किसान को गेहूं-चावल के स्थान पर पेट्रोल और डीजल का पर्याय बनना होगा। उन्होंने कहा कि यह कोई सपना नहीं है, बल्कि देश इस दिशा में आगे बढ़ चुका है। किसान परंपरागत फसलों से परे दूसरी तरह की खेती से आमदनी कर सकते हैं। हरियाणा में जिस पराली को जलाने से प्रदूषण होता है, उस एक टन पराली से भी 280 लीटर बायो ईंधन तैयार हो सकता है। देश में पराली से बायो ईंधन बनाने की 1000 इंडस्ट्री लगाई जाएंगी, इनमें हरियाणा में सौ इकाई लगेेंगी। पानी को समुद्र में बहने से बचाने की योजना भी सरकार ने बनाई है। इस मौके पर केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर, भाजपा विधायक नरेश कौशिक, सांसद विजयपाल आदि मौजूद रहे।
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बोले मंत्री और राज्यपाल
हरियाणा देश की आबादी का पेट भरने के लिए 14 प्रतिशत अन्न का उत्पादन कर रहा है। दो प्रतिशत आबादी होते हुए भी प्रदेश का किसान मेहनतकश है और विषम परिस्थितियों के बावजूद जमीन से जुड़ा हुआ है। केंद्र सरकार ने दूसरों की भूमि को ठेके पर लेकर खेती करने वालों की लागत को भी पचास प्रतिशत मुनाफे में जोड़कर फसल का मूल्य निश्चित किया है।
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- वीरेंद्र सिंह, केंद्रीय इस्पात मंत्री

जीरो बजट खेती की ट्रेनिंग के लिए कोई भी किसान कुरुक्षेत्र में उनके फार्म में आ सकता है। जहां गायब के गोबर से खाद तैयार कर खेती की जाती है। पशुओं का दूध बेचकर कर आमदनी होती है। दो सौ एकड़ भूमि में गाय पालने के साथ-साथ खेती कर रहे हैं। यूरिया, कीटनाशक, स्प्रे आदि पर खर्च नहीं होता है।
- आचार्य देवव्रत, राज्यपाल हिमाचल प्रदेश
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