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Rewari News: कतार में ट्रैक्टर और मंडी जाम, किसान परेशान
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फोटो : 17अनाज मंडी में लगी ट्रैक्टर की कतार। संवाद
रेवाड़ी। नई अनाज मंडी में बुधवार को किसानों की भारी भीड़ रही। पिछले दो दिनों से लगातार बारिश होने के कारण मंडी का कामकाज प्रभावित था। मौसम साफ होने के बाद किसान अपनी फसल लेकर मंडी पहुंचे जिससे मंडी का माहौल पूरे दिन जाम जैसी स्थिति में तबदील रहा।
चौतरफा ट्रैक्टरों की लंबी कतार लगी रही और किसानों को अपने अनाज का वजन करवाने के लिए लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ा।मंडी में ट्रैक्टरों की कतार सुबह से शाम तक बनी रही। बड़ी गाड़ियों को निकालने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन और मंडी प्रबंधन के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति थी।
किसानों ने बताया कि मंडी में भीड़ इतनी अधिक थी कि सामान्य कामकाज प्रभावित हो गया। पूरा दिन मंडी में बीत गया। वहीं टोकन कटाने के लिए भी किसानों की लाइन लगी रही। इस दौरान पुलिस व्यवस्था बनाने में जुटी रही।
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बुधवार को करीब 1700 गेट पास कटे हैं। बाजरा की आवक लगभग 5 हजार टन रही। हालांकि, सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हुई है। बाजरा की गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर रही है। वहीं, खरीद एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि बाजरा गुणवत्ता पर खरा उतरने के बाद ही खरीदा जाएगा।
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सरकार ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया
कांग्रेस पूर्व विधायक एवं एआईसीसी सचिव चिरंजीव राव ने कहा कि इस समय रेवाड़ी की अनाज मंडी में हालात बेहद खराब हैं। लगातार बारिश से मंडी में बाजरे के कट्टे और ढेर पूरी तरह भीग चुके हैं जबकि सरकार और प्रशासन के पास कोई ठोस प्रबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि मंडी में आए किसानों की हालत देखकर यह साफ झलकता है कि सरकार ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।
किसानों को कई दिनों से मंडी में डटे रहना पड़ रहा है और बारिश से उनकी मेहनत की फसल बर्बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा तय किए गए 2,775 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य के बावजूद किसान मजबूरी में अपनी फसल 1,980 रुपये और उसके आसपास के भाव में बेचने को विवश हैं।
भावांतर योजना के तहत 575 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त राशि दिए जाने की बात कही गई थी लेकिन हकीकत यह है कि कई किसानों को यह राशि महीनों तक नहीं मिलती।
मंडी में तिरपाल तक की व्यवस्था नहीं
चिरंजीव राव ने कहा कि रेवाड़ी मंडी में किसानों की फसल खुले आसमान के नीचे सड़ रही है, मंडी में तिरपाल तक की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2022 में किसानों की आमदनी दोगुनी करने और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था लेकिन आज तक वह वादे सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं। किसानों की मेहनत मिट्टी में मिल रही है और सरकार चंडीगढ़ में बैठकर कागजी दावे कर रही है। राज्य सरकार से मांग की है कि रेवाड़ी समेत पूरे प्रदेश में बाजरे की खरीद तुरंत शुरू की जाए, मंडियों में तिरपाल और भंडारण की व्यवस्था हो, और भावांतर भुगतान में पारदर्शिता लाई जाए।
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चौतरफा ट्रैक्टरों की लंबी कतार लगी रही और किसानों को अपने अनाज का वजन करवाने के लिए लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ा।मंडी में ट्रैक्टरों की कतार सुबह से शाम तक बनी रही। बड़ी गाड़ियों को निकालने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन और मंडी प्रबंधन के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति थी।
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किसानों ने बताया कि मंडी में भीड़ इतनी अधिक थी कि सामान्य कामकाज प्रभावित हो गया। पूरा दिन मंडी में बीत गया। वहीं टोकन कटाने के लिए भी किसानों की लाइन लगी रही। इस दौरान पुलिस व्यवस्था बनाने में जुटी रही।
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बुधवार को करीब 1700 गेट पास कटे हैं। बाजरा की आवक लगभग 5 हजार टन रही। हालांकि, सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हुई है। बाजरा की गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर रही है। वहीं, खरीद एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि बाजरा गुणवत्ता पर खरा उतरने के बाद ही खरीदा जाएगा।
सरकार ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया
कांग्रेस पूर्व विधायक एवं एआईसीसी सचिव चिरंजीव राव ने कहा कि इस समय रेवाड़ी की अनाज मंडी में हालात बेहद खराब हैं। लगातार बारिश से मंडी में बाजरे के कट्टे और ढेर पूरी तरह भीग चुके हैं जबकि सरकार और प्रशासन के पास कोई ठोस प्रबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि मंडी में आए किसानों की हालत देखकर यह साफ झलकता है कि सरकार ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।
किसानों को कई दिनों से मंडी में डटे रहना पड़ रहा है और बारिश से उनकी मेहनत की फसल बर्बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा तय किए गए 2,775 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य के बावजूद किसान मजबूरी में अपनी फसल 1,980 रुपये और उसके आसपास के भाव में बेचने को विवश हैं।
भावांतर योजना के तहत 575 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त राशि दिए जाने की बात कही गई थी लेकिन हकीकत यह है कि कई किसानों को यह राशि महीनों तक नहीं मिलती।
मंडी में तिरपाल तक की व्यवस्था नहीं
चिरंजीव राव ने कहा कि रेवाड़ी मंडी में किसानों की फसल खुले आसमान के नीचे सड़ रही है, मंडी में तिरपाल तक की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2022 में किसानों की आमदनी दोगुनी करने और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था लेकिन आज तक वह वादे सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं। किसानों की मेहनत मिट्टी में मिल रही है और सरकार चंडीगढ़ में बैठकर कागजी दावे कर रही है। राज्य सरकार से मांग की है कि रेवाड़ी समेत पूरे प्रदेश में बाजरे की खरीद तुरंत शुरू की जाए, मंडियों में तिरपाल और भंडारण की व्यवस्था हो, और भावांतर भुगतान में पारदर्शिता लाई जाए।