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उपायुक्त से कहा, फीस जमा न करने पर स्कूल से निकाला
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उपायुक्त से मिलते हुए बच्चे के परिजन।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। हरियाणा सरकार जहां शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है, वहीं कुछ स्कूल वाले सरकार के इस प्रयास व अभियान को पलीता लगा रहे हैं। इसी से तंग आकर पांचवीं के एक छात्र ने उपायुक्त यशेंद्र सिंह को शिकायत कर कहा कि उससे जबरन फीस जमा करने को प्राइवेट स्कूल वाले दबाव बना रहे थे। जब उसने फीस जमा नहीं किया जो उसे स्कूल से ही निकाल दिया गया।
डीसी ने इस मामले पर गंभीरता दिखाई है। बता दें, नियम 134ए के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिले का मौका दिया जाता है ताकि वे विद्यार्थी भी प्राइवेट स्कूलों में पढ़कर अच्छी शिक्षा ग्रहण कर पाएं, लेकिन कुछ स्कूल इस नियम की पलीता लगा रहे हैं।
पता के साथ स्कूल ड्रेस में बच्चे को देख चौंके डीसी
स्कूल से निकाले जाने के बाद बच्चा अपने पिता के साथ स्कूल ड्रेस में डीसी के पास पहुंचा तो वे चौंक गए। उन्होंने उनकी पूरी बात सुनी और कार्रवाई का आश्वासन दिया। इतना ही नहीं उन्होंने रीडर को जिला शिक्षा अधिकारी से बात कर बच्चे की फीस माफ कराने का आदेश दिया। नारनौल रोड स्थित गांव सहारनवास में रहने वाले कुलभूषण ने यशेन्द्र सिंह को दी शिकायत में कहा कि उसने अपने बेटे छविन का दूसरी कक्षा में ही एक स्कूल में नियम 134ए के तहत दाखिला करा दिया था। अब उसका बेटा 5वीं कक्षा में है। सरकार के नियम के अनुसार नियम 134 ए के तहत पहली से 12वीं तक फीस माफ होती है।
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बच्चे की फीस माफ कराएं शिक्षा अधिकारी: डीसी
कुलभूषण का आरोप है कि स्कूल ने मनमाने ढंग से ना केवल फीस देने का दबाव बनाया बल्कि प्रताड़ित भी किया। इतना ही नहीं फीस जमा नहीं कराने पर उसके बेटे छविन को स्कूल से ही निकाल दिया। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि 134ए के नियमों व मौलिक शिक्षा के अधिकार को रखते हुए स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनकी फीस माफ कराई जाए। डीसी ने कुलभूषण और उसके बेटे छविन की बात सुनी और फिर रीडर को तुरंत डीईओ से बात कर स्कूल फीस माफ कराने का आदेश दिया। इस दौरान पिता-पुत्र के साथ समाजसेवी साकेत धींगड़ा भी मौजूद थे।
आते रहते हैं ऐसे मामले
बता दें कि नियम 134ए के तहत प्राइवेट स्कूलों की मनमानी किसी से छुपी नहीं है। हर साल इसी तरह फीस को लेकर जबरन दबाव बनाने के मामले सामने आते रहते हैं। सरकार के साथ-साथ हाईकोर्ट तक नियम 134ए को लेकर कई बार सख्त आदेश दे चुकी है। उसके बावजूद कुछ स्कूल संचालक नियमों को दरकिनार करते हुए बच्चों को फीस के लिए प्रताड़ित करते है।
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डीसी ने इस मामले पर गंभीरता दिखाई है। बता दें, नियम 134ए के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिले का मौका दिया जाता है ताकि वे विद्यार्थी भी प्राइवेट स्कूलों में पढ़कर अच्छी शिक्षा ग्रहण कर पाएं, लेकिन कुछ स्कूल इस नियम की पलीता लगा रहे हैं।
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पता के साथ स्कूल ड्रेस में बच्चे को देख चौंके डीसी
स्कूल से निकाले जाने के बाद बच्चा अपने पिता के साथ स्कूल ड्रेस में डीसी के पास पहुंचा तो वे चौंक गए। उन्होंने उनकी पूरी बात सुनी और कार्रवाई का आश्वासन दिया। इतना ही नहीं उन्होंने रीडर को जिला शिक्षा अधिकारी से बात कर बच्चे की फीस माफ कराने का आदेश दिया। नारनौल रोड स्थित गांव सहारनवास में रहने वाले कुलभूषण ने यशेन्द्र सिंह को दी शिकायत में कहा कि उसने अपने बेटे छविन का दूसरी कक्षा में ही एक स्कूल में नियम 134ए के तहत दाखिला करा दिया था। अब उसका बेटा 5वीं कक्षा में है। सरकार के नियम के अनुसार नियम 134 ए के तहत पहली से 12वीं तक फीस माफ होती है।
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बच्चे की फीस माफ कराएं शिक्षा अधिकारी: डीसी
कुलभूषण का आरोप है कि स्कूल ने मनमाने ढंग से ना केवल फीस देने का दबाव बनाया बल्कि प्रताड़ित भी किया। इतना ही नहीं फीस जमा नहीं कराने पर उसके बेटे छविन को स्कूल से ही निकाल दिया। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि 134ए के नियमों व मौलिक शिक्षा के अधिकार को रखते हुए स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनकी फीस माफ कराई जाए। डीसी ने कुलभूषण और उसके बेटे छविन की बात सुनी और फिर रीडर को तुरंत डीईओ से बात कर स्कूल फीस माफ कराने का आदेश दिया। इस दौरान पिता-पुत्र के साथ समाजसेवी साकेत धींगड़ा भी मौजूद थे।
आते रहते हैं ऐसे मामले
बता दें कि नियम 134ए के तहत प्राइवेट स्कूलों की मनमानी किसी से छुपी नहीं है। हर साल इसी तरह फीस को लेकर जबरन दबाव बनाने के मामले सामने आते रहते हैं। सरकार के साथ-साथ हाईकोर्ट तक नियम 134ए को लेकर कई बार सख्त आदेश दे चुकी है। उसके बावजूद कुछ स्कूल संचालक नियमों को दरकिनार करते हुए बच्चों को फीस के लिए प्रताड़ित करते है।