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Rewari News: साहबी बैराज के पानी से फसलें जलमग्न, ग्रामीण परेशान
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धारूहेड़ा। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित साहबी बैराज का पानी गांव में पहुंच गया है। पानी खालियावास, तितरपुर, जीतपुरा, ततारपुर, सुनारिया, असदपुर, रोजका, मसानी सहित दर्जनों गांवों के खेतों और रास्तों में फैल गया है। इससे न केवल फसलें डूब गई हैं, बल्कि ग्रामीणों की आवाजाही भी बाधित हो रही है।
किसान दयाकिशन, मंगल सिंह ने बताया कि इस गंदे पानी ने पहले ही क्षेत्र के किसानों की बाजरे और पशु चारे की फसलें पूरी तरह बर्बाद कर दीं थी और अब सरसों की बिजाई के लिए तैयार खेतों में भी प्रदूषित पानी भरा है। कई किसानों के ट्यूबवेल और खेतों में बने मकान तक डूब गए हैं जिससे लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है।
किसानों का कहना है कि अगर पानी को नहीं रोका गया तो आगे खेती करना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि बैराज की दीवार को तुरंत ठीक किया जाए और इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। वहीं ग्रामीणों ने यह भी बताया कि साहबी बैराज से छोड़ा गया पानी गांव खालियावास व आसपास के दर्जनों गांवों के लिए विनाश बन चुका है।
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कई बार प्रशासन के समक्ष इस समस्या को उठाया गया लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। किसानों की फसलें, रास्ते और पेयजल सब प्रभावित हैं।
मामला एनजीटी में, फिर भी नहीं सुधार
गांव खरखड़ा प्रकाश द्वारा इस मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण में याचिका दायर की गई है जिसके बाद हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सरकारों से जवाब मांगा गया है। कोर्ट के आदेश के बावजूद अगर इस तरह से प्रदूषित पानी छोड़ा जाता रहा तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कई बार जांच में यह पानी मानकों से कई गुना अधिक प्रदूषित पाया गया है। इसके बावजूद सिंचाई विभाग लगातार इसे बैराज से बाहर छोड़ रहा है जो एनजीटी आदेशों की खुली अवहेलना है।
विभाग ने स्थिति पर तुरंत संज्ञान लिया
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता विजय कुमार ने बताया कि बैराज में इस समय पानी की अधिकता के कारण कुछ इलाकों में पानी खेतों की ओर चला गया था। विभाग ने स्थिति पर तुरंत संज्ञान लिया है और अब पानी के बहाव को नियंत्रित कर दिया गया है। अभी पानी को रोक दिया गया है और आसपास के गांवों में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
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किसान दयाकिशन, मंगल सिंह ने बताया कि इस गंदे पानी ने पहले ही क्षेत्र के किसानों की बाजरे और पशु चारे की फसलें पूरी तरह बर्बाद कर दीं थी और अब सरसों की बिजाई के लिए तैयार खेतों में भी प्रदूषित पानी भरा है। कई किसानों के ट्यूबवेल और खेतों में बने मकान तक डूब गए हैं जिससे लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है।
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किसानों का कहना है कि अगर पानी को नहीं रोका गया तो आगे खेती करना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि बैराज की दीवार को तुरंत ठीक किया जाए और इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। वहीं ग्रामीणों ने यह भी बताया कि साहबी बैराज से छोड़ा गया पानी गांव खालियावास व आसपास के दर्जनों गांवों के लिए विनाश बन चुका है।
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कई बार प्रशासन के समक्ष इस समस्या को उठाया गया लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। किसानों की फसलें, रास्ते और पेयजल सब प्रभावित हैं।
मामला एनजीटी में, फिर भी नहीं सुधार
गांव खरखड़ा प्रकाश द्वारा इस मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण में याचिका दायर की गई है जिसके बाद हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सरकारों से जवाब मांगा गया है। कोर्ट के आदेश के बावजूद अगर इस तरह से प्रदूषित पानी छोड़ा जाता रहा तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कई बार जांच में यह पानी मानकों से कई गुना अधिक प्रदूषित पाया गया है। इसके बावजूद सिंचाई विभाग लगातार इसे बैराज से बाहर छोड़ रहा है जो एनजीटी आदेशों की खुली अवहेलना है।
विभाग ने स्थिति पर तुरंत संज्ञान लिया
सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता विजय कुमार ने बताया कि बैराज में इस समय पानी की अधिकता के कारण कुछ इलाकों में पानी खेतों की ओर चला गया था। विभाग ने स्थिति पर तुरंत संज्ञान लिया है और अब पानी के बहाव को नियंत्रित कर दिया गया है। अभी पानी को रोक दिया गया है और आसपास के गांवों में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।