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माता-पिता की सेवा नहीं की तो बेटों से कराया मकान खाली
Updated Fri, 13 Jul 2018 02:40 AM IST
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फोटो सहित
बुुजुर्ग माता-पिता ने बेटों से जताया सुरक्षा को खतरा, कोर्ट ने करवाए मकान खाली
: वन विभाग के रिटायर ऑफिसर की पत्नी ने दायर की थी डीसी कोर्ट में याचिका
: दोनों बेटों पर दुर्व्यवहार का लगाया था आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। बुजुर्ग माता-पिता की मर्जी के खिलाफ जबरदस्ती संतान मकान में नहीं रह सकती। डीसी कोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने वीरवार सुबह माता-पिता भरण पोषण एक्ट 2007 के तहत दोनों बेटों से मकान खाली करवा लिए। याचिकाकर्ता ने अपने बेटों से खुद की सुरक्षा को खतरा बताया था।
जिला समाज कल्याण अधिकारी महाबीर गोदारा ने बताया कि बसंत विहार निवासी विमला देवी ने डीसी कोर्ट में याचिदा दायर की थी कि उसके दो बेटे हैं नरेंद्र व नरेश कुमार। उसके पति ने वन विभाग से रिटायर होने के बाद दो मकान बनाए। वे बेटों के साथ ही रहते थे। इसके बावजूद बेटों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। साथ ही मकानों पर कब्जा करना चाहते हैं। ऐसे में उनकी जान-माल की सुरक्षा करते हुए मकान खाली करवाए जाएं। डीसी कोर्ट ने आरोपी पक्ष को नोटिस भेजा। फैसले के मुताबिक दो बार नरेश व नरेंद्र अदालत में पेश हुए, लेकिन बाद में पेश नहीं हुए। अदालत ने फैसला देते हुए मकान खाली कराने की हिदायत दी। इसकी जिम्मेदारी जिला समाज कल्याण विभाग को सौंपी गई। गुरुवार को पुलिस बल के साथ जिला समाज कल्याण अधिकारी महाबीर गोदान बसंत विहार पहुंचे और मकान खाली करवाए। उस समय एक बेटा मकान में मौजूद था। दूसरा बेटा बाहर गया हुआ था।
रजिस्ट्री भी रद्द कर सकती है कोर्ट
माता-पिता भरण पोषण एक्ट 2007 के तहत अदालत उस रजिस्ट्री को भी रद्द कर सकती है, जो माता-पिता द्वारा अपनी संतान के नाम करवाई जाती है। अगर माता-पिता याचिका दायर करके स्पष्ट करते हैं कि संतान उनकी सेवा नहीं करती।
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डीसी कोर्ट के आदेश पर दोनों बेटों से मकान खाली करवा दिए गए हैं। अदालत के फैसले से पहले दोनों बेटों को बुलाकर समझाया भी गया था, लेकिन वे बाद में अदालत में भी पक्ष रखने के लिए पेश नहीं हुए।
-महाबीर गोदारा, जिला समाज कल्याण अधिकारी
बेटा, मुझे कुछ नहीं कहना
पूरे मामले में जब याचिकाकर्ता महिला विमला देवी से बात की तो उन्होंने पारिवारिक मामला कहकर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। बोली, बेटा हम कुछ नहीं कहना चाहते।
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बुुजुर्ग माता-पिता ने बेटों से जताया सुरक्षा को खतरा, कोर्ट ने करवाए मकान खाली
: वन विभाग के रिटायर ऑफिसर की पत्नी ने दायर की थी डीसी कोर्ट में याचिका
: दोनों बेटों पर दुर्व्यवहार का लगाया था आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। बुजुर्ग माता-पिता की मर्जी के खिलाफ जबरदस्ती संतान मकान में नहीं रह सकती। डीसी कोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने वीरवार सुबह माता-पिता भरण पोषण एक्ट 2007 के तहत दोनों बेटों से मकान खाली करवा लिए। याचिकाकर्ता ने अपने बेटों से खुद की सुरक्षा को खतरा बताया था।
जिला समाज कल्याण अधिकारी महाबीर गोदारा ने बताया कि बसंत विहार निवासी विमला देवी ने डीसी कोर्ट में याचिदा दायर की थी कि उसके दो बेटे हैं नरेंद्र व नरेश कुमार। उसके पति ने वन विभाग से रिटायर होने के बाद दो मकान बनाए। वे बेटों के साथ ही रहते थे। इसके बावजूद बेटों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। साथ ही मकानों पर कब्जा करना चाहते हैं। ऐसे में उनकी जान-माल की सुरक्षा करते हुए मकान खाली करवाए जाएं। डीसी कोर्ट ने आरोपी पक्ष को नोटिस भेजा। फैसले के मुताबिक दो बार नरेश व नरेंद्र अदालत में पेश हुए, लेकिन बाद में पेश नहीं हुए। अदालत ने फैसला देते हुए मकान खाली कराने की हिदायत दी। इसकी जिम्मेदारी जिला समाज कल्याण विभाग को सौंपी गई। गुरुवार को पुलिस बल के साथ जिला समाज कल्याण अधिकारी महाबीर गोदान बसंत विहार पहुंचे और मकान खाली करवाए। उस समय एक बेटा मकान में मौजूद था। दूसरा बेटा बाहर गया हुआ था।
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रजिस्ट्री भी रद्द कर सकती है कोर्ट
माता-पिता भरण पोषण एक्ट 2007 के तहत अदालत उस रजिस्ट्री को भी रद्द कर सकती है, जो माता-पिता द्वारा अपनी संतान के नाम करवाई जाती है। अगर माता-पिता याचिका दायर करके स्पष्ट करते हैं कि संतान उनकी सेवा नहीं करती।
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डीसी कोर्ट के आदेश पर दोनों बेटों से मकान खाली करवा दिए गए हैं। अदालत के फैसले से पहले दोनों बेटों को बुलाकर समझाया भी गया था, लेकिन वे बाद में अदालत में भी पक्ष रखने के लिए पेश नहीं हुए।
-महाबीर गोदारा, जिला समाज कल्याण अधिकारी
बेटा, मुझे कुछ नहीं कहना
पूरे मामले में जब याचिकाकर्ता महिला विमला देवी से बात की तो उन्होंने पारिवारिक मामला कहकर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। बोली, बेटा हम कुछ नहीं कहना चाहते।