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आईजीयू में 20 लाख की लागत से बन रहा महिला छात्रावास
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रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आईजीयू) में करीब 20 लाख रुपये की लागत से छात्राओं के लिए महिला छात्रावास बनाया जा रहा है। इसका निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। जिस गति से काम चल रहा है, उसको देखते हुए कहा जा रहा है कि यह इसी साल बन कर तैयार हो जाएगा। इसके बनने से छात्राओं को राहत मिलेगी। साथ ही उन्हें बाहर निजी या पीजी लेकर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुसार फिलहाल, यह तीन मंजिला बन रहा है, लेकिन आवश्यकता हुई तो इसे सात मंजिला तक विस्तार किया जा सकता है। इसका निर्माण इसी आधार पर किया जा रहा है। वर्तमान में दूर दराज से आने वाले छात्र और छात्राओं के लिए एक-एक छात्रावास है।
छात्राओं के लिए छात्रावास का निर्माण जी प्लस सात के स्वरूप के आधार पर तैयार किया जा रहा है। जी प्लस स्वरूप के तहत ग्राउंड फ्लोर से लेकर सात मंजिल तक का निर्माण होता है। अभी तीन मंजिल का बनाया जाएगा। बाद में आवश्यकता अनुसार चार मंजिल और बढ़ाया जा सकेगा। इस विश्वविद्यालय में करीब तीन हजार विद्यार्थियों में से 75 प्रतिशत संख्या छात्राओं की हैं। विभिन्न पाठ्यक्रम की पढ़ाई करने के लिए रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झज्जर, गुरुग्राम सहित विभिन्न जिलों के गांवों से विद्यार्थी आते हैं। घर से विश्वविद्यालय तक प्रतिदिन आवागमन करना विद्यार्थियों विशेषकर छात्राओं के लिए संभव नहीं होता।
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कोट
छात्रावास निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। अगले साल के नए सत्र तक छात्राओं को इसका लाभ देने का प्रयास रहेगा। आने वाले समय में और बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए काम किया जा रहा है।
-प्रो. एसके गक्खड़, कुलपति
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विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुसार फिलहाल, यह तीन मंजिला बन रहा है, लेकिन आवश्यकता हुई तो इसे सात मंजिला तक विस्तार किया जा सकता है। इसका निर्माण इसी आधार पर किया जा रहा है। वर्तमान में दूर दराज से आने वाले छात्र और छात्राओं के लिए एक-एक छात्रावास है।
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छात्राओं के लिए छात्रावास का निर्माण जी प्लस सात के स्वरूप के आधार पर तैयार किया जा रहा है। जी प्लस स्वरूप के तहत ग्राउंड फ्लोर से लेकर सात मंजिल तक का निर्माण होता है। अभी तीन मंजिल का बनाया जाएगा। बाद में आवश्यकता अनुसार चार मंजिल और बढ़ाया जा सकेगा। इस विश्वविद्यालय में करीब तीन हजार विद्यार्थियों में से 75 प्रतिशत संख्या छात्राओं की हैं। विभिन्न पाठ्यक्रम की पढ़ाई करने के लिए रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झज्जर, गुरुग्राम सहित विभिन्न जिलों के गांवों से विद्यार्थी आते हैं। घर से विश्वविद्यालय तक प्रतिदिन आवागमन करना विद्यार्थियों विशेषकर छात्राओं के लिए संभव नहीं होता।
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छात्रावास निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। अगले साल के नए सत्र तक छात्राओं को इसका लाभ देने का प्रयास रहेगा। आने वाले समय में और बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए काम किया जा रहा है।
-प्रो. एसके गक्खड़, कुलपति