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भावांतर भरपाई योजना के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में हुई धांधली: योगेंद्र
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किसानों के मुलाकात करते स्वराज इंडिया पार्टी संयोजक योगेंद्र यादव।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। जय किसान आंदोलन के संस्थापक योगेंद्र यादव ने रविवार को गंगायचा टोल प्लाजा पर संयुक्त किसान मोर्चा के साथियों के साथ मिलकर आगामी कार्यक्रम की चर्चा की। योगेंद्र ने बताया कि इस दौरे में यह भी स्पष्ट हुआ कि भावांतर भरपाई योजना के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में भारी धांधली हुई है। सरकारी खरीद की अनिश्चितता और ऑनलाइन सुविधा की कमी के चलते अनेक किसान रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाए। जिन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया उनमें से बड़ी संख्या में किसानों के दावे बिना मौके पर जांच किए खारिज कर दिए गए।
कहा, जिस खेत में बाजरा लगा था उसमें सरकार ने कोई अन्य फसल लगी होने या फिर खेत खाली होने का फैसला सुना दिया। बड़ी संख्या में किसान मुआवजा पाने से वंचित रहे और उन्हें प्रति क्विंटल 800 से 1000 रुपये तक का नुकसान हुआ। भावांतर भुगतान योजना के तहत बाजरा किसानों की 300 करोड़ रुपये की लूट हुई। इसलिए किसान आंदोलन हरियाणा सरकार से मांग की कि वह इन तमाम अनियमितताओं की नए सिरे से जांच करवाएं और सभी पात्र किसानों को मुआवजे की राशि भेजी जाए। हरियाणा सरकार द्वारा बाजरा की फसल की सरकारी खरीद की जगह भावांतर भरपाई की योजना से प्रदेश के किसानों की लगभग 300 करोड़ रुपये की लूट हुई है।
बाजरा उत्पादक जिलों (रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी) की मंडियों का दौरा करने के बाद योगेंद्र यादव ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने चोरी छुपे न्यूनतम समर्थन मूल्य को 2,250 रुपए प्रति क्विंटल से घटाकर 2,000 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। भारत सरकार ने बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2250 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया था। लेकिन हरियाणा सरकार ने इस रेट पर खरीदने से पल्ला झाड़ते हुए एक नई ‘भावांतर भरपाई’ योजना की घोषणा की। किसान को कहा गया कि वह अपनी फसल बाजार में बेचे और उसे कम रेट मिलने के भरपाई के रूप में सरकार रजिस्ट्रेशन करने वाले किसानों के अकाउंट में औसत पैदावार के आधार पर सीधा 600 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसा भेज देगी।
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कहा, जिस खेत में बाजरा लगा था उसमें सरकार ने कोई अन्य फसल लगी होने या फिर खेत खाली होने का फैसला सुना दिया। बड़ी संख्या में किसान मुआवजा पाने से वंचित रहे और उन्हें प्रति क्विंटल 800 से 1000 रुपये तक का नुकसान हुआ। भावांतर भुगतान योजना के तहत बाजरा किसानों की 300 करोड़ रुपये की लूट हुई। इसलिए किसान आंदोलन हरियाणा सरकार से मांग की कि वह इन तमाम अनियमितताओं की नए सिरे से जांच करवाएं और सभी पात्र किसानों को मुआवजे की राशि भेजी जाए। हरियाणा सरकार द्वारा बाजरा की फसल की सरकारी खरीद की जगह भावांतर भरपाई की योजना से प्रदेश के किसानों की लगभग 300 करोड़ रुपये की लूट हुई है।
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बाजरा उत्पादक जिलों (रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी) की मंडियों का दौरा करने के बाद योगेंद्र यादव ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने चोरी छुपे न्यूनतम समर्थन मूल्य को 2,250 रुपए प्रति क्विंटल से घटाकर 2,000 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। भारत सरकार ने बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2250 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया था। लेकिन हरियाणा सरकार ने इस रेट पर खरीदने से पल्ला झाड़ते हुए एक नई ‘भावांतर भरपाई’ योजना की घोषणा की। किसान को कहा गया कि वह अपनी फसल बाजार में बेचे और उसे कम रेट मिलने के भरपाई के रूप में सरकार रजिस्ट्रेशन करने वाले किसानों के अकाउंट में औसत पैदावार के आधार पर सीधा 600 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसा भेज देगी।
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