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डाबड़ी की यही कहानी, जरूरी सुविधाएं फेल, नहीं मिल रहा पीने को पानी

Sun, 16 Oct 2022 11:18 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 16 Oct 2022 11:18 PM IST
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This is the story of Dabri, essential facilities fail, drinking water is not available
डाबड़ी गांव में टूटा पड़ा हैंडपंप। संवाद - फोटो : Rewari
रेवाड़ी। रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र का गांव डाबड़ी आदर्श गांव की सूची में शामिल है, लेकिन यहां के लोग जरूरी सुविधाओं से वंचित हैं। विकास कार्यों पर 72 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी यहां पेयजल आपूर्ति का अभाव, स्वास्थ्य केंद्र, पशु अस्पताल, डाकघर, सीएससी, पुस्तकालय, सार्वजनिक पार्क और खिलाड़ियों के लिए खेल का मैदान तक नहीं है। गांव का पंचायत भवन तक बदहाल है। गांव में नियमित सफाई तक नहीं होती है। इसे लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब चुनाव आता है तो नेता यहां आकर तरह-तरह की घोषणाएं करते हैं, लेकिन उसे अमली जामा तक नहीं पहनाते हैं। चुनाव खत्म होते ही यहां कोई झांकने तक नहीं आता है। अब फिर चुनाव आ गया है तो नेता आने शुरू हो गए हैं। वे घोषणाओं की झड़ी लगा रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने के कारण तबीयत खराब होने पर लोगों नागरिक अस्पताल जाना होता है। इससे परेशानी होती है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यह गांव जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर रेवाड़ी-पटौदी राज्य मार्ग से करीब 800 मीटर दूर उत्तर दिशा में स्थित है। गांव में बीपीएल परिवारों को मिलने वाले 75 रिहायशी प्लाटों की रजिस्ट्रियां संबंधित लाभपात्रों को मिलने के बावजूद आज तक उन पर कब्जा नहीं मिल पाया है। ऐसे में प्लाटों पर मकान का निर्माण तक नहीं हो पाया है। यह गांव पंचायत के अधीन अधिकतर रास्ते पक्के बने हुए हैं, मगर एक-दो रास्तों का निर्माण यथास्थिति बनाए रखने के आदेश की वजह से रुका हुआ है। यहां गांव में आंगनबाड़ी केंद्र और राजकीय प्राथमिक पाठशाला उपलब्ध है। गांव में अधिकतर लोग मेहनत मजदूरी करते हैं।
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सुचारु जलापूर्ति है गांव का प्रमुख मुद्दा
ग्रामीणों ने बताया कि गांव की प्रमुख समस्या बेहतर पेयजल आपूर्ति का नहीं होना है। यह समस्या गांव का प्रमुख मुद्दों में से एक है। इसका समाधान होना जरूरी है। इससे महिलाएं अधिक परेशान हैं। उनका कहना है कि गांव के लिए सरकार ने जलापूर्ति की व्यवस्था की थी, मगर वहां लाखों रुपये खर्च करने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग को रेल लाइन के नीचे से वाटर पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप डालने की मंजूरी आज तक नहीं मिली, हालांकि विभाग मामले में रेलवे के पास जरूरी धनराशि जमा करा चुका है। आलम यह है कि गांव में कुंभावास गांव से ग्रामीण महिलाएं अपने बच्चों के माध्यम से बोतल और अन्य बर्तनों में पीने के लिए पानी मंगवाती हैं। गांव में उपलब्ध पानी का इस्तेमाल घरेलू कामों में ही होता है। गांव में आने वाले पानी में चाय बनाने पर वह फट जाती है। इसलिए चाय-पानी पूछने में भी ग्रामीण संकोच करते हैं।
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गांव में 450 से अधिक हैं मतदाता
गांव की आबादी करीब साढ़े छह सौ और साढ़े चार सौ से अधिक मतदाता हैं। ग्राम पंचायत के लिए सरपंच और छह पंच चुने जाते हैं। निवर्तमान महिला सरपंच ज्योति कुमारी हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव में हरियाणा के गठन के बाद से अब तक इस गांव के किसी व्यक्ति ने चुनाव नहीं लड़ा।
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ग्रामीण बोले-नहीं होती नियमित सफाई, पंचायत अधिकारी नहीं देते ध्यान
गांव की दो बड़ी समस्याएं हैं, पहला यहां नियमित सफाई नहीं होना, दूसरा खराब पेयजल आपूर्ति। पंचायत अधिकारियों को पंचों ने सहयोग देने की कोशिश की, मगर उनकी बात नहीं सुनी गई। पंचायत अधिकारी इस ओर ध्यान तक नहीं देते हैं। विकास में पिछड़ने की यही वजह है।
- भगवत पंच
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गांव में पेयजल की बड़ी समस्या है, इसका काफी सालों से समाधान नहीं हुआ। इससे सबसे अधिक महिलाएं परेशान हैं। उन्हें घरेलू कार्यों और अन्य काम के लिए पानी की आवश्यकता होती है। वे बच्चों से दूसरे गांवों में भेजकर पीने के लिए पानी मंगाती हैं। नेताओं, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्या का समाधान कराना चाहिए।
- सागर
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गांव में सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। आम रास्तों में घास उगी हुई है। सांसद, विधायक, जिला पार्षद और पंचायत समिति सदस्य गांव में देखने ही नहीं आए। पेयजल की समस्या है। हर बार चुनाव में पेयजल समस्या का मुद्दा उठाया जाता है, लेकिन इसका अब तक समाधान नहीं हो सका है।
- सुभाष
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सरकारी सुविधाओं का समुचित लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा। पंचायत भवन बदहाल है। पेयजल की समस्या सबसे बड़ी है। अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने से लोगों को नागरिक अस्पताल तक जाना होता है। इससे उनकी आर्थिक हानि के साथ ही समय की बर्बादी होती है। समस्या जस की तस बनी हुई है।

- सूबे सिंह।
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महिला सरपंच बोलीं
गांव की ओर से सरपंच पद की जिम्मेदारी मिली है। पांच साल से अधिक समय तक लोगों की सेवा की। विकास कार्यों पर 72 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। गांव में पीने के पानी की समस्या है। सफाई को लेकर कर्मचारी सही ढंग से काम नहीं करता है। 75 लोगों को बीपीएल प्लाटों की रजिस्ट्री मिल गई है, मगर पंचायत की 12 एकड़ जमीन पर एक व्यक्ति का कब्जा है और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। हमने 22 स्ट्रीट लाइटें लगवाने के साथ ही वाल्मीकि चौपाल का निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्र की चहारदीवारी और स्कूल के सामने लोहे की ग्रिल लगवाई। पक्के रास्तों का निर्माण कराया। सरकार ने रेल लाइन के दूसरी ओर जलापूर्ति केंद्र बनाया, मगर रेलवे की ओर से लाइन के नीचे से पाइप लाइन डालने की अभी अनुमति नहीं दी है और यह मामला अभी चल रहा है।
-ज्योति कुमारी, महिला सरपंच डाबड़ी।
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