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प्रतिष्ठान बंद कर व्यापारियों ने निकाला रोष मार्च
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
Updated Sat, 27 Feb 2016 12:24 AM IST
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प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान पंजाबियों की दुकानों में लूटपाट एवं आगजनी की घटना के विरोध में शुक्रवार को पंजाबी समुदाय ने काली पट्टी बांधकर शहर में रोष मार्च निकाला।
इस दौरान समुदाय के सभी लोगों ने पंजाबी मार्केट सहित पूरे शहर में अपनी दुकानें बंद रखीं। मार्च के दौरान उन्होंने जाट समाज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु एवं कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए और राजीव चौक पर जाट समाज का पुतला फूंका।
इसके बाद सचिवालय में उपायुक्त डॉ. यश गर्ग को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा । वहीं पंजाबी समाज के नेताओं ने एक पुलिस अधिकारी द्वारा जाटों का साथ देने का आरोप लगाया ।
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पंजाबी समुदाय के लोग सुबह रेलवे रोड स्थित मक्खन लाल धर्मशाला में एकत्रित होकर शहर के बाजारों से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। रोष प्रदर्शन करने वालों में सभी पार्टियों के नेता एवं नगर परिषद सदस्य शामिल थे। उन्होंने जाट नेताओं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु एवं कृषि मंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन नेताओं के इशारे पर ही उपद्रवियों ने पंजाबी बिरादरियों के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है।
जिसका पंजाबी समाज एक स्वर में भर्त्सना करता है। उन्होंने कहा कि टारगेट कर लूटपाट एवं आगजनी की जा रही थी, लेकिन प्रशासन मौन बना रहा। रेवाड़ी समाज के प्रधान मदनलाल झाम ने कहा कि पंजाबी कौम भाईचारे में विश्वास करती है, लेकिन वह जुल्म को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
शुक्रवार को हुए रोष प्रदर्शन के दौरान सभी पार्टियों से जुड़े पंजाबी समुदाय के लोग मौजूद रहे। मदन लाल झाम्ब, रमेश अरोड़ा, वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मपाल नंदवानी, विवेक ढींगरा, राजकुमार कालड़ा, रवि चांदना, महेंद्र चक्रवर्ती एडवोकेट, महेंद्र छाबड़ा, जवाहर सचदेवा, केआर खुराना एडवोकेट, लक्ष्मण अरोड़ा, प्रेमनाथ गेरा, नवीन पोपली, धारी अरोड़ा, सचिन मलिक एडवोकेट, मास्टर वेदप्रकाश, मनीष चराया पार्षद, केशव चौधरी, पवन बत्तरा, अभिषेक झाम, पप्पा टक्कर, पूनम सतीजा पार्षद, राजकुमार गेरा एडवोकेट, वंदना पोपली, पवन बटला पार्षद, सुखराम आर्य, डा. सोहन लाल, सुनिल ठकराल, दिनेश कपूर, अनिल अरोड़ा, शैलेंद्र सतीजा, जवाहर गांधी, दलीप माटा, सुरेंद्र मेंहदीरत्ता, हरीश अरोडा पूर्व प्रधान, श्यामलाल चुग, चंद्रशेखर अरोडा, अशोक अरनेजा, अशोक खीरबाट, गोबिंद मनोचा, काला ढीगरा, जगदीश दुआ, भीम मखीजा आदि मौजूद थे।
समाज की ये हैं मुख्य मांगे
ज्ञापन में लोगों ने पीड़ितों के लिए स्पेशल रिलीफ फंड बनाने, दंगे के दौरान लापरवाही बरतने वाले पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को सस्पेंड करने, दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने और उपद्रवियों को सजा देने के साथ बर्बाद की संपत्ति की वसूली दंगाइयों से वसूल करने की मांग की गई। इसके अलावा ,1947, 1984 एवं 2016 जैसी दंगों की पुनरावृत्ति न होने, मामले की सीबाआई से जांच कराकर स्पेशल कानून बनाने की मांग भी रखी। वहीं दंगा पीड़ितों को एक मुश्त पुनर्वास मुआवजा देने के साथ व्यापारिक संस्थान बनाने और दंगा पीड़ितों के लिए जल्द से जल्द सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई।
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जान-माल के नुकसान की पीड़ा दिखी
पंजाबी समुदाय के व्यापारी सुबह 11 बजे रोष प्रदर्शन करते राजीव चौक पहुंचे। यहां पर उन्होंने जमकर नारेबाजी की । इसके बाद एक पुतले पर जाट समाज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, ओमप्रकाश धनखड एवं कैप्टन अभिमन्यु का नाम लिखा। इसके बाद बुजुर्ग एवं युवाओं ने पुतले पर लात-जूते मारकर अपना गुस्सा निकाला। ये उनके नुकसान की पीड़ा थी। ये प्रक्रिया पंद्रह मिनट से भी ज्यादा चली। इसके बाद पुतले का आग के हवाले कर दिया गया।
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पुलिस अधिकारियों पर लगाया जाटों से मिलीभगत का आरोप
पंचनंद के जिला अध्यक्ष बिट्टू चौधरी ने उपायुक्त यश गर्ग को ज्ञापन सौंपते समय पुलिस अधिकारियों पर ट्रैक एवं हाइवे जाम करने की घटनाओं में मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी ने जाटों के बीच खुद जाट होने की बात कही, इससे जाट और उग्र हो गए। इस दौरान वार्ड-12 से पार्षद गुरदयाल नंबरदार ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया तथा घटना की निंदा करते हुए 35 बिरादरी जिंदाबाद के नारे लगाए।
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मुआवजा एवं कार्रवाई नहीं हुई तो करेंगे अनशन
समाज के प्रधान मदनलाल झाम ने कहा कि यदि दंगा पीड़ितों को तय समय के अंदर मुआवजा नहीं मिला और दंगों में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो समाज के लोग लघु सचिवालय के बाहर अनशन करेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के लोग प्यार से रहकर अपना व्यापार करते हैं, लेकिन हमेशा दंगों में उन्हें ही पीड़ित बनाया जाता है।
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पहली बार बंद रहीं पंजाबी समुदाय की सभी दुकानें
रेवाड़ी में पंजाबी समुदाय की पंजाबी मार्केट एवं कपड़ा मार्केट सहित शहर के व्यापार में पचास फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी है। जिले में पंजाबी समुदाय की लगभग आठ हजार दुकानें हैं। इसी के साथ रेवाड़ी में पंजाबी समुदाय की आबादी भी लगभग अस्सी हजार के आसपास है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेवाड़ी में पंजाबी समुदाय की कारोबारी हिस्सेदारी एवं राजनैतिक हिस्सेदारी कितनी अहम है। शुक्रवार को पंजाबी समुदाय के सभी प्रतिष्ठानों के बंद रहने से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। पंजाबी समुदाय के लोगों ने बताया कि यह रेवाड़ी के इतिहास में पहली बार हुआ है कि समुदाय के युवा तथा बुजुर्ग अपना काम छोड़कर सड़कों पर उतरें हो।
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इस दौरान समुदाय के सभी लोगों ने पंजाबी मार्केट सहित पूरे शहर में अपनी दुकानें बंद रखीं। मार्च के दौरान उन्होंने जाट समाज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु एवं कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए और राजीव चौक पर जाट समाज का पुतला फूंका।
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इसके बाद सचिवालय में उपायुक्त डॉ. यश गर्ग को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा । वहीं पंजाबी समाज के नेताओं ने एक पुलिस अधिकारी द्वारा जाटों का साथ देने का आरोप लगाया ।
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पंजाबी समुदाय के लोग सुबह रेलवे रोड स्थित मक्खन लाल धर्मशाला में एकत्रित होकर शहर के बाजारों से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। रोष प्रदर्शन करने वालों में सभी पार्टियों के नेता एवं नगर परिषद सदस्य शामिल थे। उन्होंने जाट नेताओं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु एवं कृषि मंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि इन नेताओं के इशारे पर ही उपद्रवियों ने पंजाबी बिरादरियों के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है।
जिसका पंजाबी समाज एक स्वर में भर्त्सना करता है। उन्होंने कहा कि टारगेट कर लूटपाट एवं आगजनी की जा रही थी, लेकिन प्रशासन मौन बना रहा। रेवाड़ी समाज के प्रधान मदनलाल झाम ने कहा कि पंजाबी कौम भाईचारे में विश्वास करती है, लेकिन वह जुल्म को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
शुक्रवार को हुए रोष प्रदर्शन के दौरान सभी पार्टियों से जुड़े पंजाबी समुदाय के लोग मौजूद रहे। मदन लाल झाम्ब, रमेश अरोड़ा, वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मपाल नंदवानी, विवेक ढींगरा, राजकुमार कालड़ा, रवि चांदना, महेंद्र चक्रवर्ती एडवोकेट, महेंद्र छाबड़ा, जवाहर सचदेवा, केआर खुराना एडवोकेट, लक्ष्मण अरोड़ा, प्रेमनाथ गेरा, नवीन पोपली, धारी अरोड़ा, सचिन मलिक एडवोकेट, मास्टर वेदप्रकाश, मनीष चराया पार्षद, केशव चौधरी, पवन बत्तरा, अभिषेक झाम, पप्पा टक्कर, पूनम सतीजा पार्षद, राजकुमार गेरा एडवोकेट, वंदना पोपली, पवन बटला पार्षद, सुखराम आर्य, डा. सोहन लाल, सुनिल ठकराल, दिनेश कपूर, अनिल अरोड़ा, शैलेंद्र सतीजा, जवाहर गांधी, दलीप माटा, सुरेंद्र मेंहदीरत्ता, हरीश अरोडा पूर्व प्रधान, श्यामलाल चुग, चंद्रशेखर अरोडा, अशोक अरनेजा, अशोक खीरबाट, गोबिंद मनोचा, काला ढीगरा, जगदीश दुआ, भीम मखीजा आदि मौजूद थे।
समाज की ये हैं मुख्य मांगे
ज्ञापन में लोगों ने पीड़ितों के लिए स्पेशल रिलीफ फंड बनाने, दंगे के दौरान लापरवाही बरतने वाले पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को सस्पेंड करने, दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने और उपद्रवियों को सजा देने के साथ बर्बाद की संपत्ति की वसूली दंगाइयों से वसूल करने की मांग की गई। इसके अलावा ,1947, 1984 एवं 2016 जैसी दंगों की पुनरावृत्ति न होने, मामले की सीबाआई से जांच कराकर स्पेशल कानून बनाने की मांग भी रखी। वहीं दंगा पीड़ितों को एक मुश्त पुनर्वास मुआवजा देने के साथ व्यापारिक संस्थान बनाने और दंगा पीड़ितों के लिए जल्द से जल्द सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई।
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जान-माल के नुकसान की पीड़ा दिखी
पंजाबी समुदाय के व्यापारी सुबह 11 बजे रोष प्रदर्शन करते राजीव चौक पहुंचे। यहां पर उन्होंने जमकर नारेबाजी की । इसके बाद एक पुतले पर जाट समाज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, ओमप्रकाश धनखड एवं कैप्टन अभिमन्यु का नाम लिखा। इसके बाद बुजुर्ग एवं युवाओं ने पुतले पर लात-जूते मारकर अपना गुस्सा निकाला। ये उनके नुकसान की पीड़ा थी। ये प्रक्रिया पंद्रह मिनट से भी ज्यादा चली। इसके बाद पुतले का आग के हवाले कर दिया गया।
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पुलिस अधिकारियों पर लगाया जाटों से मिलीभगत का आरोप
पंचनंद के जिला अध्यक्ष बिट्टू चौधरी ने उपायुक्त यश गर्ग को ज्ञापन सौंपते समय पुलिस अधिकारियों पर ट्रैक एवं हाइवे जाम करने की घटनाओं में मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी ने जाटों के बीच खुद जाट होने की बात कही, इससे जाट और उग्र हो गए। इस दौरान वार्ड-12 से पार्षद गुरदयाल नंबरदार ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया तथा घटना की निंदा करते हुए 35 बिरादरी जिंदाबाद के नारे लगाए।
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मुआवजा एवं कार्रवाई नहीं हुई तो करेंगे अनशन
समाज के प्रधान मदनलाल झाम ने कहा कि यदि दंगा पीड़ितों को तय समय के अंदर मुआवजा नहीं मिला और दंगों में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो समाज के लोग लघु सचिवालय के बाहर अनशन करेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के लोग प्यार से रहकर अपना व्यापार करते हैं, लेकिन हमेशा दंगों में उन्हें ही पीड़ित बनाया जाता है।
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पहली बार बंद रहीं पंजाबी समुदाय की सभी दुकानें
रेवाड़ी में पंजाबी समुदाय की पंजाबी मार्केट एवं कपड़ा मार्केट सहित शहर के व्यापार में पचास फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी है। जिले में पंजाबी समुदाय की लगभग आठ हजार दुकानें हैं। इसी के साथ रेवाड़ी में पंजाबी समुदाय की आबादी भी लगभग अस्सी हजार के आसपास है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेवाड़ी में पंजाबी समुदाय की कारोबारी हिस्सेदारी एवं राजनैतिक हिस्सेदारी कितनी अहम है। शुक्रवार को पंजाबी समुदाय के सभी प्रतिष्ठानों के बंद रहने से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। पंजाबी समुदाय के लोगों ने बताया कि यह रेवाड़ी के इतिहास में पहली बार हुआ है कि समुदाय के युवा तथा बुजुर्ग अपना काम छोड़कर सड़कों पर उतरें हो।