{"_id":"6a4407aa10e05e16950a7d55","slug":"waiting-for-rain-to-sow-pearl-millet-moong-and-cluster-bean-rewari-news-c-198-1-rew1001-241082-2026-06-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: बाजरा, मूंग और ग्वार की बुवाई के लिए बारिश का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: बाजरा, मूंग और ग्वार की बुवाई के लिए बारिश का इंतजार
Tue, 30 Jun 2026 11:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 30 Jun 2026 11:45 PM IST
विज्ञापन
फसल के लिए तैयार किया गया खेत। संवाद
कोसली। क्षेत्र के किसान खरीफ की फसल की तैयारियों में जुटे हैं। वे बाजरा, मूंग और ग्वार की बुवाई के लिए प्री-मानसून बारिश का इंतजार कर रहे हैं। अर्ध-रेतीले और दोमट मिट्टी वाले इस क्षेत्र में कम वर्षा होने के कारण बाजरे की खेती प्रमुखता से होती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बाजरे की बुवाई का आदर्श समय 25 जून से 15 जुलाई तक होता है। ग्वार की बुवाई 20 जून से 15 जुलाई और मूंग की बुवाई 1 से 15 जुलाई के बीच सर्वोत्तम मानी जाती है। कोसली कृषि अधिकारी डॉ. नवीन यादव ने बताया कि दक्षिण हरियाणा की जलवायु को देखते हुए बाजरे की कई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, जिनसे किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि उपमंडल में लगभग 20 हजार हेक्टेयर भूमि में से 10 हजार हेक्टेयर वर्षा आधारित है, जबकि शेष भूमि पर सिंचाई के माध्यम से खेती की जाती है। वर्तमान में लगभग 4 हजार हेक्टेयर में कपास और 800 हेक्टेयर में चारे की फसल बोई गई है। किसान अब बारिश होते ही तीन से चार दिनों के भीतर बुवाई कार्य शुरू करने की तैयारी में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बाजरे की बुवाई का आदर्श समय 25 जून से 15 जुलाई तक होता है। ग्वार की बुवाई 20 जून से 15 जुलाई और मूंग की बुवाई 1 से 15 जुलाई के बीच सर्वोत्तम मानी जाती है। कोसली कृषि अधिकारी डॉ. नवीन यादव ने बताया कि दक्षिण हरियाणा की जलवायु को देखते हुए बाजरे की कई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, जिनसे किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि उपमंडल में लगभग 20 हजार हेक्टेयर भूमि में से 10 हजार हेक्टेयर वर्षा आधारित है, जबकि शेष भूमि पर सिंचाई के माध्यम से खेती की जाती है। वर्तमान में लगभग 4 हजार हेक्टेयर में कपास और 800 हेक्टेयर में चारे की फसल बोई गई है। किसान अब बारिश होते ही तीन से चार दिनों के भीतर बुवाई कार्य शुरू करने की तैयारी में हैं।
विज्ञापन