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Rewari News: कॉलेज में थैलेसीमिया कार्यक्रम, एमएलटी छात्रों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
Sat, 07 Nov 2026 12:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 07 Nov 2026 12:15 AM IST
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कार्यक्रम के दौरान एक मंच पर आए डॉक्टर व स्टाफ। स्रोत : कॉलेज
रेवाड़ी। किशन लाल पब्लिक कॉलेज के सभागार में यूथ रेडक्रॉस एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में रोटरी क्लब ऑफ रेवाड़ी सिटी के सहयोग से थैलेसीमिया जागरूकता एवं स्क्रीनिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को इस आनुवंशिक रक्त विकार के लक्षण, रोकथाम और समय पर जांच के महत्व की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र दहिया मुख्य अतिथि तथा इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की यूथ रेड क्रॉस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. समृद्धि विशिष्ट अतिथि रहीं।
फरीदाबाद से हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. प्रवास मिश्रा ने बताया कि थैलेसीमिया में हीमोग्लोबिन का निर्माण प्रभावित होता है। इसके गंभीर मरीजों को नियमित रक्त चढ़ाने और चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।
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उन्होंने बताया कि इसके वाहक व्यक्तियों में अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं होते। यदि दोनों साथी संबंधित आनुवंशिक गुण के वाहक हों तो प्रत्येक गर्भावस्था में बच्चे के गंभीर रूप से प्रभावित होने की संभावना 25 प्रतिशत होती है। इसलिए समय पर जांच और आनुवंशिक परामर्श जरूरी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रोटरी क्लब के डॉ. करतार सिंह यादव और कॉलेज प्राचार्या डॉ. कविता गुप्ता ने की। इस दौरान कॉलेज और एजिलस डायग्नोस्टिक्स के बीच एमओयू भी हुआ।
इसके तहत मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी (एमएलटी) के विद्यार्थियों को प्रयोगशाला में व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। कार्यक्रम में डॉ. गजेंद्र यादव सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, प्राध्यापक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र दहिया मुख्य अतिथि तथा इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय की यूथ रेड क्रॉस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. समृद्धि विशिष्ट अतिथि रहीं।
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फरीदाबाद से हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. प्रवास मिश्रा ने बताया कि थैलेसीमिया में हीमोग्लोबिन का निर्माण प्रभावित होता है। इसके गंभीर मरीजों को नियमित रक्त चढ़ाने और चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।
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उन्होंने बताया कि इसके वाहक व्यक्तियों में अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं होते। यदि दोनों साथी संबंधित आनुवंशिक गुण के वाहक हों तो प्रत्येक गर्भावस्था में बच्चे के गंभीर रूप से प्रभावित होने की संभावना 25 प्रतिशत होती है। इसलिए समय पर जांच और आनुवंशिक परामर्श जरूरी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता रोटरी क्लब के डॉ. करतार सिंह यादव और कॉलेज प्राचार्या डॉ. कविता गुप्ता ने की। इस दौरान कॉलेज और एजिलस डायग्नोस्टिक्स के बीच एमओयू भी हुआ।
इसके तहत मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी (एमएलटी) के विद्यार्थियों को प्रयोगशाला में व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। कार्यक्रम में डॉ. गजेंद्र यादव सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, प्राध्यापक और विद्यार्थी मौजूद रहे।