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Rewari News: प्लेटफार्म पर बिना लाइसेंस के खाद्य सामग्री बेचने पर कोर्ट ने लगाया 1 हजार रुपये का जुर्माना
Sat, 27 Dec 2025 12:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 27 Dec 2025 12:04 AM IST
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रेवाड़ी। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर बिना लाइसेंस के खाद्य सामग्री बेचने के मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जोगिंद्री की अदालत ने आतताबाद निवासी श्यामसुंदर को दोषी ठहराते हुए एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
मामला रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) थाने से जुड़ा है। 21 सितंबर को रेलवे स्टेशन रेवाड़ी के प्लेटफार्म नंबर तीन पर जांच के दौरान आरोपी श्यामसुंदर को बिना रेलवे प्रशासन से अनुमति या वैध लाइसेंस के खाद्य सामग्री बेचते हुए पाया गया था। आरपीएफ ने कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 144 के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
शिकायत को 17 दिसंबर को अदालत में प्रस्तुत किया गया जिस पर उसी दिन मामले को पंजीकृत कर सुनवाई की गई। आरोपी को अदालत में पेश किया गया। आरोपी की ओर से विधिक सहायता अधिवक्ता उपस्थित रहे जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से रेलवे के लिए सहायक लोक अभियोजक ने पक्ष रखा।
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अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला पाए जाने पर आरोपी को आरोप का नोटिस दिया। नोटिस मिलने के बाद आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और किसी प्रकार के ट्रायल की मांग नहीं की।
आरोपी के दोष स्वीकार करने के आधार पर अदालत ने उसे दोषी ठहराया। इसके बाद सजा के प्रश्न पर दोनों पक्षों की दलीलों को सुना गया। सुनवाई के बाद अदालत ने दोषी को एक हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई। आदेश में यह भी कहा गया कि यदि जुर्माने की राशि अदा नहीं की जाती है तो दोषी को सात दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा। हालांकि, आरोपी ने अदालत में जुर्माने की राशि जमा कर दी। इसके बाद अदालत ने उसे तत्काल रिहा करने के आदेश दिया।
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मामला रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) थाने से जुड़ा है। 21 सितंबर को रेलवे स्टेशन रेवाड़ी के प्लेटफार्म नंबर तीन पर जांच के दौरान आरोपी श्यामसुंदर को बिना रेलवे प्रशासन से अनुमति या वैध लाइसेंस के खाद्य सामग्री बेचते हुए पाया गया था। आरपीएफ ने कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 144 के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
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शिकायत को 17 दिसंबर को अदालत में प्रस्तुत किया गया जिस पर उसी दिन मामले को पंजीकृत कर सुनवाई की गई। आरोपी को अदालत में पेश किया गया। आरोपी की ओर से विधिक सहायता अधिवक्ता उपस्थित रहे जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से रेलवे के लिए सहायक लोक अभियोजक ने पक्ष रखा।
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अदालत ने प्रथम दृष्टया मामला पाए जाने पर आरोपी को आरोप का नोटिस दिया। नोटिस मिलने के बाद आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और किसी प्रकार के ट्रायल की मांग नहीं की।
आरोपी के दोष स्वीकार करने के आधार पर अदालत ने उसे दोषी ठहराया। इसके बाद सजा के प्रश्न पर दोनों पक्षों की दलीलों को सुना गया। सुनवाई के बाद अदालत ने दोषी को एक हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई। आदेश में यह भी कहा गया कि यदि जुर्माने की राशि अदा नहीं की जाती है तो दोषी को सात दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा। हालांकि, आरोपी ने अदालत में जुर्माने की राशि जमा कर दी। इसके बाद अदालत ने उसे तत्काल रिहा करने के आदेश दिया।