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महिलाओं ने लैंगिक बेड़ियों को तोड़ा : कुलपति
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फोटो : 16रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान में अतिथिगण सा
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की महिला शाखा, महिला अध्ययन केंद्र और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में महिलाओं के मुद्दे और चुनौतियां विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों को तिलक लगाकर किया गया।
समन्वयक महिला शाखा प्रोफेसर रोमिका बत्रा ने मुख्य वक्ता जयमाला तोमर का स्वागत करते हुए विषय की प्रस्तावना को रखा। उन्होंने बदलते परिवेश में स्त्रियों की मजबूत स्थिति के साथ समाज में बढ़ते लैंगिक अपराधों के बारे में बताया। लैंगिक भेदभाव, यौन शोषण और उत्पीड़न, शिक्षा, बाल विवाह और न जाने कितनी समस्याओं से रोज महिलाओं को सामना करना पड़ता है। जिस समाज में नारी को देवी का दर्जा दिया जाता है उसी समाज में यौन शोषण और उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है। इन समस्याओं का समाधान मिलकर करना होगा।
कार्यक्रम अध्यक्ष कुलपति प्रोफेसर जेपी यादव ने कहा कि आज बदलते समय के साथ महिलाओं ने समाज में अपनी पहचान बनाई है। उन्हें लैंगिक रूढ़ियों की बेड़ियों को तोड़ दिया है। आज वह अपने सपनों एवं लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मजबूती से खड़ी है। महिलाओं को शिक्षा देने का अर्थ है पूरे परिवार को शिक्षा प्रदान करना। महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा करने में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सामाजिक क्षेत्र में महिलाएं शक्ति का स्तंभ रही है। चाहे वह परिवार हो, बच्चों की परवरिश हो, स्वास्थ्य, शिक्षा, समुदाय निर्माण, राजनीति या सामाजिक क्षेत्र हो।
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मुख्य वक्ता प्रसिद्ध लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता जयमाला तोमर ने संस्कृति, समाज और परिवार की मेहता पर जोर देते हुए प्राचीन आख्यानों में वर्णित सशक्त स्त्री पात्रों के माध्यम से अपनी बात कही। कहा कि सोशल मीडिया और पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते दुष्प्रभाव के कारण समाज में महिला असुरक्षित होती जा रही है। हमें जरूरत है राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ अपने चरित्र को मजबूत और सुंदर बनाने की।
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समन्वयक महिला शाखा प्रोफेसर रोमिका बत्रा ने मुख्य वक्ता जयमाला तोमर का स्वागत करते हुए विषय की प्रस्तावना को रखा। उन्होंने बदलते परिवेश में स्त्रियों की मजबूत स्थिति के साथ समाज में बढ़ते लैंगिक अपराधों के बारे में बताया। लैंगिक भेदभाव, यौन शोषण और उत्पीड़न, शिक्षा, बाल विवाह और न जाने कितनी समस्याओं से रोज महिलाओं को सामना करना पड़ता है। जिस समाज में नारी को देवी का दर्जा दिया जाता है उसी समाज में यौन शोषण और उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है। इन समस्याओं का समाधान मिलकर करना होगा।
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कार्यक्रम अध्यक्ष कुलपति प्रोफेसर जेपी यादव ने कहा कि आज बदलते समय के साथ महिलाओं ने समाज में अपनी पहचान बनाई है। उन्हें लैंगिक रूढ़ियों की बेड़ियों को तोड़ दिया है। आज वह अपने सपनों एवं लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मजबूती से खड़ी है। महिलाओं को शिक्षा देने का अर्थ है पूरे परिवार को शिक्षा प्रदान करना। महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा करने में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सामाजिक क्षेत्र में महिलाएं शक्ति का स्तंभ रही है। चाहे वह परिवार हो, बच्चों की परवरिश हो, स्वास्थ्य, शिक्षा, समुदाय निर्माण, राजनीति या सामाजिक क्षेत्र हो।
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मुख्य वक्ता प्रसिद्ध लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता जयमाला तोमर ने संस्कृति, समाज और परिवार की मेहता पर जोर देते हुए प्राचीन आख्यानों में वर्णित सशक्त स्त्री पात्रों के माध्यम से अपनी बात कही। कहा कि सोशल मीडिया और पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते दुष्प्रभाव के कारण समाज में महिला असुरक्षित होती जा रही है। हमें जरूरत है राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ अपने चरित्र को मजबूत और सुंदर बनाने की।