{"_id":"6387a085527f332a6f4005a6","slug":"world-aids-day-beating-hiv-with-courage-rewari-news-rtk665019514","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्व एड्स दिवस : हौसले से दे रहे एचआईवी को मात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व एड्स दिवस : हौसले से दे रहे एचआईवी को मात
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेवाड़ी। जिले में स्वास्थ्य विभाग एड्स के खिलाफ जागरूकता अभियान चला कर लोगों को जागरूक कर रहा है। इसके फलस्वरूप अब मरीजों की सख्या गिरने लगी है। मरीज अपने हौसले से एचआईवी को मात दे रहे हैं। वर्ष 2020-21 में 76 तथा वर्ष 2022 में अभी तक 58 मरीजों का उपचार चल रहा है। इसके साथ ही पांच संक्रमित गर्भवती महिलाओं ने सामान्य रूप से बच्चों को जन्म दिया है।
जिला में एचआईवी पॉजिटिव पांच गर्भवती महिलाएं थी, जिनको नियमित रूप से उपचार दिया गया। इसका परिणाम है कि पांचों गर्भवती महिलाओं को सामान्य डिलिवरी होने के साथ उनकी उनकी संतान एचआईवी निगेटिव पैदा हुई। यह जिला के लोगों के लिए राहत की बात हैं।
केस
एचआईवी पीड़ित एक महिला अपनी दास्तां सुनाते हुए फफक पड़ती है। उसका पति भी साथ में मौजूद था। उनका यह पहला बच्चा था। शुरुआत में जांच नहीं कराई। अब पता लगते ही उपचार शुरू कर दिया है। चिकित्सक ने पति को भी जांच की सलाह दी है। उसके भी एचआईवी पॉजीटिव होने की पूरी आशंका है। महिला का कहना है कि उन्हें यह जानलेवा बीमारी कैसे लगी, इसका पता नहीं है। पति-पत्नी एक-दूसरे को दोष दें, यह भी ठीक नहीं। अब दोनों एक दूसरे का सहारा बनकर रह रहे हैं। बच्चे की चिंता थी, लेकिन डिलिवरी के बाद पता चला कि बच्चा सामान्य पैैदा हुआ है।
विज्ञापन
गर्भवती माता से बच्चे के संक्रमित होने की 35 प्रतिशत संभावना
नागरिक अस्पताल में एचआईवी के डॉ. अभिषेक राव बताते हैं कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला से बच्चे के पॉजीटिव होने की 35 प्रतिशत संभावना रहती है। यदि महिला शुरुआत में ही उपचार के लिए आ जाए तो यह संभावना 10-12 प्रतिशत रहती है। आठ माह की बजाय यदि महिला का तीसरे-चौथे महीने में उपचार शुरू हो जाता है तो बच्चे से यह खतरा काफी कम हो जाता। उन्होंने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल में एचआईवी संक्रमित महिलाओं की सिजेरियन और नॉर्मल दोनों तरह से डिलिवरी की व्यवस्था है।
बीमारी के बारे में खुलकर बात करते हैं पीड़ित
जिंदगी के अरमानों को तोड़कर रख देने वाली एचआईवी (एड्स) बीमारी को साथ लेकर भी लोग जीवन जी रहे हैं। वे खुश हैं या नहीं इसका तो पता नहीं, लेकिन एड्स के बारे में खुलकर बात करते हैं। सरकार से मिल रहे उपचार ने उन्हें हौसला दिया है और घर परिवार के लोगों ने जीवन जीने का सहारा। उधर, नागरिक अस्पताल में 58 एचआईवी पीड़ितों का उपचार चल रहा है। पिछले साल इनकी संख्या 76 थी, जो घट गई हैं। उपचार करा रहे रोगियों में अधिकतर 30 से 40 वर्ष आयु के हैं। ये लोग नियमित उपचार की वजह से वह सामान्य जीवन जी रहे हैं। मरीज रोग को छिपाए न, समय पर और नियमित उपचार करे तो वह अपनी सामान्य आयु लगभग पूरी कर लेता है। डॉक्टर बताते हैं कि एचआईवी का वायरस मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है, जिससे उसे अनेक बीमारियां घेर लेती हैं। उपचार से वायरस को पूरी तरह खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन रोककर रखा जा सकता है। अच्छे खानपान और उपचार से मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है।
नागरिक अस्पताल में उपचार की पूरी व्यवस्था
मरीजों को परामर्श दे रहीं सुमन बताती हैं कि नागरिक अस्पताल में एचआईवी के उपचार की पूरी व्यवस्था है। एचआईवी पॉजीटिव होने का पता लगने पर एफआईएआरटी सेंटर में उपचार शुरू हो जाता है। अस्पताल से वायरल लोड जांच की भी सुविधा मिल जाती है। यह एचआईवी की सबसे बड़ी जांच है। इससे शरीर में एचआईवी वायरस की संख्या का पता लगता है। उसी के हिसाब से एंटी रिट्रोवायरल दवाएं दी जाती हैं।
---
कोट
जिले में एड्स को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से न केवल अभियान चलाया जाता है, बल्कि पीड़ितों को भी बेहतर उपचार दिया जा रहा है। इससेे पहले उपचार के लिए रोहतक जाना पड़ता था, लेकिन रेवाड़ी में ही सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
-डॉ राजबीर, नोडल अधिकारी एड्स नागरिक अस्पताल रेवाड़ी
विज्ञापन
जिला में एचआईवी पॉजिटिव पांच गर्भवती महिलाएं थी, जिनको नियमित रूप से उपचार दिया गया। इसका परिणाम है कि पांचों गर्भवती महिलाओं को सामान्य डिलिवरी होने के साथ उनकी उनकी संतान एचआईवी निगेटिव पैदा हुई। यह जिला के लोगों के लिए राहत की बात हैं।
विज्ञापन
केस
एचआईवी पीड़ित एक महिला अपनी दास्तां सुनाते हुए फफक पड़ती है। उसका पति भी साथ में मौजूद था। उनका यह पहला बच्चा था। शुरुआत में जांच नहीं कराई। अब पता लगते ही उपचार शुरू कर दिया है। चिकित्सक ने पति को भी जांच की सलाह दी है। उसके भी एचआईवी पॉजीटिव होने की पूरी आशंका है। महिला का कहना है कि उन्हें यह जानलेवा बीमारी कैसे लगी, इसका पता नहीं है। पति-पत्नी एक-दूसरे को दोष दें, यह भी ठीक नहीं। अब दोनों एक दूसरे का सहारा बनकर रह रहे हैं। बच्चे की चिंता थी, लेकिन डिलिवरी के बाद पता चला कि बच्चा सामान्य पैैदा हुआ है।
विज्ञापन
गर्भवती माता से बच्चे के संक्रमित होने की 35 प्रतिशत संभावना
नागरिक अस्पताल में एचआईवी के डॉ. अभिषेक राव बताते हैं कि एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला से बच्चे के पॉजीटिव होने की 35 प्रतिशत संभावना रहती है। यदि महिला शुरुआत में ही उपचार के लिए आ जाए तो यह संभावना 10-12 प्रतिशत रहती है। आठ माह की बजाय यदि महिला का तीसरे-चौथे महीने में उपचार शुरू हो जाता है तो बच्चे से यह खतरा काफी कम हो जाता। उन्होंने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल में एचआईवी संक्रमित महिलाओं की सिजेरियन और नॉर्मल दोनों तरह से डिलिवरी की व्यवस्था है।
बीमारी के बारे में खुलकर बात करते हैं पीड़ित
जिंदगी के अरमानों को तोड़कर रख देने वाली एचआईवी (एड्स) बीमारी को साथ लेकर भी लोग जीवन जी रहे हैं। वे खुश हैं या नहीं इसका तो पता नहीं, लेकिन एड्स के बारे में खुलकर बात करते हैं। सरकार से मिल रहे उपचार ने उन्हें हौसला दिया है और घर परिवार के लोगों ने जीवन जीने का सहारा। उधर, नागरिक अस्पताल में 58 एचआईवी पीड़ितों का उपचार चल रहा है। पिछले साल इनकी संख्या 76 थी, जो घट गई हैं। उपचार करा रहे रोगियों में अधिकतर 30 से 40 वर्ष आयु के हैं। ये लोग नियमित उपचार की वजह से वह सामान्य जीवन जी रहे हैं। मरीज रोग को छिपाए न, समय पर और नियमित उपचार करे तो वह अपनी सामान्य आयु लगभग पूरी कर लेता है। डॉक्टर बताते हैं कि एचआईवी का वायरस मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है, जिससे उसे अनेक बीमारियां घेर लेती हैं। उपचार से वायरस को पूरी तरह खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन रोककर रखा जा सकता है। अच्छे खानपान और उपचार से मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है।
नागरिक अस्पताल में उपचार की पूरी व्यवस्था
मरीजों को परामर्श दे रहीं सुमन बताती हैं कि नागरिक अस्पताल में एचआईवी के उपचार की पूरी व्यवस्था है। एचआईवी पॉजीटिव होने का पता लगने पर एफआईएआरटी सेंटर में उपचार शुरू हो जाता है। अस्पताल से वायरल लोड जांच की भी सुविधा मिल जाती है। यह एचआईवी की सबसे बड़ी जांच है। इससे शरीर में एचआईवी वायरस की संख्या का पता लगता है। उसी के हिसाब से एंटी रिट्रोवायरल दवाएं दी जाती हैं।
---
कोट
जिले में एड्स को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से न केवल अभियान चलाया जाता है, बल्कि पीड़ितों को भी बेहतर उपचार दिया जा रहा है। इससेे पहले उपचार के लिए रोहतक जाना पड़ता था, लेकिन रेवाड़ी में ही सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
-डॉ राजबीर, नोडल अधिकारी एड्स नागरिक अस्पताल रेवाड़ी