{"_id":"67630dd9bae14086ee08d4d5","slug":"water-released-in-the-canal-after-25-days-regular-supply-will-start-from-today-rewari-news-c-198-1-rew1003-212945-2024-12-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: 25 दिन बाद नहर में छोड़ा गया पानी, आज से होगी नियमित आपूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: 25 दिन बाद नहर में छोड़ा गया पानी, आज से होगी नियमित आपूर्ति
Thu, 19 Dec 2024 07:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Thu, 19 Dec 2024 07:28 AM IST
विज्ञापन
मौजूदा समय में सूखी हुई नहर। संवाद
रेवाड़ी। पिछले 25 दिनों से पीने के पानी का संकट झेल रहे शहरवासियों को अब आज से नियमित रूप से पानी मिलेगा। लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया।
इसके बाद बुधवार को जेएलएन (जवाहर लाल नेहरू) नहर में पानी छोड़ दिया गया है। शहर में पानी की किल्लत न हो इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने दो दिन छोड़कर आपूर्ति शुरू की हुई थी। पहले नहर में 20 दिसंबर तक पानी आने की बात कही जा रही थी। इसके बाद वाटर टैंकों में 22 दिसंबर तक पहुंचता। इसके बाद शहर में आपूर्ति दी जाती। हालात यह बन गए थे कि वाटर टैंकों में एक दिन का पानी शेष रह गया था। यदि पानी की नियमित आपूर्ति की जाती तो पूरे शहर में दो दिन ही चल पाता।
नहर आने तक ही नियमित रहती है आपूर्ति
शहर में लंबे समय से पेयजल को लेकर संकट बना हुआ है, लेकिन न तो विभाग की तरफ से कोई ध्यान दिया जा रहा है और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि आमजन की समस्या को लेकर कोई ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। नहर में पानी चलने तक ही शहर में पेयजल आपूर्ति नियमित रहती है। जब नहर में पानी चलना बंद होता है उसी दिन से शहर में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति होती है। पूरे वर्ष यही स्थिति रहती है। कालाका जलघर से 70 प्रतिशत काॅलोनियों व मोहल्लों को जोड़ा हुआ है, वहीं लिसाना जलघर से 30 प्रतिशत के करीब काॅलोनियों को पेयजल आपूर्ति की जाती है। वहीं लिसाना जलघर से कई गांव भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में यहां पर भी नहर में पानी आने में देरी होते ही हालात खराब हो जाते हैं।
विज्ञापन
नहीं बढ़ रही स्टोरेज क्षमता
कालाका गांव स्थित जलघर में पांच वाटर टैंक बनाए गए हैं, इनकी क्षमता करीब 950 लाख गैलन है। लिसाना में बने दो वाटर टैंकों की क्षमता 340 लाख गैलन है। एक अन्य नए टैंक की क्षमता 32 करोड़ 640 लाख लीटर है। शहर में जिस तेजी से लगातार आबादी बढ़ रही है, उस तेजी से शहर में स्टोरेज टैंकों की क्षमता को नहीं बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में पेयजल को लेकर संकट लगातार बना हुआ है।
-- -- -- -- -- -- -- --
नहर में 23 नवंबर को पानी आना बंद हो गया था। उस समय 10 दिसंबर तक पानी आने की बात कही गई थी। अब सिंचाई व जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लोगों की समस्याओं के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। इसके बाद नहर में पानी छोड़ा गया है।
- हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग
विज्ञापन
इसके बाद बुधवार को जेएलएन (जवाहर लाल नेहरू) नहर में पानी छोड़ दिया गया है। शहर में पानी की किल्लत न हो इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने दो दिन छोड़कर आपूर्ति शुरू की हुई थी। पहले नहर में 20 दिसंबर तक पानी आने की बात कही जा रही थी। इसके बाद वाटर टैंकों में 22 दिसंबर तक पहुंचता। इसके बाद शहर में आपूर्ति दी जाती। हालात यह बन गए थे कि वाटर टैंकों में एक दिन का पानी शेष रह गया था। यदि पानी की नियमित आपूर्ति की जाती तो पूरे शहर में दो दिन ही चल पाता।
विज्ञापन
नहर आने तक ही नियमित रहती है आपूर्ति
शहर में लंबे समय से पेयजल को लेकर संकट बना हुआ है, लेकिन न तो विभाग की तरफ से कोई ध्यान दिया जा रहा है और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि आमजन की समस्या को लेकर कोई ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। नहर में पानी चलने तक ही शहर में पेयजल आपूर्ति नियमित रहती है। जब नहर में पानी चलना बंद होता है उसी दिन से शहर में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति होती है। पूरे वर्ष यही स्थिति रहती है। कालाका जलघर से 70 प्रतिशत काॅलोनियों व मोहल्लों को जोड़ा हुआ है, वहीं लिसाना जलघर से 30 प्रतिशत के करीब काॅलोनियों को पेयजल आपूर्ति की जाती है। वहीं लिसाना जलघर से कई गांव भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में यहां पर भी नहर में पानी आने में देरी होते ही हालात खराब हो जाते हैं।
विज्ञापन
नहीं बढ़ रही स्टोरेज क्षमता
कालाका गांव स्थित जलघर में पांच वाटर टैंक बनाए गए हैं, इनकी क्षमता करीब 950 लाख गैलन है। लिसाना में बने दो वाटर टैंकों की क्षमता 340 लाख गैलन है। एक अन्य नए टैंक की क्षमता 32 करोड़ 640 लाख लीटर है। शहर में जिस तेजी से लगातार आबादी बढ़ रही है, उस तेजी से शहर में स्टोरेज टैंकों की क्षमता को नहीं बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में पेयजल को लेकर संकट लगातार बना हुआ है।
नहर में 23 नवंबर को पानी आना बंद हो गया था। उस समय 10 दिसंबर तक पानी आने की बात कही गई थी। अब सिंचाई व जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लोगों की समस्याओं के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। इसके बाद नहर में पानी छोड़ा गया है।
- हेमंत कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग