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Rewari News: झाबुआ के जंगल में बाघ, ग्रामीणों में खौफ

Mon, 04 Nov 2024 01:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Mon, 04 Nov 2024 01:43 AM IST
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Tiger in Jhabua forest, fear among villagers
रेवाड़ी। गांव झाबुआ में पंचायत करते 11 गांवों के सरपंच प्रतिनिधी। संवाद
बावल(रेवाड़ी)। ढाई महीनों से सरिस्का से आया बाघ झाबुआ के जंगलों में घूम रहा है, लेकिन अभी तक वन विभाग की पकड़ में नहीं आया है। रविवार को करीब 11 गांव के सरपंचों और प्रतिनिधियों ने इसे लेकर पंचायत की।
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पंचायत में फैसला लिया गया कि डीसी और एसडीएम को जल्द ही ज्ञापन दिया जाएगा। प्रशासन के आश्वासन के बाद सरपंच निर्णय लेंगे कि किस तरह से समस्या से छुटकारा पाया जाए। यदि प्रशासनिक अधिकारी कोई ठोस आश्वासन नहीं देंगे तो जल्द ही बड़ा फैसला लिया जाएगा।
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पंचायत में झाबुआ सरपंच मनोज, मीर सिंह खिजूरी, लाल सिंह, नितेश आदि ने कहा कि प्रशासन ढाई महीने से बाघ को पकड़ने के लिए डेरा डाले हुए है, लेकिन चार दिन पहले भी बाघ को घूमते देखा गया था। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ ने बुलडोजर पर भी हमला किया, जिससे उसके शीशे टूट गए थे। कहा कि प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी यहां पिकनिक मनाने आए हैं। डर के साये में बाजरे की फसल कटी है। अब गेहूं और सरसों की बिजाई के समय लोग खेतों में जाने से डरने लगे हैं।
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लोगो का कहना है कि रात को शांत वातावरण में बाघ जंगल से बाहर निकलता है। बीहड़ के आसपास बणी और ढाणियों में लोग रहते हैं। इन्हें बाघ का खतरा सताता रहता है। बता दें कि बाघ को पकड़ने के लिए विशेष पिंजरे भी मंगवाए गए थे। उप मंडल अधिकारी ने वन मंडल अधिकारी को पत्र लिखकर बाघ को पकड़ने के निर्देश दिए थे, लेकिन स्थिति जस की तस है।

इंसेट
सीसीटीवी कैमरे में दिख रहा बाघ, फिर भी पकड़ से दूर
ग्रामीणों ने कहा कि पहले भी वे कई बार वन अधिकारियों को बाघ को जंगल से पकड़कर लेकर जाने की मांग कर चुके हैं। एक दर्जन गावों के लोग खेती पर निर्भर हैं। बीहड़ के चारों तरफ रहने वाले लोगों में बाघ के हमले का डर बना रहता है। रात को कंपनी में ड्यूटी करने वाले लोगों ने जाना बंद कर दिया है। बाघ ने कई आवारा पशुओं को घायल कर दिया है। सीसीटीवी कैमरे में बाघ की गतिविधियों को साफ देखा जा रहा है। ग्रामीणों को डर है की बाघ कभी भी उन पर हमला कर सकता है।


बाघ के खौफ से झाबुआ और आसपास बदला माहौल
जंगल में एक से लेकर 10 तक कंपार्टमेंट बनाए हुए हैं। इन्हीं कंपार्टमेंट में बाघ मौजूद है। झाबुआ व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में माहौल बदल चुका है। लोग घर से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। लोगों को अक्सर यही लगता है कि कहीं बाघ उन पर हमला न कर दे, क्योंकि बाघ अभी तक पकड़ा नहीं गया है। डर के साए में ग्रामीणों की रात कट रही है। लोगों की दिनचर्या भी अब पहले जैसी नहीं रही। जहां लोग सुबह के समय जल्दी उठकर खेतों में जाया करते थे या सैर के लिए निकलते थे, अब ऐसा नहीं है। अगर लोग खेतों में भी जा रहे हैं तो वह भी दिन में डरे सहमे घर से निकल रहे हैं। फिलहाल जब तक बाघ नहीं पकड़ा जाता तब तक गांव में स्थिति इसी प्रकार की रहेगी।



10 महीने पहले बाघ जंगल से निकलकर गया था रेवाड़ी
गौरतलब है कि 10 महीने पहले भी यह बाघ सरिस्का के जंगल से निकलकर रेवाड़ी तक चला आया था। उस समय हरियाणा बॉर्डर के आसपास गांव में वनकर्मियों पर हमला कर दिया था, जिसमें एक वनकर्मी को दबोच लिया था, लेकिन वह बच गया था। वहीं फॉरेस्टर बेहोश हो गया था। उससे पहले कोटकासिम के पास एक किसान पर हमला किया था। एक नीलगाय को खाने की भी पुष्टि हुई थी। इस बार खैरथल-तिजारा जिले में 4 लोगों पर बाघ ने हमला किया था। रेवाड़ी में अभी तक बाघ ने किसी व्यक्ति पर हमला नहीं किया है।
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