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Rewari News: गांवों में खेल प्रतिभाओं की नहीं, प्रशिक्षकों की है कमी
Sun, 17 Nov 2024 12:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sun, 17 Nov 2024 12:03 AM IST
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फोटो: 16रेवाड़ी। कोसली में तैयार खेल स्टेडियम। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कोसली। उपमंडल के गांवों में खेल प्रतिभाओं की नहीं बल्कि प्रशिक्षकों की कमी है। कोच की कमी के चलते खिलाड़ी ठीक से अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं। उपमंडल में सिर्फ दो कोच हैं जो नेहरूगढ़ और कोसली स्थित स्टेडियम में प्रशिक्षण दे रहे हैं। अन्य दो स्टेडियम में कोच नहीं हैं।
उपमंडल के विभिन्न गांवों में चार स्टेडियम बनाए गए हैं। उपमंडल मुख्यालय पर स्थित स्टेडियम में कबड्डी, क्रिकेट, हॉकी, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल के खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें बेहतर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। हाॅकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स, कुश्ती, बॉक्सिंग के कोच नहीं हैं। जिले की हर उपमंडल में खेल प्रतिभाओं को संसाधन उपलब्ध होने चाहिए ताकि वह भी टीम में जगह बनाने के योग्य बन सकें। प्रत्येक खेल के प्रशिक्षक की भर्ती, खेल स्टेडियमों के रखरखाव और खिलाड़ियों को संसाधन देने पर ही यहां के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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स्कूलों में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्हें निखारने की जरूरत है। अभिभावक बच्चों को खेलों में भेजना चाहते हैं, लेकिन भेजने का रास्ता दिखाने वाला कोई नहीं है।-आनंद यादव, कबड्डी खिलाड़ी।
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करोड़ों की लागत से स्टेडियम तो बन गए लेकिन कोच नहीं होने से अच्छे खिलाड़ी तैयार नहीं हो रहे हैं। गांवों में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बल्कि कोच की कमी है। बिना गुरु ज्ञान कहां से होगा। -रमेश कुमार, पूर्व कुश्ती खिलाड़ी
वॉलीबॉल के प्रति बच्चों का रुझान है। पूर्व खिलाड़ियों ने एक कमेटी बनाई है जिसमें चंदा एकत्रित कर बच्चों को सामान दिया जाता है। उपमंडल में खेल का विकास करना है तो कोच और संसाधन उपलब्ध कराना होगा। -बिजेंद्र, कबड्डी खिलाड़ी।
वर्जन
कोच लाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। नेहरूगढ़ में वॉलीबॉल के कोच आ गए हैं। उपमंडल मुख्यालय पर स्टेडियम के अलावा राजीव गांधी खेल स्टेडियमों के लिए भी कोच लेकर आएंगे।-मदनपाल, जिला खेल अधिकारी रेवाड़ी।
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कोसली। उपमंडल के गांवों में खेल प्रतिभाओं की नहीं बल्कि प्रशिक्षकों की कमी है। कोच की कमी के चलते खिलाड़ी ठीक से अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं। उपमंडल में सिर्फ दो कोच हैं जो नेहरूगढ़ और कोसली स्थित स्टेडियम में प्रशिक्षण दे रहे हैं। अन्य दो स्टेडियम में कोच नहीं हैं।
उपमंडल के विभिन्न गांवों में चार स्टेडियम बनाए गए हैं। उपमंडल मुख्यालय पर स्थित स्टेडियम में कबड्डी, क्रिकेट, हॉकी, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल के खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें बेहतर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। हाॅकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स, कुश्ती, बॉक्सिंग के कोच नहीं हैं। जिले की हर उपमंडल में खेल प्रतिभाओं को संसाधन उपलब्ध होने चाहिए ताकि वह भी टीम में जगह बनाने के योग्य बन सकें। प्रत्येक खेल के प्रशिक्षक की भर्ती, खेल स्टेडियमों के रखरखाव और खिलाड़ियों को संसाधन देने पर ही यहां के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
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स्कूलों में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्हें निखारने की जरूरत है। अभिभावक बच्चों को खेलों में भेजना चाहते हैं, लेकिन भेजने का रास्ता दिखाने वाला कोई नहीं है।-आनंद यादव, कबड्डी खिलाड़ी।
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करोड़ों की लागत से स्टेडियम तो बन गए लेकिन कोच नहीं होने से अच्छे खिलाड़ी तैयार नहीं हो रहे हैं। गांवों में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बल्कि कोच की कमी है। बिना गुरु ज्ञान कहां से होगा। -रमेश कुमार, पूर्व कुश्ती खिलाड़ी
वॉलीबॉल के प्रति बच्चों का रुझान है। पूर्व खिलाड़ियों ने एक कमेटी बनाई है जिसमें चंदा एकत्रित कर बच्चों को सामान दिया जाता है। उपमंडल में खेल का विकास करना है तो कोच और संसाधन उपलब्ध कराना होगा। -बिजेंद्र, कबड्डी खिलाड़ी।
वर्जन
कोच लाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। नेहरूगढ़ में वॉलीबॉल के कोच आ गए हैं। उपमंडल मुख्यालय पर स्टेडियम के अलावा राजीव गांधी खेल स्टेडियमों के लिए भी कोच लेकर आएंगे।-मदनपाल, जिला खेल अधिकारी रेवाड़ी।