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Rewari News: डीटीपी के खिलाफ ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
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कार्रवाई को लेकर मांग करते ग्रामीण। स्रोत : वीडियो ग्रैब
रेवाड़ी। जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) विभाग और भाजपा युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। गांव सुठानी के कई ग्रामीणों ने डीटीपी विभाग के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कॉलोनियों में कार्रवाई के नाम पर उनसे घूस मांगी जाती है और राशि न देने पर बुलडोजर चलाकर उनकी जमीन व निर्माण को नुकसान पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों ने इस संबंध में कसौला थाना पुलिस को शिकायत भी दी है।
गांव सुठानी स्थित कॉलोनी के निवासियों ने ये आरोप लगाए हैं। लोगों के अनुसार जो लोग कथित मांग पूरी कर देते हैं उनके अवैध निर्माण पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होती जबकि विरोध करने वालों पर तुरंत बुलडोजर चलाया जाता है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
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26 नवंबर को एक महिला ने डीटीपी पर अभद्रता करने, धक्का देने और जातिसूचक शब्दों का उपयोग कर धमकाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दी है। शिकायत में महिला ने कहा कि वह अपनी जमीन से जुड़े मसले पर बातचीत करने पहुंची थी तभी डीटीपी ने उसके साथ अपमानजनक व्यवहार किया।
इसी क्रम में एक स्थानीय किसान ने भी शिकायत में कहा कि विभाग की कार्रवाई के दौरान उसकी खड़ी फसल को जानबूझकर बर्बाद कर दिया गया। किसान का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उसकी भूमि पर मशीनें चला दी गईं जिसके चलते उसकी काफी फसल नष्ट हो गई।
यह था पूरा मामला
24 नवंबर को गांव सुठानी में अवैध निर्माण तोड़ने पहुंची डीटीपी टीम और स्थानीय लोगों के बीच तीखी नोक-झोंक भी हुई थी। इस दौरान भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष निखिल भी मौके पर पहुंचे जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ गई। डीटीपी टीम ने इस संबंध में निखिल व अन्य लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने की शिकायत पुलिस में दी है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अब इस पूरे मामले की शिकायत विस्तृत प्रमाणों के साथ मुख्यमंत्री से भी करेंगे।
डीटीपी ने सभी आरोप किए खारिज
डीटीपी मनदीप सिहाग ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि वे केवल कानून के अनुसार अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई कर रहे थे जिसके कारण कुछ लोग नाराज होकर इस प्रकार के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा विवाद नियमों का पालन न करने वालों द्वारा उत्पन्न किया गया है।
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ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कॉलोनियों में कार्रवाई के नाम पर उनसे घूस मांगी जाती है और राशि न देने पर बुलडोजर चलाकर उनकी जमीन व निर्माण को नुकसान पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों ने इस संबंध में कसौला थाना पुलिस को शिकायत भी दी है।
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गांव सुठानी स्थित कॉलोनी के निवासियों ने ये आरोप लगाए हैं। लोगों के अनुसार जो लोग कथित मांग पूरी कर देते हैं उनके अवैध निर्माण पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होती जबकि विरोध करने वालों पर तुरंत बुलडोजर चलाया जाता है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
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26 नवंबर को एक महिला ने डीटीपी पर अभद्रता करने, धक्का देने और जातिसूचक शब्दों का उपयोग कर धमकाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दी है। शिकायत में महिला ने कहा कि वह अपनी जमीन से जुड़े मसले पर बातचीत करने पहुंची थी तभी डीटीपी ने उसके साथ अपमानजनक व्यवहार किया।
इसी क्रम में एक स्थानीय किसान ने भी शिकायत में कहा कि विभाग की कार्रवाई के दौरान उसकी खड़ी फसल को जानबूझकर बर्बाद कर दिया गया। किसान का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उसकी भूमि पर मशीनें चला दी गईं जिसके चलते उसकी काफी फसल नष्ट हो गई।
यह था पूरा मामला
24 नवंबर को गांव सुठानी में अवैध निर्माण तोड़ने पहुंची डीटीपी टीम और स्थानीय लोगों के बीच तीखी नोक-झोंक भी हुई थी। इस दौरान भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष निखिल भी मौके पर पहुंचे जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ गई। डीटीपी टीम ने इस संबंध में निखिल व अन्य लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने की शिकायत पुलिस में दी है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अब इस पूरे मामले की शिकायत विस्तृत प्रमाणों के साथ मुख्यमंत्री से भी करेंगे।
डीटीपी ने सभी आरोप किए खारिज
डीटीपी मनदीप सिहाग ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि वे केवल कानून के अनुसार अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई कर रहे थे जिसके कारण कुछ लोग नाराज होकर इस प्रकार के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा विवाद नियमों का पालन न करने वालों द्वारा उत्पन्न किया गया है।