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Rewari News: व्यवस्था कचरा...किताबों की जगह शिक्षक-बच्चों के हाथ में झाड़ू
Mon, 16 Sep 2024 03:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 16 Sep 2024 03:04 AM IST
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फोटो : 07रेवाड़ी। जिले के एक सरकारी स्कूल में झाडू लगाते बच्चे व शिक्षक। संवाद
सौरभ जायसवाल
रेवाड़ी। सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधारने के प्रयास भले ही किए जा रहे हों लेकिन संसाधनों के अभाव में अधिकतर स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्राथमिक स्कूलों सफाई कर्मचारी की नियुक्ति नहीं होने से बच्चों को प्रतिदिन शिक्षकों के साथ मिलकर स्कूल में झाड़ू लगाना पड़ता है। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
राजकीय प्राथमिक पाठशाला कान्हड़वास में सफाईकर्मी नहीं होने के कारण स्कूल पहुंचते ही विद्यार्थियों को पढ़ाई से पहले सफाई करनी होती है। स्कूल खुलते ही बच्चे अपने शिक्षकों के साथ मिलकर कक्षाओं और परिसर में झाड़ू लगाते हैं। इसके बाद कक्षाएं शुरू होती हैं। अध्यापकों व बच्चों का कहना है कि अगर सफाई नहीं करेंगे तो गंदगी में ही पढ़ाई करनी होगी।
अध्यापकों का कहना है कि किसी विद्यालय में सफाई कर्मचारी तो कहीं चौकीदार नहीं है। ऐसे में बच्चे अपने शिक्षकों के साथ मिलकर सफाई करते हैं। इससे बच्चों की ड्रेस गंदी हो जाती है। वहीं चौकीदार ना होने से विद्यालयों में चोरी की घटनाएं होती हैं।
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प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान धर्मेंद्र यादव ने बताया कि जिले के अधिकतर विद्यालयों में सफाईकर्मी नहीं होने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालयों में सफाई नहीं रहने से शिक्षा ग्रहण करने का वातावरण नहीं बन पाता है। इसके कारण विद्यार्थी निजी विद्यालयों को प्राथमिकता देते हैं। विद्यार्थी उनसे बता चुके हैं कि उन्हें खुद ही विद्यालयों में सफाई करनी पड़ती है। प्रशासन को स्कूलों में सफाई कर्मचारी की नियुक्त करनी चाहिए।
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रेवाड़ी। सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधारने के प्रयास भले ही किए जा रहे हों लेकिन संसाधनों के अभाव में अधिकतर स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्राथमिक स्कूलों सफाई कर्मचारी की नियुक्ति नहीं होने से बच्चों को प्रतिदिन शिक्षकों के साथ मिलकर स्कूल में झाड़ू लगाना पड़ता है। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है।
राजकीय प्राथमिक पाठशाला कान्हड़वास में सफाईकर्मी नहीं होने के कारण स्कूल पहुंचते ही विद्यार्थियों को पढ़ाई से पहले सफाई करनी होती है। स्कूल खुलते ही बच्चे अपने शिक्षकों के साथ मिलकर कक्षाओं और परिसर में झाड़ू लगाते हैं। इसके बाद कक्षाएं शुरू होती हैं। अध्यापकों व बच्चों का कहना है कि अगर सफाई नहीं करेंगे तो गंदगी में ही पढ़ाई करनी होगी।
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अध्यापकों का कहना है कि किसी विद्यालय में सफाई कर्मचारी तो कहीं चौकीदार नहीं है। ऐसे में बच्चे अपने शिक्षकों के साथ मिलकर सफाई करते हैं। इससे बच्चों की ड्रेस गंदी हो जाती है। वहीं चौकीदार ना होने से विद्यालयों में चोरी की घटनाएं होती हैं।
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प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान धर्मेंद्र यादव ने बताया कि जिले के अधिकतर विद्यालयों में सफाईकर्मी नहीं होने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालयों में सफाई नहीं रहने से शिक्षा ग्रहण करने का वातावरण नहीं बन पाता है। इसके कारण विद्यार्थी निजी विद्यालयों को प्राथमिकता देते हैं। विद्यार्थी उनसे बता चुके हैं कि उन्हें खुद ही विद्यालयों में सफाई करनी पड़ती है। प्रशासन को स्कूलों में सफाई कर्मचारी की नियुक्त करनी चाहिए।