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Rewari News: शहर में 16 दिन नियमित नहीं मिलेगा पानी, राशनिंग अभी से शुरू
Sat, 03 May 2025 12:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 03 May 2025 12:28 AM IST
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फोटो : 19जेएलएन नहर में पाया पानी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। पंजाब सरकार की ओर से भाखड़ा नहर से हरियाणा को मिलने वाले पानी में कटौती करने का असर रेवाड़ी में नजर आने लगा है। पहले जेएलएन नहर में 16 दिन के लिए आता था लेकिन अब 7 से 8 दिन के लिए ही पानी आएगा। इसके चलते शहर में पानी की राशनिक शुरू कर दी गई है। अब शहरवासियों को एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है।
हले जब नहर में पानी आता था तो 16 दिन तक नियमित पानी की सप्लाई होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। रेवाड़ी में राशनिंग सिस्टम चलता है। पहले 24 दिन नहर बंद होती थी, हालत यही रहा तो नहर 30 दिन तक बंद रहेगी। अबी एक हफ्ते स्थिति साधारण रह सकता है लेकिन आगे चलकर पेयजल की दिक्कत हो सकती है। वहीं, गर्मी के सीजन में हर माह 600 क्यूसेक पानी निर्धारित है, कटौती के बाद से अब एकदम से 150 क्यूसेक पानी नहर में मिल रहा है, जो पर्याप्त नहीं है। इससे पहले औसतन 300 से 400 क्यूसेक पानी ही मिल रहा था।
जिले में पानी की सप्लाई आधी हो गई है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक लिसाना व कालाका में बने टैंको को भरने में पहले 7 से 8 दिन लगते थे, पानी कम छोड़े जाने की वजह से इस बार टैंको को भरने में 12 दिन लगेंगे। पानी कटौती से रेवाड़ी में पेयजल सप्लाई किल्लत हो सकती है। कालाका जलघर में अभी अलग-अलग क्षमता के पांच वाटर टैंक बनाए हुए हैं। इनमें पानी क्षमता से ज्यादा भरने के बाद भी शहर में लगभग 20 दिन सप्लाई दी जा सकती है। अब समस्या इसलिए आ रही है कि नहरी पानी का शेड्यूल बदल दिया गया है। यानी नहर में 15 दिन पानी चलता है और 24 दिन बंद रहता है। जबकि टैंकों की क्षमता कम है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी का स्टोरेज नहीं हो पाता है, जिससे शहर में खासकर गर्मी के दिनों में यह समस्या अक्सर आ जाती है। अगर यहां एक टैंक और बने तो हालात सुधर सकते हैं। हालांकि, अमृत योजना में प्लान तैयार कर विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजा हुआ है, लेकिन अभी स्वीकृति नहीं मिली है। लंबे समय से जमीन की तलाश चल रही है।
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इतनी है पानी की खपत
शहर में प्रतिदिन करीब 27.82 मिलियन लीटर पानी की खपत होती है। लिसाना वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 5.32 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। कालाका वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 22.5 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति होती है। जन स्वास्थ्य विभाग के पास स्टोरेज क्षमता कम होने के कारण शहर को पर्याप्त पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही।
वर्जन:
नहर में पहले 16 दिन के लिए पानी आता था, अब 7 से 8 दिन के लिए ही पानी आएगा। ऐसे में अब शहरवासियों को एक दिन छोड़कर पानी मिलेगा। लोगों से अपील है कि पानी को व्यर्थ ना बहाएं। -हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग।
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रेवाड़ी। पंजाब सरकार की ओर से भाखड़ा नहर से हरियाणा को मिलने वाले पानी में कटौती करने का असर रेवाड़ी में नजर आने लगा है। पहले जेएलएन नहर में 16 दिन के लिए आता था लेकिन अब 7 से 8 दिन के लिए ही पानी आएगा। इसके चलते शहर में पानी की राशनिक शुरू कर दी गई है। अब शहरवासियों को एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है।
हले जब नहर में पानी आता था तो 16 दिन तक नियमित पानी की सप्लाई होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। रेवाड़ी में राशनिंग सिस्टम चलता है। पहले 24 दिन नहर बंद होती थी, हालत यही रहा तो नहर 30 दिन तक बंद रहेगी। अबी एक हफ्ते स्थिति साधारण रह सकता है लेकिन आगे चलकर पेयजल की दिक्कत हो सकती है। वहीं, गर्मी के सीजन में हर माह 600 क्यूसेक पानी निर्धारित है, कटौती के बाद से अब एकदम से 150 क्यूसेक पानी नहर में मिल रहा है, जो पर्याप्त नहीं है। इससे पहले औसतन 300 से 400 क्यूसेक पानी ही मिल रहा था।
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जिले में पानी की सप्लाई आधी हो गई है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक लिसाना व कालाका में बने टैंको को भरने में पहले 7 से 8 दिन लगते थे, पानी कम छोड़े जाने की वजह से इस बार टैंको को भरने में 12 दिन लगेंगे। पानी कटौती से रेवाड़ी में पेयजल सप्लाई किल्लत हो सकती है। कालाका जलघर में अभी अलग-अलग क्षमता के पांच वाटर टैंक बनाए हुए हैं। इनमें पानी क्षमता से ज्यादा भरने के बाद भी शहर में लगभग 20 दिन सप्लाई दी जा सकती है। अब समस्या इसलिए आ रही है कि नहरी पानी का शेड्यूल बदल दिया गया है। यानी नहर में 15 दिन पानी चलता है और 24 दिन बंद रहता है। जबकि टैंकों की क्षमता कम है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी का स्टोरेज नहीं हो पाता है, जिससे शहर में खासकर गर्मी के दिनों में यह समस्या अक्सर आ जाती है। अगर यहां एक टैंक और बने तो हालात सुधर सकते हैं। हालांकि, अमृत योजना में प्लान तैयार कर विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजा हुआ है, लेकिन अभी स्वीकृति नहीं मिली है। लंबे समय से जमीन की तलाश चल रही है।
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इतनी है पानी की खपत
शहर में प्रतिदिन करीब 27.82 मिलियन लीटर पानी की खपत होती है। लिसाना वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 5.32 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। कालाका वाटर वर्क्स से प्रतिदिन 22.5 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति होती है। जन स्वास्थ्य विभाग के पास स्टोरेज क्षमता कम होने के कारण शहर को पर्याप्त पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही।
वर्जन:
नहर में पहले 16 दिन के लिए पानी आता था, अब 7 से 8 दिन के लिए ही पानी आएगा। ऐसे में अब शहरवासियों को एक दिन छोड़कर पानी मिलेगा। लोगों से अपील है कि पानी को व्यर्थ ना बहाएं। -हेमंत कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग।