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बिजली के तारों का जाल बन रहा जी का जंजाल
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पुरानी तहसील रोड पर बिछा तारों का जाल।
- फोटो : Rewari
रेवाड़ी। शहर में बिजली के तारों का जाल लोगों के जी का जंजाल बना हुआ है। क्षेत्र में लोगों की पहुंच तक ट्रांसफार्मर, मीटर बाक्स और खंभे पर कम ऊंचाई पर ही तार लगा गए हैं। इससे अक्सर हादसा होने की आशंका बनी रहती है। वहीं, कई बार घटना भी घट चुकी है। पिछले माह भी बावल रोड पर करंट लगने से एक गाय की मौत हो गई थी। निगम ने एक बार शहर में ट्रांसफार्मर के चारों ओर जाली की ग्रिल लगाकर सुरक्षा घेरा बनाने की शुरूआत की थी, परंतु चंद कदम आगे बढ़ाने के बाद बंद कर दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि मामले की शिकायत के बाद भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से इस पर ध्यान देने की मांग की है।
शहर में घनी आबादी वाले पुराने शहर, बाजार, बावल रोड, गढ़ी बोलनी रोड, भाड़ावास रोड, महेंद्रगढ़-नारनौल रोड के साथ पॉश रिहायशी क्षेत्रों सहित लगभग हर जगह स्थिति एक जैसी है। गली व सड़क के चौक चौराहों व रिहायशी क्षेत्रों में खाली पड़े प्लाटों के पास शहर में जगह-जगह ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं। चुनिंदा स्थानों को छोड़कर अधिकतर ट्रांसफार्मर पर बिजली की केबल का जाल बिछा रहता है। इनमें से अधिकतर केबल के तार नंगे होते हैं। ऊंचाई कम होने से एक छोटा बच्चा भी आसानी से छू सकता है। इतना ही कई स्थानों पर तो इंनपुट व आउटपुट (ट्रांसफार्मर से निकलने व आगे बिजली सप्लाई देने वाली) कनेक्शन भी दो से तीन फीट की ऊंचाई पर लगे मिलते हैं। जमीन से लिए गए अर्थिंग के तार को भी खुला छोड़ने में कर्मचारी कोई संकोच नहीं दिखाते। इससे तारों के संपर्क में आने से अक्सर हादसे होते रहते हैं।
बिजली तार अंडरग्राउंड करने को मिले 9 करोड़ लौटाए
बाजारों से लेकर सर्कुलर रोड पर भीड़ के बीच लटकते बिजली की तारों को देखते हुए वर्ष 2015 में उस समय के विधायक रहे रणधीर सिंह कापड़ीवास की मांग पर सीएम ने बिजली की तारों को अंडरग्राउंड करने के लिए बजट देने की घोषणा की थी। प्रथम चरण में 9 करोड़ रुपये आवंटित भी हुए। पांच साल तक सर्वे भी चला, लेकिन 2020 में प्रोजेक्ट को फिजिबल नहीं होने की बात कहकर राशि को लौटा दिया गया। वहीं, गुरुग्राम में अनेक स्थानों पर बिजली की तारों को अंडरग्राउंड किया गया है, लेकिन यहां पर अधिकारियों ने जवाबदेही से बचने के लिए प्रोजेक्ट को लाल झंडी दिखा दी।
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ये हुए हैं हादसे
- गत दिसंबर के पहले सप्ताह में करंट लगने से एक गाय की मौत हो गई थी।
- 2019 के मानसून सीजन में बारिश के दौरान शहर के नागरिक अस्पताल में दवाई लेने आए एक व्यक्ति की भी ट्रांसफार्मर की चपेट में आने से मौत हो गई थी। उस समय के डीसी रहे अशोक शर्मा ने बिजली निगम को 15 दिन के अंदर सभी ट्रांसफार्मर की फेसिंग करने के आदेश दिए थे, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।
-30 जुलाई 2020 को शहर के मोहल्ला कुतुबपुर में बिजली के तारों को छूने से एक युवक की मौत
-27 अगस्त 2020 को गांव राजगढ़ में खुले बिजली के तारों को छूने से दो युवकों की मौत
-करीब दो साल पूर्व मोहल्ला उत्तमह नगर में खुले तारों की चपेट में आने से युवक की मौत
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कोट
ट्रांसफार्मर नीचे रहने से हादसों का खतरा रहता है। निगम की ओर से ऐसे ट्रांसफार्मर को चिह्नित कर बैरिकेडिंग कराई जाती है। कुछ दिन पहले ही शहर रेवाड़ी कार्यकारी अभियंता का चार्ज संभाला है। वीरवार को ही एक टीम बनाकर पूरे शहर में ऐसे प्वाइंट चिह्नित कराए जाएंगे। यदि किसी भी व्यक्ति को ऐसे ट्रांसफार्मर दिखाई देते हैं तो फोटो व पता निगम के पास भेज सकते हैं। जहां पर सबसे जरूरी है, सबसे पहले ऐसे ट्रांसफार्मर की जल्द से जल्द फेंसिंग करा दी जाएगी।
-एमएल रोहिल्ला, एससी बिजली विभाग रेवाड़ी।
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शहर में घनी आबादी वाले पुराने शहर, बाजार, बावल रोड, गढ़ी बोलनी रोड, भाड़ावास रोड, महेंद्रगढ़-नारनौल रोड के साथ पॉश रिहायशी क्षेत्रों सहित लगभग हर जगह स्थिति एक जैसी है। गली व सड़क के चौक चौराहों व रिहायशी क्षेत्रों में खाली पड़े प्लाटों के पास शहर में जगह-जगह ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं। चुनिंदा स्थानों को छोड़कर अधिकतर ट्रांसफार्मर पर बिजली की केबल का जाल बिछा रहता है। इनमें से अधिकतर केबल के तार नंगे होते हैं। ऊंचाई कम होने से एक छोटा बच्चा भी आसानी से छू सकता है। इतना ही कई स्थानों पर तो इंनपुट व आउटपुट (ट्रांसफार्मर से निकलने व आगे बिजली सप्लाई देने वाली) कनेक्शन भी दो से तीन फीट की ऊंचाई पर लगे मिलते हैं। जमीन से लिए गए अर्थिंग के तार को भी खुला छोड़ने में कर्मचारी कोई संकोच नहीं दिखाते। इससे तारों के संपर्क में आने से अक्सर हादसे होते रहते हैं।
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बिजली तार अंडरग्राउंड करने को मिले 9 करोड़ लौटाए
बाजारों से लेकर सर्कुलर रोड पर भीड़ के बीच लटकते बिजली की तारों को देखते हुए वर्ष 2015 में उस समय के विधायक रहे रणधीर सिंह कापड़ीवास की मांग पर सीएम ने बिजली की तारों को अंडरग्राउंड करने के लिए बजट देने की घोषणा की थी। प्रथम चरण में 9 करोड़ रुपये आवंटित भी हुए। पांच साल तक सर्वे भी चला, लेकिन 2020 में प्रोजेक्ट को फिजिबल नहीं होने की बात कहकर राशि को लौटा दिया गया। वहीं, गुरुग्राम में अनेक स्थानों पर बिजली की तारों को अंडरग्राउंड किया गया है, लेकिन यहां पर अधिकारियों ने जवाबदेही से बचने के लिए प्रोजेक्ट को लाल झंडी दिखा दी।
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ये हुए हैं हादसे
- गत दिसंबर के पहले सप्ताह में करंट लगने से एक गाय की मौत हो गई थी।
- 2019 के मानसून सीजन में बारिश के दौरान शहर के नागरिक अस्पताल में दवाई लेने आए एक व्यक्ति की भी ट्रांसफार्मर की चपेट में आने से मौत हो गई थी। उस समय के डीसी रहे अशोक शर्मा ने बिजली निगम को 15 दिन के अंदर सभी ट्रांसफार्मर की फेसिंग करने के आदेश दिए थे, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।
-30 जुलाई 2020 को शहर के मोहल्ला कुतुबपुर में बिजली के तारों को छूने से एक युवक की मौत
-27 अगस्त 2020 को गांव राजगढ़ में खुले बिजली के तारों को छूने से दो युवकों की मौत
-करीब दो साल पूर्व मोहल्ला उत्तमह नगर में खुले तारों की चपेट में आने से युवक की मौत
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कोट
ट्रांसफार्मर नीचे रहने से हादसों का खतरा रहता है। निगम की ओर से ऐसे ट्रांसफार्मर को चिह्नित कर बैरिकेडिंग कराई जाती है। कुछ दिन पहले ही शहर रेवाड़ी कार्यकारी अभियंता का चार्ज संभाला है। वीरवार को ही एक टीम बनाकर पूरे शहर में ऐसे प्वाइंट चिह्नित कराए जाएंगे। यदि किसी भी व्यक्ति को ऐसे ट्रांसफार्मर दिखाई देते हैं तो फोटो व पता निगम के पास भेज सकते हैं। जहां पर सबसे जरूरी है, सबसे पहले ऐसे ट्रांसफार्मर की जल्द से जल्द फेंसिंग करा दी जाएगी।
-एमएल रोहिल्ला, एससी बिजली विभाग रेवाड़ी।