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Rewari News: नए दिशा निर्देशों के तहत 10 मापदंडों के आधार पर मिलेगी नैक की ग्रेडिंग
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व्याखान में भाग लेते विद्यार्थी। स्रोत : विवि
रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता एवं प्रत्यायन प्रकोष्ठ की तरफ से नैक(एनएएसी) को लेकर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक में आइक्यूएसी प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर नरसिम्हन ने विस्तार से इसके विभिन्न पहलुओं की व्याख्या की। नए दिशा निर्देशों के अंतर्गत 10 मापदंडों के आधार पर ग्रेडिंग दी जाती है
उन्होंने बताया कि यद्यपि औपचारिक रूप से अनुमोदित किए गए दिशा निर्देशों की प्रतीक्षा है लेकिन फिर भी अभी तक जो मापदंड बनाए गए हैं हमें उनके अनुसार अपने आप को धीरे-धीरे तैयार करना पड़ेगा ताकि जब इसके लिए आवेदन करना पड़े तो एकदम से दबाव महसूस न हो।
उन्होंने यह भी बताया कि अब बाइनरी एक्रीडिटेशन के अंतर्गत पांच लेवल (1 से 5) हर मापदंड के लिए प्रदान किए जाएंगे जिसमें किसी प्रकार का गुणात्मक उत्तर देने की आवश्यकता नहीं होगी।
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विशेषज्ञों की टीम की ओर से विश्वविद्यालय में विजिट करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। हमें सभी डाटा परिमाणात्मक रूप से उसके उचित साक्ष्यों के साथ अपलोड करना है। कार्यक्रम का संचालन विधि विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुसुम के द्वारा किया गया।
नए दिशा निर्देशों के अंतर्गत 10 मापदंडों के आधार पर ग्रेडिंग प्रदान की जाती है। इनमें करिकुलम अर्थात सिलेबस डिजाइन करना, फैकल्टी संसाधन, विश्वविद्यालय इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय संसाधन एवं उनका प्रबंधन, टीचिंग एवं लर्निंग, करिकुलर इंगेजमेंट, गवर्नेंस एवं एडमिनिस्ट्रेशन, विद्यार्थियों से मिलने वाला आउटकम, रिसर्च एवं इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी आउटकम शामिल है।
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उन्होंने बताया कि यद्यपि औपचारिक रूप से अनुमोदित किए गए दिशा निर्देशों की प्रतीक्षा है लेकिन फिर भी अभी तक जो मापदंड बनाए गए हैं हमें उनके अनुसार अपने आप को धीरे-धीरे तैयार करना पड़ेगा ताकि जब इसके लिए आवेदन करना पड़े तो एकदम से दबाव महसूस न हो।
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उन्होंने यह भी बताया कि अब बाइनरी एक्रीडिटेशन के अंतर्गत पांच लेवल (1 से 5) हर मापदंड के लिए प्रदान किए जाएंगे जिसमें किसी प्रकार का गुणात्मक उत्तर देने की आवश्यकता नहीं होगी।
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विशेषज्ञों की टीम की ओर से विश्वविद्यालय में विजिट करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। हमें सभी डाटा परिमाणात्मक रूप से उसके उचित साक्ष्यों के साथ अपलोड करना है। कार्यक्रम का संचालन विधि विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुसुम के द्वारा किया गया।
नए दिशा निर्देशों के अंतर्गत 10 मापदंडों के आधार पर ग्रेडिंग प्रदान की जाती है। इनमें करिकुलम अर्थात सिलेबस डिजाइन करना, फैकल्टी संसाधन, विश्वविद्यालय इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय संसाधन एवं उनका प्रबंधन, टीचिंग एवं लर्निंग, करिकुलर इंगेजमेंट, गवर्नेंस एवं एडमिनिस्ट्रेशन, विद्यार्थियों से मिलने वाला आउटकम, रिसर्च एवं इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी आउटकम शामिल है।