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Rewari News: शहर की गलियों व मकानों को मिलेगी पहचान, आवंटित होंगे नंबर

Tue, 26 Nov 2024 01:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Tue, 26 Nov 2024 01:55 AM IST
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Streets and houses of the city will get identification, numbers will be allotted
फोटो: 16 रेवाड़ी। शहर की विकसित कॉलोनी। जिसे पहचान की दरकार। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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रेवाड़ी। शहर की कॉलोनियों में स्थित गलियों और मकानों को जल्द ही पहचान मिलेगी। नगर परिषद ने गलियों और मकानों को नंबर आवंटित करने की योजना बनाई गई। वित्त कमेटी की बैठक के बाद इसके लिए सर्वे किया जाएगा।
शहर की दर्जन भर से अधिक कॉलोनियों की गलियों और मकानों को पहचान नहीं मिल पाई है जिसकी वजह से मुकम्मल पता नहीं निर्धारित हुआ है। अब नगर परिषद की ओर से इन्हें पहचान दिलाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वित्त कमेटी की बैठक में प्रक्रिया को सिरे चढ़ाया जा सकता है। इससे पहले पिछले दिनों हुई हाउस की बैठक में यह प्रस्ताव पास हो चुका है। अब फाइनेंस कमेटी की बैठक का इंतजार है। नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि बैठक के बाद लापता गलियों व घरों का सर्वे कराया जाएगा।
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शहर की यह महत्वपूर्ण जरूरत बड़ी परेशानी बनी हुई है। गलियों और घरों के नंबर नहीं होने के कारण कई बार पुलिस भी पते नहीं ढूंढ पाती है। कई कॉलोनियों का तो हाल ये है कि लोगों के नौकरी से संबंधित कॉल लेटर जैसे जरूरी दस्तावेज भी समय से नहीं पहुंच पाते है या बहुत मुश्किल से पहुंचते हैं। वर्षों बाद नगर परिषद हाउस ने इस पर गंभीरता से विचार किया है। कभी भी पार्षदों द्वारा पूरे शहर के लिए यह प्रस्ताव भी नहीं लाया गया। हाल ही में हुई सदन की बैठक में पहली बार पूरे शहर की कॉलोनियों के इस मुद्दे को लेकर चर्चा हुई थी।
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शहर में 31 वार्ड हैं। इन वार्डों में दर्जन भर से अधिक ऐसी काॅलोनियां हैं जो 20 वर्ष या फिर इसे भी अधिक समय से वैध हो चुकी हैं। सरकार इनमें सुविधाएं मुहैया करा चुकी है। इनमें सीवरेज और पानी जैसी सहूलियत शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इन पूरी तरह से विकसित हो चुकी कॉलोनियों में गलियों की भी कोई पहचान नहीं है। हाउस नंबर तो दूर की बात है, इन कॉलोनी में कुतुबपुर, उत्तम नगर, हंस नगर, विजय नगर, आजाद नगर, मधु विहार और शिव नगर जैसे बड़े एरिया भी शामिल हैं। संवाद

पुलिस और डाकिये भी आसानी से नहीं ढूंढ पाते पते
गलियों के नंबर नहीं होने से पुलिस और डाकियों को संबंधित व्यक्ति का घर तलाशने में परेशानी होती है। पुलिसकर्मी मोहल्ले में घुसकर घरों के दरवाजे खटखटा कर संबंधित व्यक्ति के नाम से ही मकान ढूंढते रहते हैं। बाहरी कॉलोनी में दस्तावेज आने पर डाकिये भी बहुत बार समय से तथा सही पते पर डाक नहीं पहुंच पाते। बहुत बार डाक को वापस भी भेज दिया जाता है।

पहली बार हाउस की बैठक में उठा था मुद्दा
कुछ दिन पूर्व पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हुई नगर परिषद हाउस की बैठक में पहली बार पूरे शहर की कॉलोनी की गलियों के नंबर देने का मुद्दा उठा। वार्ड 5 के पार्षद एडवोकेट लोकेश यादव ने यह समस्या उठाते हुए कहा कि वर्षों से बसी हुई कॉलोनी में भी लोगों को मकान ढूंढ़ने में समस्या झेलनी पड़ती है। इसलिए नंबर दिए जाने चाहिए। विधायक लक्ष्मण यादव और चेयरपर्सन पूनम यादव की मौजूदगी में हाउस ने इसका समर्थन किया और प्रस्ताव पास किया।


वर्जन
शहर में कॉलोनियों की गलियों व घरों को नंबर देने को लेकर हाउस की बैठक में प्रस्ताव लाया गया था। पार्षदों की सहमति के बाद उसे पास भी किया जा चुका है। अब इसकी अंतिम रूपरेखा फाइनेंस कमेटी की बैठक में पास होगी। इसके बाद सर्वे कराकर इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।- संदीप मलिक, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, रेवाड़ी।
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